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Single Use Plastic: अगर लागू हुआ कानून तो लाखों लोग हो जाएंगे बेरोजगार

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बेंगलुरु। महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर मोदी सरकार ने सिंगल यूज प्‍लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने की योजना बनाई और पूरे देश में एक साथ लागू करने की बात कहीं गयी। लेकिन मोदी सरकार ने फिलहाल इस पर सख्‍त होने के बजाय फैसला किया हैं सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन नहीं लगाया जाएगा, बल्कि सिर्फ जागरुकता अभियान चलाया जाएगा। ताकि 2022 तक सिंगल यूज प्लास्टिक से निपटा जा सके। इसकी सूचना सरकार ने अपने स्वच्छ भारत ट्विटर हैंडल के जरिए की।अब यह सवाल उठता हैं कि सख्‍त फैसले लिए जाने के लिए पहचानी जाने वाली क्या मोदी सरकार के लिए सिंगल यूज प्‍लास्टिक पर बैन लगाना मुमकिन नहीं था ? ऐसा बिलकुल नहीं हैं सरकार ने इस योजना को इसलिए लागू नहीं किया क्योंकि इसके लागू होने से लाखों लोग बेरोजगार हो गए होते और देश में छाये आर्थिक संकट और गहरा जाता।

modi

बैन लगता तो लाखों लोग बेरोजगार हो जाते

देश पहले ही मंदी के दौर से गुजर रहा है। आटो सेक्टर हो या लघु उद्योग समेत अन्‍य क्षेत्रों में मंदी छायी हुई हैं। केन्‍द्र सरकार भले ही इस मंदी संकट के आने की बात को नाकार रही हैं। लेकिन उसे असलियत का पता हैं। ऐसे में अगर सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन लग जाता तो लाखों लोग बेरोजगार हो जाते और उनकी रोजी-रोटी छिन जाती। आंकड़ो के अनुसार सिंगल यूज प्लास्टिक पर अगर बैन लगा दिया जाता तो इसका असर करीब 10 हजार प्लास्टिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स पर पड़ता, वह बंद हो जाती। अगर ऐसा होता तो कम से कम 3-4 लाख लोगों की नौकरी चली जाती, जो इन मैन्युफैक्टरिंग यूनिट्स में काम करते हैं। देश में करीब 50 हजार प्लास्टिकमैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं, जिनमें से 90 फीसदी एमएसएमई हैं। अगर सिंगल यूज प्लास्टिक बैन लगता तो इसका बड़ा असर एफएमसीजी, ऑटो और इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्री पर भी पड़ता। यही वजह है कि अभी मोदी सरकार ने बैन लगाने को टाल दिया और फिलहाल जागरुकता फैलाने का फैसला किया।

क्या है सिंगल-यूज प्लास्टिक, क्या नहीं

क्या है सिंगल-यूज प्लास्टिक, क्या नहीं

सिंगल यूज प्लास्टिक का मतलब है वो प्लास्टिक, जिसे हम सिर्फ एक बार इस्तेमाल कर के फेंक देते हैं। जैसे डिस्पोजल गिलास, प्लेट और चम्मच, पानी की बोतल हैं। इसके अलावा, सिंगल यूज प्लास्टिक वह भी है, जिसका इस्तेमाल पैकेजिंग में होता है। किसी दुकान से मिलने वाला रिफाइंड ऑयल या तो प्लास्टिक की बोतल में होता है या प्लास्टिक की थैली में, शैंपू की बोतल, दवा की बोतल ये सब भी सिंगल यूज प्लास्टिक है। अरे मैगी भी तो प्लास्टिक के पैकेट में आती है, चायपत्ती भी, नमकीन, बिस्कुट, चिप्‍स समेत अन्‍य, यानी रोजमर्रा की बहुत सारी चीजों में सिंगल यूज प्लास्टिक इस्तेमाल हो रहा है। ये ऐसी चीजें होती हैं, जिनका अधिकतर लोग दोबारा इस्तेमाल नहीं करते। आमतौर पर लोग पानी की बोतल तो एक बार के लिए कुछ लोग दोबारा इस्तेमाल कर भी लें, लेकिन डिस्पोजल तो हर कोई फेंक ही देते हैं। अब जरा खुद ही सोच कर देखिए, क्या सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन लगाया जा सकता है? और अगर बैन लग गया तो ये सब चीजें कैसे मिलेंगी।

ये सिंगल यूज प्लास्टिक नहीं है

सिंगल यूज प्लास्टिक को लेकर कुछ कंफ्यूजन भी है। पर्यावरण विशेषज्ञ के अनुसार अगर कैरीबैग 50 माइक्रोन से कम के हैं, तब तो उन्हें सिंगल यूज प्लास्टिक कहा जा सकता है, लेकिन 50 माइक्रोन से अधिक वाले कैरीबैग लोग नहीं फेंकते हैं। लोग उन बैग को इस्तेमाल कर लेते हैं। यानी ये बैग सिंगल यूज नहीं रहे, उन्हें दोबारा भी इस्तेमाल किया गया। इसी तरह कोल्ड ड्रिंक की बोतलों, खास कर बड़ी बोतलों को भी लोग फेंकते नहीं हैं, बल्कि धो कर दोबारा इस्तेमाल करते हैं। रिफाइंड ऑयल के 3-5 लीटर के डिब्बे, 1 किलो के डिब्बों में पैक होकर आए प्रोडक्ट जैसे चायपत्ती आदि के डिब्बे भी लोग फेंकते नहीं है, बल्कि दोबारा इस्तेमाल कर लेते हैं। ये सब सिंगल यूज प्लास्टिक नहीं हैं।

प्लास्टिक का विकल्प क्या?

