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कन्हैया कुमार की चार्जशीट में देरी, अब निर्भया दोषियों की फांसी में देरी, उठे केजरीवाल की मंशा पर सवाल?

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बेंगलुरू। दिल्ली के निवतर्मान मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीलाल एक बार दिल्ली में आम आदमी सरकार की पुनर्वापसी की जद्दोजहद में हैं और लगातार वादों और इरादों के जरिए दिल्ली की जनता को लुभाने में लगे है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन निर्भया गैंगरेप के बाद उभरे आंदोलन से उभरकर दिल्ली के मुख्यमंत्री बने केजरीवाल के शासन में निर्भया केस के दोषियों की फांसी में हो रही देरी अब लोगों को अखऱने लगी है।

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यह संयोग ही है कि वर्ष 2016 में जेएनयू कैंपस में देश विरोधी नारे लगाने के आरोपी तत्कालीन जेएनयूएसयू अध्यक्ष कन्हैया कुमार के खिलाफ देशद्रोह की चार्जशीट दायर करने की मंजूरी के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा दिल्ली सरकार को भेजी गई फाइल पर भी अभी तक केजरीवाल कुंडली मारकर बैठे हुए है, जिसके लिए केजरीवाल लगातार विपक्ष के निशाने पर रहे हैं और अब विपक्ष ने केजरीवाल सरकार को निर्भया के साथ गैंगरेप और मर्डर के चारों दोषियों की फांसी में हो रही देरी के लिए भी जिम्मेदार ठहरा रही है, जिससे केजरीवाल सरकार बुरी तरह से घिर गई है।

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विपक्ष का आरोप है कि दिल्ली सरकार जेएनयू कैंपस में देशविरोधी नारे लगाने के आरोप में गिरफ्तार किए गए कन्हैया कुमार समेत 7 आरोपियों को बचाने के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा दायर चार्जशीट पर हस्ताक्षर नहीं कर रही है। अब ऐसा ही आरोप केजरीवाल सरकार पर 16 दिसंबर, 2012 में राजधानी दिल्ली में चलती बस में गैंगरेप और मर्डर की शिकार हुई निर्भया के दोषियों को फांसी पर चढ़ाने में हो रही देरी के लिए भी लग रहे हैं, जिसके चलते दोषियों को फांसी पर लटकाने की तारीख पर संशय बना हुआ है। निर्भया के दोषियों की फांसी में देरी और कन्हैया कुमार की चार्जशीट में हो रही देरी पर केजरीवाल सरकार की मंशा पर सवाल जरूर उठा दिए हैं।

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LAGE RAHO KEJRIWAL: ऐसा हुआ तो दिल्ली में शीला दीक्षित से भी बुरी होगी अरविंद केजरीवाल की हार!

आरोप है केजरीवाल सरकार व जेल प्रशासन ने फांसी देने में ढिलाई बरती

आरोप है केजरीवाल सरकार व जेल प्रशासन ने फांसी देने में ढिलाई बरती

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईऱानी का आरोप है कि वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दोषियों द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद केजरीवाल सरकार के अधीन जेल प्रशासन द्वारा फांसी की प्रक्रिया में ढील बरती गई, जिसका फायदा उठाकर दोषी द्वारा लगातार फांसी को टालने का प्रयास किया जा रहा है। ईरानी ने केजरीवाल यह भी आरोप लगाया कि केजरीवाल को निर्भया के आरोपियों से सहानुभूति है। शायद इसीलिए निर्भया के साथ सबसे अधिक बर्बरता से पेश आए छठे नाबालिग आरोपी को बाल सुधार गृह से तीन वर्ष बाद निकलने के बाद 10 हजार रुपए नकद और सिलाई मशीन मुहैया करवाए।

