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निर्भया केस: जानिए भारत में निर्भया केस से पहले किस बलात्‍कारी को दी गई थी फांसी

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बेंगलुरु। हैदराबाद में महिला डॉक्टर के साथ जो हुआ, उसने हर किसी की आंखों को नम कर दिया। इस दर्दनाक घटना ने सबके दिलों में निर्भया केस की याद ताजा करा दी। इंसाफ की गुहार लगाने के लिए लोग सड़कों पर उतर आए और डाक्‍टर के साथ निर्भया के गुनाहगारों को फांसी की सजा देने की मांग की जाने लगी। लेकिन इसी बीच हैदराबाद पुलिस ने महज दस दिनों बाद ही डाक्‍टर के बलात्कारियों को इंनकाउन्‍टर में मौत के घाट उतार दिया।

nirbhya

जिस पर पूरे देश में जश्‍न मनाया गया,वहीं सात वर्ष बाद भी निर्भया के हत्‍यारों को जल्‍द से जल्‍द फांसी के फंदे पर चढ़ाए जाने की मांग ने और जोर पकड़ लिया। आखिरकार अब निर्भया के चारों दोषियों को फांसी देने की तैयारी चल रही है। अनुमान लगाया जा रहा है कि जल्द ही उन्हें फांसी दे दी जाएगी। लेकिन क्या जानते हैं भारत में इससे पहले आखिरी बार कब किसी बलात्कारी को फांसी की सज़ा दी गई थी या अभी हमारे देश में कितने बलात्कार हुए हैं जिन्होंने हमें शर्मसार किया है।

14 अगस्त, 2004 को बलात्कारी धनंजय चटर्जी को हुई थी फांसी

14 अगस्त, 2004 को बलात्कारी धनंजय चटर्जी को हुई थी फांसी

आज से लगभग 15 वर्ष पहले भारत में आखिरी बार बलात्कार के एक दोषी को फांसी के फंदे पर लटकाया गया था। 14 अगस्त, 2004 को आखिरी बार फांसी की सजा दी गई थी। जिस बलात्‍कारी को सजा दी गयी वह धनंजय चटर्जी था। उसने नाबालिग छात्रा का रेप कर उसकी हत्या कर दी थी। धनंजय को कोलकाता के अलीपुर जेल में फांसी दी गई थी। तब से लेकर आज तक देश में लगभग 4 लाख बलात्कार की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन इतने वर्षों में किसी बलात्कारी को फांसी की सजा तो मिली लेकिन फांसी नहीं दी गयी।

39वें जन्‍मदिन के दिन ही दी गयी थी धनंजय को फांसी

39वें जन्‍मदिन के दिन ही दी गयी थी धनंजय को फांसी

यह भी एक संयोग था कि धनंजय को जिस तारीख को (14 अगस्त) को फांसी दी गयी, उस दिन उसका 39वां जन्‍मदिन भी था। कहते हैं कि मौत सामने हो, तो लोग झूठ नहीं बोलते, लेकिन धनंजय चटर्जी के सामने फांसी का फंदा झूल रहा था, तब भी वह यही दोहरा रहा था कि वह निर्दोष है। 14 अगस्त 2004 की सुबह करीब 4.30 बजे अलीपुर सेंट्रल जेल में धनजंय चटर्जी को फांसी दी गयी थी।

नाबालिग लड़की का बलात्कार के बाद कर दी थी हत्या

नाबालिग लड़की का बलात्कार के बाद कर दी थी हत्या

उसे कोलकाता के भवानीपुर के आनंद अपार्टमेंट में रहने वाली नाबालिग स्कूल छात्रा से बलात्कार व हत्या के मामले में दोषी करार दिया गया था। धनंजय चटर्जी उक्त अपार्टमेंट में सिक्टोरिटी गार्ड की नौकरी किया करता था। 5 मार्च 1990 की दोपहर नाबालिग लड़की फ्लैट में मृत पायी गयी थी। कोलकाता पुलिस के डिटेक्टिव डिपार्टमेंट का संदेह धनंजय चटर्जी पर गया था और उसे कालिंदी स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया गया था। मामले को लेकर देशभर में चर्चा हुई थी। चूंकि उस वक्त तक निजी मीडिया चैनल भी आ गये थे, घटना होने के बाद से ही मीडिया ट्रायल शुरू हो गया था और आखिरकार कोर्ट ने उसे दोषी करार देते हुए फांसी की सजा मुकर्रर कर दी थी।