प्लास्टिक का विकल्प क्या?

सरकार की मंशा के बीच यह सवाल भी उठने लगा है कि प्लास्टिक की बोतलों का उपयोग बंद होने की स्थिति में इनका विकल्प क्या होगा। कई राज्यों ने पहले भी इस दिशा में प्रयास किए हैं, लेकिन नतीजे उत्साहवर्धक नहीं रहे। इसकी एक बड़ी वजह कॉरपोरेट द्वारा प्लास्टिक पाउच में पैकिंग का निरंतर जारी रहना भी है। सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त भारत की राह में सबसे बड़ी बाधा शैम्पू, तेल, दूध आदि रोजमर्रा के जरूरत की चीजों की पैकिंग भी है। अलग-अलग राज्यों की सरकारों ने समय-समय पर प्लास्टिक का उपयोग रोकने के लिए कदम उठाए, लेकिन इस बाधा की वजह से उन कदमों का विशेष लाभ नहीं मिल सका. सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त भारत का निर्माण करना है तो सरकार को कड़े कदम उठाने होंगे।

पहले से जो नियम हैं उन पर होगी सख्‍ती

पहले से जो नियम हैं उन पर होगी सख्‍ती

पहले बता दें मोदी सरकार की योजना थी कि गांधी जंयती पर सिंगल यूज प्‍लास्टिक पर देश भर में पूरी तरह बैन लगा दिया जाए। जिसमें , प्लास्टिक बैग, कप, प्लेट, छोटी बोतलें, स्ट्रॉ और कुछ तरह के शैशे पर बैन लगाया जाना था। ये सुनने में भले ही आसान लग रहा हो, लेकिन इसके नतीजे भयानक हो सकते थे, जिसे मोदी सरकार ने भांप लिया और फिलहाल बैन लगाने की योजना को आगे बढ़ा दिया। गौरतलब हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 15 अगस्त को ही लाल किले ने सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ एक मुहिम चलाने वाले हैं इसका संकेत किया था। उन्होंने जनता से अपील की थी कि सिंगल यूज प्लास्टिक को कम से कम इस्तेमाल करें, खास कर पॉलीथीन बैग का तो बिल्कुल इस्तेमाल ना करें। कपड़े और पेपर के पैकेट इस्‍तेमाल करने की सलाह दी थी। फिलहाल सरकार सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए जागरुकता फैलाएगी। साथ ही राज्यों से भी इस पर रोक लगाने के लिए कदम उठाने को कहेगी। पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारी चंद्र किशोर मिश्रा ने मीडिया को बताया कि अब सरकार प्लास्टिक को लेकर पहले से ही जो नियम हैं, उन्हें सख्ती से लागू करेगी और राज्यों से भी प्लास्टिक को जमा करने, मैन्युफैक्टरिंग और सिंगल यूज प्लास्टिक से बनी चीजों जैसे पॉलीथीन बैग और स्टाइरोफोन आदि पर शिकंजा कसने को कहेगी।

प्‍लास्टिक का डरावना सच

प्‍लास्टिक का डरावना सच

केन्‍द्र सरकार ने सिंगल यूज प्‍लास्टिक पर बैन लगाने की योजना भले ही इन समस्‍यायों के चलते इसे लागू करने का फैसला फिलहाल टाल दिया लेकिन वास्‍तव में सिंगल यूज प्‍लास्टिक भारत ही नहीं पूरे विश्‍व के लिए भयावह समस्‍या बन कर खड़ी है। इससे धरती, मानव और पर्यावरण को सुरक्षित के अस्तित्‍व को बचाने के लिए संयुक्त प्रयास आवश्‍यक हैं। बता दें अभी तक बने सारे प्लास्टिक का आधा सिर्फ पिछले 15 सालों में बना है। हर साल करीब 80 लाख टन प्लास्टिक वेस्ट समुद्र में चला जाता है। यानी अगर पूरी दुनिया में समुद्र के किनारे कचरे से भरे हुए 5 गार्बेज बैग एक-एक फुट की दूरी पर रखे जाएं, उतना प्लास्टिक वेस्ट समुद्र में हर साल जाता है। 1950 में 23 लाख टन प्लास्टिक था, 2015 तक ये 44.8 करोड़ टन हो चुका है और 2050 तक इसके 90-100 करोड़ टन हो जाने की उम्मीद है। 2050 तक समुद्र में मछलियों से ज्यादा प्लास्टिक की बोलतें तैरती नजर आएंगी।

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English summary
know why the Modi government did not ban Single Use Plastic,If this law is implemented then how lakhs of people will become unemployed?
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