आरोप है कि दिल्ली सरकार ने वर्ष 2018 में जेल मैनुअल में बदलाव किया

आरोप है कि दिल्ली सरकार ने वर्ष 2018 में जेल मैनुअल में बदलाव किया

केजरीवाल पर आरोप है कि दिल्ली सरकार ने वर्ष 2018 में जेल मैनुअल में बदलाव किया है, जिसके चलते ही निर्भया के चारों दोषियों को फांसी को चढ़ाने में देरी हो रही है, क्योंकि तफ्तीश के बाद यह बात स्पष्ट हो चुका है कि दिल्ली सरकार ने वर्ष 2018 में जेल मैनुअल में संशोधन किया था, जिसका फायदा उठाकर चारों दोषी लगातार अपनी फांसी को टालने में सफल हो रहे हैं। दिल्ली सरकार द्वारा संशोधित मैनुअल के कारण ही अब निर्भया के चारों दोषियों को फांसी पर लटकाने के लिए जारी नई तारीख 1 फरवरी पर आशंका के बादल मंडरा रहे हैं, क्योंकि अभी निर्भया गैंगरेप और मर्डर केस के केवल एक दोषी मुकेश सिंह की दया याचिका रद्द हुई नहीं कि दोषी पवन गुप्ता ने तुरंत दया याचिका भिजवा दी है।

दोषी अक्षय ठाकुर व विनय शर्मा के पास अभी भी बचा है अंतिम विकल्प

दोषी अक्षय ठाकुर व विनय शर्मा के पास अभी भी बचा है अंतिम विकल्प

चूंकि अभी भी 2 अन्य दोषी क्रमशः अक्षय ठाकुर और विनय शर्मा के पास फांसी की तिथि आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजने का अंतिम कानूनी विकल्प बचा हुआ है। ऐसे में माना जा रहा है कि पटियाला हाउस कोर्ट से जारी 1 फरवरी को भी दोषियों को फांसी पर लटकाना भी जेल प्रशासन के लिए संभव नहीं हो जाएगा और फिर दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट को एक बार फिर एक नई तारीख और एक नया डेथ वारेंट जारी करना पड़ सकता है। हालांकि फांसी में देरी के लिए केजरीवाल सरकार पर विपक्ष के लगाए आरोपों के बाद सामने आए सीएम केजरीवाल ने सफाई देते हुए कहा है कि दिल्ली सरकार भी चाहती है कि दोषियों को जल्द से जल्द फांसी हो।

1 फरवरी को भी चारों दोषियों की फांसी पर चढ़ाना हुआ मुश्किल

1 फरवरी को भी चारों दोषियों की फांसी पर चढ़ाना हुआ मुश्किल

माना जा रहा है कि निर्भया के चारों दोषियों की फांसी में हो रही देरी के लिए जेल का नया मैन्युअल है, जिसे केजरीवाल सरकार ने वर्ष 2018 में संशोधित किया है। संशोधित नए जेल मैनुअल का रूल 854 के मुताबिक एक केस में एक से ज्यादा दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई हो तो तब तक उनमें से किसी को फांसी पर नहीं चढ़ाया जा सकता है, जब तक कि प्रत्येक दोषी की अपील सुप्रीम कोर्ट से खारिज न हो जाए। यही नियम दिल्ली की जेलों में बंद सजायाफ्ता मुजरिमों पर लागू होता है, जिसमें कहा गया है कि अगर एक केस में एक से ज्यादा दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई हो और उनमें सिर्फ एक दया याचिका दायर करता है तो उसकी याचिका पर फैसला आने तक सभी दोषियों की फांसी टाल दी जाएगी।

कन्हैया कुमार के खिलाफ चार्जशीट को 12 महीने बाद भी मंजूरी नहीं!

कन्हैया कुमार के खिलाफ चार्जशीट को 12 महीने बाद भी मंजूरी नहीं!

कुछ ऐसा ही मामला जेएनयूएसयू के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार के खिलाफ दिल्ली पुलिस की चार्जशीट को लेकर फंसा हुआ है। दिल्ली पुलिस द्वारा कन्हैया कुमार समेत 7 लोगों पर देशद्रोह का चार्जशीट दाखिल की मंजूरी के लिए केजरीवाल सरकार को फाइल भेजे अब करीब 12 महीने से अधिक हो चुका है, लेकिन केजरीवाल ने अभी तक फाइल दिल्ली सरकार के गृह मंत्रालय में धूल खा रही है। दिल्ली पुलिस ने गत 14 जनवरी , 2019 को करीब तीन साल बाद मामले की जांच के बाद दिल्ली पुलिस ने 1200 पन्नों में दाखिल अपनी चार्जशीट में कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बान के साथ ही सात कश्मीरी छात्रों पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दायर किया था। माना जा रहा है कि केजरीवाल अभियोजन को मंजूरी देने के पक्ष में नहीं है।

