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अटल टनल के खुलने से क्यों बढ़ने वाली है चीन की चिंता?

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मनाली। हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत शहर मनाली में तैयार हुई अटल रोहतांग टनल ने भारत को रणनीतिक तौर पर मजबूत कर दिया है। 10,000 फीट से ज्‍यादा की ऊंचाई पर इस सुरंग को बनाकर पूरी दुनिया के सामने एक मुश्किल चुनौती को पूरा करके दिखाया गया है। इस सुरंग को इंजीनियरिंग का एक अद्भभुत नमूना करार दिया जा रहा है। वहीं इसके शुरू होते ही चीन के मुकाबले भारत की सेना की ताकत दोगुनी हो गई है। अटल रोहतांग सुरंग, भारतीय सेना रणनीतिक तौर पर और ताकतवर हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन अक्‍टूबर को इसका उद्घाटन किया है।

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    हर मौसम में होगी जवानों की तैनाती

    हर मौसम में होगी जवानों की तैनाती

    अटल सुरंग के उद्घाटन के बाद इंडियन आर्मी के टी-90 टैंक्‍स और इनफेंट्री कॉम्‍बेट व्‍हीकल आसानी से लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (एलएसी) के करीब तैनात हो सकेंगे। यह सुरंग सिंगल ट्यूब और दो लेन वाली है। एक ऑफिसर की तरफ से बताया गया है, 'हर मौसम में खुली रह सकने वाली सुरंग मिलिट्री ट्रैफिक को आसानी से संभाल सकती है और यहां तक कि इससे बख्‍तरबंद वाहन भी आसानी से गुजर सकते हैं।' यह टनल लद्दाख की तरफ जाती है और इस जगह को और ज्‍यादा ऑल वेदर सुरंग की जरूरत है। यह सुरंग पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का सपना थी और इस वजह से इसका नाम उनके नाम पर पड़ा है। इस सुरंग को बनाने का फैसला वर्ष 2000 में लिया गया था।

    3800 करोड़ रुपए का खर्च

    3800 करोड़ रुपए का खर्च

    टनल को पूरा करने में करीब 3,800 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। एक पल को यहां पर सुरंग के ऊपर बह रही नहर ने निर्माण कार्य को ही बंद करने पर मजबूर कर दिया था। घोड़े की नाल के आकार की इस सुरंग में हर 150 मीटर पर एक टेलीफोन है और हर 60 मीटर पर फायर हाइड्रेंट यानी आग से रक्षा का उपाय मौजूद है। सिर्फ इतना ही नहीं हर 2.2 किलोमीटर पर एक मोड़ है तो हर 500 मीटर पर एक इमरजेंसी एग्जिट दिया गया है। इसके अलावा हर एक किलोमीटर पर हवा की गुणवत्‍ता बताने वाला मॉनिटरिंग सिस्‍टम दिया गया है। इस प्रोजेक्‍ट को 10 साल बाद सफलता मिल सकी है। इसके उद्घाटन के साथ ही बीआरओ ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बॉर्डर के इलाके में प्रोजेक्‍ट को पूरा करने में उसका कोई सानी नहीं है।

    इंजीनियरिंग का बेहतरीन नमूना

    इंजीनियरिंग का बेहतरीन नमूना

    इस सुरंग की वजह से मनाली से लेह का सफर बस पांच घंटे का ही रह जाएगा। यह सुरंग इसलिए भी खास है क्‍योंकि लद्दाख तक पहुंचे के जो दो रास्ते अभी हैं, वो दोनों ही सर्दियों में बंद हो जाते हैं। एक रास्ता रोहतांग पास पर बना लेह-मनाली हाईवे है जबकि श्रीनगर-द्रास-कारगिल-लेह हाईवे पर जोजिला पास है। दोनों ही रास्ते सर्दियों में बर्फबारी के वजह से बंद हो जाते हैं। अटल सुरंग को 10,000 फीट से ज्‍यादा की ऊंचाई पर पीर पंजार रेंज से निकाला गया है। दुनिया में इतनी ऊंचाई पर बना यह पहली हाइवे टनल है। 3,000 मजदूरों और बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) 24 घंटे और हफ्ते के सातों दिन शिफ्ट में काम हुआ।

    टनल के अंदर है एक इंटेलीजेंस सिस्‍टम

    टनल के अंदर है एक इंटेलीजेंस सिस्‍टम

    इस सुरंग में हर 250 मीटर पर सीसीटीवी इंस्‍टॉल किए गए हैं। साथ ही हादसों का पता लगाने के लिए एक इंटेलीजेंस सिस्‍टम दिया गया है। इस सुरंग में 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ड्राइव किया जा सकता है। साथ ही सुरंग एक दिन में 3,000 कारों और 1500 ट्रकों का बोझ झेल सकती है। इसे तैयार करने में 12,252 मीट्रिक टन स्‍टील, 1,69,426 मीट्रिक टन सीमेंट और 1,01,336 मीट्रिक टन कंक्रीट का प्रयोग किया गया है। 475 किलीमीटर लंबी सड़क जो मनाली से लेह तक जाती है, उसके बीच ही यह टनल पड़ती है और यह पूरे साल खुली रहेगी।5,05,264 मीट्रिक टन मिट्टी और मिट्टी की खुदाई की गई है।

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    English summary
    Know why Atal Rohtang Tunnel is causing worry to China.
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