राष्ट्रपति डॉ कलाम ने धनंजय की दया याचिका खारिज कर दी थी

राष्ट्रपति डॉ कलाम ने धनंजय की दया याचिका खारिज कर दी थी

सामाजिक कार्यकर्ताओं व वकीलों ने कोर्ट के फैसले से नाखुशी जाहिर की थी और कहा था कि धनंजय को न्याय नहीं मिला। उस वक्त आईएसआई कोलकाता के प्रोफेसर व वकीलों ने अपने स्तर पर मामले की तहकीकात की थी। तहकीकात में मिले तथ्यों के आधार पर उन्होंने एक किताब भी लिखी थी, जिसमें बताया गया था कि न्याय में कोताही हुई। किताब में मीडिया ट्रायल की भी तीखी आलोचना की गयी थी। उस वक्त राष्ट्रपति रहे डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के पास धनंजय की दया याचिका भेजी गयी थी, लेकिन उन्होंने यह याचिका खारिज कर दी थी। धनंजय चटर्जी को जब फांसी हुई, तब केंद्र में नई-नई यूपीए की सरकार आई थी और मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने थे।

आखिरी समय बोलता रहा झूठ

आखिरी समय बोलता रहा झूठ

कहते हैं कि मौत सामने हो, तो लोग झूठ नहीं बोलते, लेकिन धनंजय चटर्जी के सामने फांसी का फंदा झूल रहा था, तब भी वह यही दोहरा रहा था कि वह निर्दोष है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उसके गले में फंदा डालते वक्त हैंगमैन ने उससे कहा था, ‘धनंजय, मैं जो कुछ भी कर रहा हूं, उसके लिए मुझे माफ करना। सरकार और कोर्ट ने मुझे जो आदेश दिया है, मैं बस उसका पालन कर रहा हूं। मुझे माफ करना।'इस पर धनंजय ने कहा था, ‘मैं आपको माफ करता हूं। भगवान आपको आशीर्वाद दें।'उसने फंदे पर झूलने से पहले यह भी कहा था कि भगवान हम सब के लिए दयालू हों।

हैंगमैन के अनुसार उसके चेहरे पर आखिर तक अपराध का कोई भाव नहीं था और वह खुद को निर्दोष बताता रहा था। उसने कहा मैंने वकीलों को भी बोला है। मेरे खिलाफ षड्यंत्र हो रहा है। फांसी से पहले उसका एक लंबा इंटरव्यू लिया गया था। प्रख्यात फिल्म निर्देशक एम. एस. सथ्यू की डॉक्यूमेंटरी ‘द राइट टू लिव'में इस इंटरव्यू को शामिल किया गया है। धनंजय चटर्जी ने इस इंटरव्यू में भी खुद को निर्दोष बताया था। इतना ही नहीं बांग्ला में धनंजय नाम से एक फिल्म भी बनायी गयी। इस फिल्म में भी फांसी की सजा पर सवाल उठाये गये हैं।

निर्भया के बाद भी नहीं बदली देश की सूरत

निर्भया के बाद भी नहीं बदली देश की सूरत

सात साल पहले 2012 में जब पूरा देश गुस्से में था, तब निर्भया केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट में भेजा गया। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सिर्फ 9 महीने के अंदर अपना फैसला भी सुना दिया। 13 सितंबर 2013 में निर्भया के गुनाहगारों को फांसी देने का वो फैसला आज सात साल बाद भी अपने अंजाम तक पहुंच पा रहा है। निर्भया रेप केस के बाद कठुआ की गुड़िया का केस आया, मुंबई की शक्ति मिल्स में गैंगरेप हुआ, 2010 में दिल्ली में एक और रेप हुआ, मध्य प्रदेश में छोटी बच्ची के साथ रेप का मामला सामने आया। इसी तरह कई लाखों मामले सामने आते गए लेकिन किसी को फांसी नहीं दी गई, हालांकि कुछ मामलों में उम्रकैद जैसी सजा भी दी गई।

 इन आंकड़ों पर पर भी डालिए नजर

इन आंकड़ों पर पर भी डालिए नजर

देश में हर साल 40 हज़ार, हर रोज़ 109 और हर घंटे 5 लड़कियों को दरिंदे अपनी हवस का शिकार बनाते हैं। पिछले 10 साल में करीब 2.79 लाख रेप के मामले दर्ज किए गए। औसतन 40 हज़ार में से 10 हज़ार रेप के मामले नाबालिग बच्चियों के थे। हर साल 2000 ऐसे मामले होते हैं जिनमें पीड़िता का गैंगरेप किया गया रेप के मामलों में सिर्फ 25 फीसदी बलात्कारियों को ही सज़ा मिल पाती है। रेप के 71 फीसदी मामले तो ऐसे हैं जिन्हें रिपोर्ट ही नहीं किया जाता है। देशभर में इस वक्त आईपीसी की अलग-अलग धाराओं के तहत लगभग तीन करोड़ मामले ऐसे हैं जो अलग-अलग अदालतों में फैसले का इंतजार कर रहे हैं। इनमें से अकेले तीस लाख से ज्यादा केस तो देश के 21 हाईकोर्ट में लंबित पड़े हैं। इसमें सबसे अहम बात ये कि इनमें से डेढ़ लाख से भी ज्यादा केस सिर्फ और सिर्फ रेप के हैं।

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English summary
Preparations are being made to hang the four convicts of the Nirbhaya incident. After 15 years in India, ie after 15 years, a rapist will be hanged. Know the rapist's misdeeds and everything
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