अफजल गुरु की फांसी की बरसी पर जेएनयू में लगे थे राष्ट्रविरोधी नारे

अफजल गुरु की फांसी की बरसी पर जेएनयू में लगे थे राष्ट्रविरोधी नारे

9 फरवरी, वर्ष 2016 को संसद भवन पर हुए हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी देने की बरसी पर राजधानी दिल्ली में स्थित जेएनयू में राष्ट्रविरोधी नारेबाजी लगाने के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने तत्कालीन छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को गिरफ्तार किया था और काफी हो-हल्ले के बाद दिल्ली पुलिस को उसे छोड़ना पड़ा था। हालांकि तब केजरीवाल सरकार द्वारा दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाया गया कि उसने मुकदमा दायर करने से पूर्व दिल्ली सरकार की अनुमति नहीं ली गई, लेकिन कोर्ट के फटकार के बाद दिल्ली पुलिस द्वारा भेजी फाइल अभी भी केजरीवाल सरकार की मंजूरी के लिए बाट जोह रही है।

दिल्ली सरकार ने कन्हैया कुमार के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी नहीं दी

दिल्ली सरकार ने कन्हैया कुमार के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी नहीं दी

दिल्ली पुलिस अभियोग की मंजूरी के लिए तब से केजरीवाल सरकार के चक्कर काट रही थी और अचानक सितंबर 2019 को ऐन जेएनयू छात्रसंघ चुनाव के वक्त केजरीवाल सरकार ने कन्हैया कुमार और अन्य के खिलाफ अभियोजन के लिए मंजूरी नहीं देने का फैसला कर लिया। जारी बयान में केजरीवाल सरकार द्वारा कहा गया कि दिल्ली सरकार का गृह विभाग सभी तथ्यों पर विचार-विमर्श के बाद उचित निर्णय लेगा। इस दौरान मुख्यमंत्री केजरीवाल यह कहने से चूके कि मामले में कोई राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। वहीं, मामले पर दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने कहना था कि मामले में दिल्ली पुलिस ने जो सबूत पेश किए हैं उनके आधार पर देशद्रोह का मामला नहीं बनता है। कारण स्पष्ट था कि केजरीवाल सरकार कन्हैया कुमार और अन्य के खिलाफ राष्ट्रद्रोह के अभियोजन के लिए मंजूरी के पक्ष में नहीं है।

कन्हैया कुमार के खिलाफ चार्जशीट और निर्भया दोषियों की फांसी में देरी क्यों

कन्हैया कुमार के खिलाफ चार्जशीट और निर्भया दोषियों की फांसी में देरी क्यों

कन्हैया कुमार और अन्य 7 के खिलाफ राष्ट्रद्रोह के मुकदमें में मंजूरी में देरी और निर्भया के चारों दोषियों को फांसी पर लटकाए जाने में हो रही देरी केजरीवाल सरकार की मंशा पर संदेह तो पैदा करती है। यह इसलिए भी आशंकित करती है, क्योंकि वर्ष 2017 में पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद केजरीवाल सरकार ने दोषियों को फांसी पर लटकाने की प्रक्रिया पूरी करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई और वर्ष 2018 में दिल्ली सरकार के अधीन जेल के मैन्युअल में संशोधन कर दिया गया। क्योंकि नए जेल मैनुअल चलते ही निर्भया के चारों दोषी संशोधित नियम की आड़ में लगातार फांसी की तारीख टालने में सफल हो रहे हैं, जिससे निर्भया को इंसाफ मिलने में देरी हो रही है। यही वजह थी कि निर्भया की मां ने चारों दोषियों को जल्द फांसी पर चढ़ाने के लिए दिल्ली की पटियाला हाऊस कोर्ट से जल्द डेथ वारेंट ने जारी करने की अपील करनी पड़ी, लेकिन अभी भी ढाक के तीन पात की तरह अटका हुआ है।

