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बड़ी धार्मिक संस्थाओं की संपत्ति और टर्नओवर जानिए, जिनकी CAG ऑडिट की हो रही है मांग

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नई दिल्ली- भाजपा सांसद और वरिष्ठ वकील सुब्रमण्यम स्वामी ने देश की सभी धार्मिक संस्थाओं की आय का सीएजी से ऑडिट कराने का मुद्दा उठाकर एक नई बहस की शुरुआत कर दी है। उन्होंने कहा है कि कोरोना महामारी के बाद जब फिर से संसद सत्र का आयोजन होगा तो वह इस तरह की ऑडिट को अनिवार्य करने के लिए एक प्राइवेट मेंबर बिल लेकर आएंगे। स्वामी ने ट्वीट के जरिए यह बात कही है, जिसका सोशल मीडिया पर काफी समर्थन मिल रहा है। उन्होंने साफ किया है कि यह सीएजी ऑडिट सभी धर्मों से जुड़ी धार्मिक संस्थाओं का किया जाना चाहिए। ऐसे यह जानना जरूरी है कि स्वामी ने यह मांग क्यों की है, और देश में कुछ बड़ी धार्मिक संस्थाओं की वार्षिक आय और संपत्ति कितनी है।

पवित्र बालाजी तिरुपति मंदिर की आमदनी

पवित्र बालाजी तिरुपति मंदिर की आमदनी

वैसे तो सुब्रमण्यम स्वामी ने सभी धर्मों से जुड़ी संस्थानों की बात की है, लेकिन जो आंकड़े उपलब्ध हैं वो ज्यादातर देश के मंदिरों से ही जुड़े हुए हैं। मसलन, आंध्र प्रदेश स्थित भगवान तिरुपति बालाजी के पवित्र तिरुमाला तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर की बात करें तो जानकारी के मुताबिक इस वित्त वर्ष में तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम ट्रस्ट ने 2,500 करोड़ रुपये सिर्फ खर्च का अनुमान तय किया था। सामान्य तौर पर ट्रस्ट को हर महीने लगभग 200 से 220 करोड़ रुपये की आमदनी होती है। इनमें से बड़ी रकम दान के रूप में आती है तो उसका एक हिस्सा प्रसाद के रूप में लड्डी बेचकर भी ट्रस्ट के खाते में जमा होती है। 2016 के आंकड़े के मुताबिक तो ट्रस्ट ने 75 करोड़ रुपये सिर्फ लड्डू बेचकर जुटाए थे। अगर 2018-19 की बात करें तो मंदिर को 2,894 करोड़ रुपये का सालाना राजस्व मिला था। इसके अलावा फिक्सड डिपोजिट जैसे अतिरिक्त साधनों से भी आमदनी के इंतजाम हैं।

देश का सबसे अमीर मंदिर

देश का सबसे अमीर मंदिर

अगर देश के सबसे अमीर मंदिर की बात करें तो यह ताज केरल के तिरुअनंतपुरम स्थित पद्मभस्वामी मंदिर के पास है, जिसके पास 2016 में 20 बिलियन डॉलर यानी 13,60,99,90,00,000 रुपये से भी ज्यादा की संपत्ति थी। यही नहीं, इस मंदिर की सालाना आय का भी अनुमान 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। कुछ वर्ष पहले यह मंदिर अपने गुप्त खजानों की वजह से दुनिया भर में चर्चा में रह चुका है। इसी तरह केरल में पेरियार टाइगर रिजर्व के अंदर स्थित सबरीमाला मंदिर भी अपनी मोटी आमदमी के लिए मशहूर है। बीते साल दो महीनों की सालाना तीर्थ यात्रा के दौरान सिर्फ 28 दिनों में ही इस मंदिर ने करीब 105 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया था।

शिरडी साईं मंदिर भी आमदनी में आगे

शिरडी साईं मंदिर भी आमदनी में आगे

भारत में बहुत ज्यादा आमदनी वाले मंदिरों में शिरडी साईं मंदिर भी है, जिसकी चढ़ावे में रोजाना की आमदनी 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा की होती है। मंदिर को चढ़ावे में कैश के अलावा सोने और चांदी भी मिलते हैं। इस तरह की मंदिर की चढ़ावे से सालाना आय करीब 400 करोड़ रुपये की आती है। इसी तरह से ही एक और मोटी कमाई वाला मंदिर जम्मू का पवित्र माता वैष्णो देवी मंदिर भी है। इसमें सबसे ज्यादा तीर्थयात्री पहुंचते हैं और इसकी आमदनी भी सालाना 500 करोड़ रुपये से कहीं ज्यादा है। हालांकि, ये सारे धार्मिक संस्थान ट्र्स्ट के निगरानी में संचालित होते हैं और उनका पूरा हिसाब-किताब रखा जाता है।

जमीन का भंडार है भगवान जगन्नाथ मंदिर के पास

जमीन का भंडार है भगवान जगन्नाथ मंदिर के पास

भारत का एक और मंदिर जो अपनी संपत्ति की वजह से अभी हाल में बहुत ज्यादा चर्चा में आ चुका है, वह है ओडिशा के पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर। एक आंकड़े के मुताबिक 2016 तक मंदिर के पास करीब 130 किलो सोने और 220 किलो चांदी का भंडार था। कुछ महीने पहले यह मंदिर इसलिए सुर्खियों में आया था, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से यह बात सामने आई थी कि मंदिर के पास ओडिशा और बाहर 60,418 एकड़ का लैंडबैंक है। अगर इतनी जमीन से हिसाब लगाया जाय तो यह पुरी के आकार से 15 गुना ज्यादा होता है। मंदिर के पास कई खदानें भी हैं और उससे हो रही आमदनी का कोई पुख्ता रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो पाया है।

'स्वर्ण मंदिर' नाम ही काफी है

'स्वर्ण मंदिर' नाम ही काफी है

वहीं वाराणसी स्थित भगवान काशी विश्वनाथ मंदिर की बात करें तो इसके तीन गुंबदों में से दो पर सोना मढ़ा हुआ है। इस मंदिर को भी दान के रूप में सालाना 5 करोड़ रुपये से ज्यादा की आमदनी होती है। वहीं सोमनाथ मंदिर गुजरात के सबसे अमीर मंदिरों में गिना जाता है, जिसकी सालाना आय 35 करोड़ रुपये से ज्यादा की अनुमानित है। जबकि, केरल के मदुरै स्थित मीनाक्षी मंदिर में भी तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ उमड़ती है और इसकी सालाना अनुमानित आय 6 करोड़ से ज्यादा बताई जाती है। वहीं अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर की संपत्ति का अनुमान लगाने के लिए उसका नाम ही काफी है।

कुछ धार्मिक संस्थानों की आय का सही ब्योरा नहीं मिला

कुछ धार्मिक संस्थानों की आय का सही ब्योरा नहीं मिला

जहां तक अजमेर शरीफ या दिल्ली के निजामुद्दीन औलिया जैसे मशहूर दरगाहों या इबातगाहों की बात है तो इनकी सालाना आय का सही ब्योरा उपलब्ध नहीं हो पाया है। उसी तरह चर्चों के आय-व्यय का ब्योरा भी उपलब्ध नहीं हो सका है। वैसे चर्चों को मिलने वाले फंड में भी पारदर्शिता की मांग उठती रही है।

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English summary
Know the assets and turnover of big religious institutions, which are getting demand for CAG audit
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