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क्यों लगा अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन? सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब

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नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू करने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। कोर्ट ने 29 जनवरी या अगले सोमवार तक केंद्र सरकार से इस मामले में अपनी रिपोर्ट तलब की है।

supreme court

कांग्रेस पार्टी और विधानसभा के स्पीकर नबाम रेबिया की अर्जी पर कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह निर्देश दिया है। इससे पहले कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल ज्योति प्रसाद राजकोवा से 15 मिनट के भीतर अपनी रिपोर्ट देने को कहा था।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जगदीश सिंह खेहर की बेंच ने इस मामले की सुनवाई के दौरान अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल से प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की संस्तुति देने की रिपोर्ट देने को कहा था।

कांग्रेस की तरफ से वरिष्ठ वकील एस नरीमन और कपिल सिब्बल इस मामले में कोर्ट में पैरवी कर रहे हैं। गौरतलब है कि अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा की 60 सीटें हैं लेकिन कांग्रेस के कई विधायकों भाजपा में शामिल हो गये हैं।

प्रदेश में नियमानुसार पिछले छह महीने में विधानसभा का सत्र नहीं बुलाया गया जिसके चलते राज्यपाल ने प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू करने की संस्तुति केंद्र सरकार को दी थी।

गृहमंत्री ने अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए राष्ट्रपति से संस्तुति की, हालांकि कुछ सवालों के बाद प्रणव मुखर्जी ने प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की मंजूरी दे दी थी।

वहीं इस पूरे प्रकरण पर प्रदेश के मुख्यमंत्री और कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने पीएम मोदी और केंद्र सरकार पर गलत तरीके से प्रदेश की सत्ता में आने का आरोप लगाया है।

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English summary
Know why President rule imposed in Arunachal Pradesh and Supreme court direction. Court has asked the centre to file its report by 29 Jan.
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