नए जेल मैनुअल का इस्तेमाल फांसी टालने के लिए कर रहे हैं चारो दोषी

नए जेल मैनुअल का इस्तेमाल फांसी टालने के लिए कर रहे हैं चारो दोषी

पूरी आशंका है कि दिल्ली पटियाला हाऊस द्वारा दी गई फांसी की नई तारीख 1 फरवरी को चारों दोषियों को फांसी पर नहीं लटकाया जा सकेगा, क्योंकि भले ही राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रिकॉर्ड 4 दिन में दोषी मुकेश सिंह की दया याचिका खारिज कर दी है, लेकिन बाकी 3 दोषियों के पास अभी दया याचिका के जरिए फांसी की तारीख को टालने का विकल्प बचा हुआ है। अमूमन दया याचिका को खारिज होने में कम से कम 7 दिन का वक्त लगता है और तो पूरी आशंका है कि शेष बच्चे आरोपी 1 फरवरी और उससे आगे की मुकर्रर फांसी को टालने के लिए केजरीवाल सरकार द्वारा संशोधित किए गए नए जेल मैनुअल को फांसी की तारीख को टालने के लिए एक टूल का तरह इस्तेमाल करेंगे।

संशोधित जेल मैनुअल पर दिल्ली सरकार को फटकार चुकी है हाईकोर्ट

संशोधित जेल मैनुअल पर दिल्ली सरकार को फटकार चुकी है हाईकोर्ट

शायद यही कारण है कि दिल्ली सरकार द्वारा संशोधित नए जेल मैनुअल से खीझकर दिल्ली हाई कोर्ट के जजों ने दिल्ली सरकार को खूब खरी-खोटी सुनाई है। जस्टिस मनमोहन और जस्टिस संगीता धींगड़ा सहगल की पीठ ने आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को खरी-खोटी सुनाते हुए कहा, 'आप तब तक एक्शन नहीं ले सकते जब तक कि सभी दोषियों ने दया याचिका दायर नहीं कर दी हो, तो आपका कानून खराब है। ऐसा लगता है कि (नियम बनाते वक्त) दिमाग का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं किया गया। हर दया याचिका अलग-अलग आधार पर दायर की जाती है। आप आखिरी न्यायिक फैसले का इस तरह मजाक नहीं बना सकते।'

फांसी टालने के लिए कानून के दुरुपयोग करने' का मौका देता है नया जेल मैनुअल

फांसी टालने के लिए कानून के दुरुपयोग करने' का मौका देता है नया जेल मैनुअल

दिल्ली हाईकोर्ट ने कोर्ट ने दिल्ली सरकार के साथ-साथ जेल अथॉरिटीज को भी फटकार लगाई थी। जजों ने इस बात पर दुख जताया कि ऐसा सिस्टम बनाया गया जो 'कैंसर से जूझ रहा है' और जो 'रणनीति के तहत' फांसी टालने के लिए दोषियों को 'कानून के दुरुपयोग करने' का मौका देता है। दरअसल, संशोधित जेल मैनुअल के मुताबिक एक केस में एक से ज्यादा दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई हो तो तब तक उनमें से किसी को फांसी पर नहीं चढ़ाया जा सकता है जब तक प्रत्येक दोषी की अपील सुप्रीम कोर्ट से खारिज न हो जाए।

दिल्ली सरकार के अधीन है जेल, 2018 में जेल मैनुअल में किया गया संशोधन

दिल्ली सरकार के अधीन है जेल, 2018 में जेल मैनुअल में किया गया संशोधन

दिल्ली सरकार के अधीन जेल विभाग का नया जेल मैनुअल केजरीवाल के इरादों पर संदेह करने के पूरे मौके देते है, इसकी पुष्टि दिल्ली हाईकोर्ट भी कर चुकी है। इसलिए कहा जा सकता है कि दिल्ली की केजरीवाल सरकार एंटी नेशनल और प्रो रेपिस्ट जैसा व्यवहार कर रही है। चूंकि दिल्ली का विधानसभा चुनाव नजदीक है और दिल्ली की जनता को तय करना है कि उसे कैसी सरकार चाहिए। मालूम हो, दिल्ली में 8 फरवरी को मतदान होने हैं और मतगणना 11 फरवरी को होनी है। केजरीवाल सरकार अपने फ्री के वादों के साथ फिर मैदान में है और अबकी बार 67 पार के नारे के साथ ताल ठोक रही है।

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English summary
It is a mere coincidence that Kejriwal has not yet approved the file sent to the Delhi government for the approval of a sedition case against the then JNUSU president Kanhaiya Kumar, accused of raising anti-national slogans at the JNU campus in 2016. For which Kejriwal has been constantly on target of the opposition and now for the delay in hanging of the four convicts in the Nirbhaya gang rape and murder case. The Opposition is holding the Kejriwal government responsible, which has now badly surrounded the Kejriwal government.
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