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अकेले पीएम को ही क्यों मिलती है चुनाव में सरकारी विमान की छूट?

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नई दिल्ली। देश में आम चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है। चुनाव आयोग ने रविवार को आम चुनाव का ऐलान करते हुए कहा कि इस बार कुल 7 चरण में चुनाव होंगे। गौर करने वाली बात यह है कि पिछली बार 9 चरण में चुनाव हुआ था, लेकिन इस बार आयोग ने चुनाव कार्यक्रम को छोटा करते हुए इसे सात चरण में कराए जाने का ऐलान किया है। चुनाव आयोग के ऐलान के साथ ही देशभर में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है, लिहाजा कोई भी राजनीतिक दल इस आचार संहिता का उल्लंघन नहीं कर सकता है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद भी देश के प्रधानमंत्री को सरकारी विमान के इस्तेमाल की इजाजत होती है।

दिलचस्प है पीछे की कहानी

दिलचस्प है पीछे की कहानी

आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद भी आखिर क्यों देश के प्रधानमंत्री को सरकारी विमान इस्तेमाल करने की इजाजत क्यों होती है इसके पीछे की कहानी बेहद दिलचस्प है। दरअसल देश में जब पहली बार 1952 में आम चुनाव हुए तो उस वक्त देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू नहीं चाहते थे कि चुनाव अभियान के लिए सरकारी विमान में यात्रा करें। उन्हें ऐसा करना सही नहीं लगता था, लेकिन बड़ी दिक्कत यह थी कि कांग्रेस के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह चार माह तक चलने वाले चुनावी अभिायन में विमान का खर्च उठा सके।

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पंडित नेहरू थे खिलाफ

पंडित नेहरू थे खिलाफ

पंडित नेहरू इस बात पर अडिग थे कि चुनाव प्रचार के लिए सरकारी वहन पर विमान का इस्तेमाल नहीं करेंगे। लेकिन उस वक्त ऑडिटर जनरल ने एक तरीका ढूंढ निकाला जिससे कि पंडित नेहरू की समस्या खत्म हो सके। दुर्गादास की किताब कर्जन टू नेहरू में इस बात का जिक्र किया गया है। किताब में कहा गया है कि ऑडिटर जनरल ने कहा था कि देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा बहुत जरूरी है, उन्हें सभी संकटों से बचाना भी जरूरी है और ऐसा तभी हो सकता है जब प्रधानमंत्री हवाई यात्रा करें।

ढूंढी गई यह तरकीब

ढूंढी गई यह तरकीब

ऑडिटर जनरल ने तर्क दिया कि अगर पीएम विमान से यात्रा करते हैं तो उन्हें सुरक्षा के लिए बहुत बड़े स्टाफ की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन अगर वह रेल से सफर करते हैं तो बहुत बड़े स्टाफ की जरूरत पड़ेगी और इसमे अधिक खर्च होगा। प्रधानमंत्री की सुरक्षा राष्ट्रीय दायित्व है लिहाजा देश को इस खर्च को वहन करना चाहिए। पंडित नेहरू को इस दुविधा से निकालने के लिए यह तरीका ढूंढा गया, जिसमे कई सुझाव भी दिए गए। जिसके बाद ऐसे नियम बनाए गए कि प्रधानमंत्री चुनाव के दौरान सरकारी विमान का इस्तेमाल कर सके।

बनाया गया नियम

बनाया गया नियम

नियम बनाया गया कि अगर चुनाव के दौरान पीएम विमान से यात्रा करते हैं तो उसमे पंडित नेहरू को आम यात्री जितना विमान यात्रा के लिए किराया देता है उतना किराया देना होगा। पीएम के साथ विमान में यात्रा करने वाले सुरक्षा स्टाफ और पीएम के स्टाफ का किराया सरकार देगी। लेकिन अगर विमान में कांग्रेस का कोई नेता सफर करता है तो उसे अपना किराया देना होगा। ऐसे में पंडित नेहरू की समस्या का समाधान हो गया और वह बहुत की कम पैसे देकर सरकारी विमान में यात्रा कर सकते थे।

देश में कहीं भी जा सकते हैं पीएम

देश में कहीं भी जा सकते हैं पीएम

पंडित नेहरू के बाद देश के अन्य प्रधानमंत्रियों को भी यह सुविधा हासिल हो गई। ऐसे में इस फैसले के बाद देश के सभी प्रधानमंत्री सरकारी विमान का इस्तेमाल चुनाव के दौरान कर सकते हैं। बता दें कि प्रधानमंत्री एयर इंडिया के विमान से देश के किसी भी एयरपोर्ट पर जा सकते हैं। लेकिन अगर पीएम को किसी ऐसी जगह पर जाना है जहां एयरपोर्ट नहीं तो पीएम को वायुसेना पीएम को छोटा विमान या हेलीकॉप्टर मुहैया कराती है, जिससे वह देश के किसी भी हिस्से में जा सकते हैं।

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English summary
Know why PM has right to go in government flight during elections.
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