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रूह कंपा देगी 'निर्भया केस' की पड़ताल, दांतों से लेकर बालों तक की हुई थी जांच

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नई दिल्ली। आज से सात साल पहले हुए निर्भया कांड (Nirbhaya Case) ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। आज भी हर कोई दोषियों की फांसी का इंतजार कर रहा है। ऐसे में इस मामले की अगर जांच की बात करें, तो वो भी काफी कठिन साबित हुई थी। ऐसी जांच शायद ही किसी अन्य मामले में हुई हो।

    Delhi Nirbhaya Case 2012 की Investigation उड़ा देगी आपके होश, ऐसे हुई थी पूरी जांच | वनइंडिया हिंदी
    41 पुलिसकर्मियों की टीम

    41 पुलिसकर्मियों की टीम

    डीसीपी से लेकर कॉन्सटेबल तक 41 पुलिसकर्मियों की टीम इसके लिए तैयार की गई थी। साथ ही जांच के लिए पांच रूट भी बनाए गए थे। इनमें तकनीकी विश्लेषण, फिजिकल साक्ष्य, डीएनए साक्ष्य, मटीरियल साक्ष्य और फोरेंसिक डेंटिस्ट्री तक को शामिल किया गया। इन्हीं साक्ष्यों के दम पर निर्भया को दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई।

    विदेशी एजेंसियों की मदद

    विदेशी एजेंसियों की मदद

    कातिलों को बचने की गुंजाइश इसलिए भी नहीं मिली क्योंकि दिल्ली पुलिस ने सबूतों को एकत्रित करने के लिए विदेशी एजेंसियों की भी मदद ली थी। टीइम्स की रिपोर्ट के अनुसार जांच टीम से जुड़े अफसर का कहना है कि टीम में शामिल 100 से अधिक पुलिसकर्मी आरोपियों को पकड़ने और सबूत जुटाने के लिए पूरी मशक्कत करते रहे।

    बस की तलाश करना

    बस की तलाश करना

    जिस बस में वारदात हुई, उसे ढूंढ पाना भी काफी मुश्किल काम था। बस की तलाश करने के लिए 250 बसों की सूची बनाई गई, इसके बाद इनके रूट को देखते हुए इनकी पहचान की गई। कई बार सीसीटीवी फुटेज देखने पर बस पर यादव लिखा हुआ दिख रहा था।

    एक ही हफ्ते में सभी आरोपी गिरफ्तार

    एक ही हफ्ते में सभी आरोपी गिरफ्तार

    बाद में माना गया कि बस में मौजूद लोग भी इसी इलाके के होंगे। पुलिस ने कड़ी मेहनत करते हुए महज एक ही हफ्ते में सभी आरोपियों को पकड़ लिया। साथ ही 19 दिनों के भीतर 1 हजार पन्नों की चार्जशीट भी पेश की। अब बाकी के सबूत एकत्रित करने के लिए सबसे पहले निर्भया और उसके दोस्त के कपड़े, एटीएम कार्ड, जूते और मोबाइल जैसी चीजें वारदात वाली जगह से ली गईं।

    बस की जांच की गई

    बस की जांच की गई

    इसके बाद फिजिकली साक्ष्य लेने के लिए बस की जांच की गई, जिसे अपराधियों ने धो दिया था। इस बस से फिंगर प्रिंट, पीड़िता का खून, सीट का कपड़ा और बस में मिले बालों तक को उठाया गया। तीसरे चरण यानी डीएनए में अपराधी का डीएनए कराया गया। जिसमें लार, नाखूनों के अंदर से पीड़िता की चमड़ी ली गई।

    फॉरेंसिक डेंटिस्ट्री की मदद

    फॉरेंसिक डेंटिस्ट्री की मदद

    इसके बाद फॉरेंसिक डेंटिस्ट्री की मदद ली गई। जिसमें ऑडोंटोलॉजी के तहत दातों के आकार की जांच की जाती है। इनके आधार पर अपराधी से इन निशानों का मिलान किया जाता है। आखिर में तकनीकी साक्ष्य जुटाए गए। इसमें अपराधी की मोबाइल लोकेशन, उसकी सीडीआर मूवमेंट की जानकारी हासिल की गई।

    दातों की भी जांच की गई

    दातों की भी जांच की गई

    दातों की भी जांच की गई, जिनके निशान निर्भया के शरीर पर मिले थे। निर्भया के शरीर पर दातों से काटने के इतने निशान थे, मानो उसे जानवरों की तरह नोंचा गया हो। दातों के निशान से अपराधी की पहचान करने के लिए करीब 500 वेबसाइट पर जांच की गई। इस साइंस के वैज्ञानिकों की मदद ली गई, दातों के निशान की तस्वीर लेने के बाद अपराधियों के दातों के आकार फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए।

    पीओपी से दांतों का जबड़ा बनाया गया

    पीओपी से दांतों का जबड़ा बनाया गया

    यहां तक की पीओपी से दांतों का जबड़ा तक बनाया गया, इनकी क्लोजअप फोटो ली गई। बाद में चार आरोपियों में से विनय और अक्षय के दांतों के निशान निर्भया के शरीर पर मिले निशानों से मेल हुए। जो एक जैसे निकले। इसे भी सबूतों की अहम कड़ी माना गया। इन्हीं सब सबूतों के आधार पर दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई और उनकी सारी अपील धरी की धरी रह गई।

    कब हो सकती है फांसी?

    कब हो सकती है फांसी?

    अब माना जा रहा है कि राष्ट्रपति जैसे ही दया याचिका खारिज करते हैं, वैसे ही चारों दोषियों को फांसी दे दी जाएगी। फांसी की तैयारियां भी गुपचुप तरीके से शुरू हो गई हैं। माना जा रहा है कि या तो अपराधियों को 16 दिसंबर (वारदात वाले दिन) को फांसी दी जाएगी या फिर इन्हें 29 दिसंबर (जिस दिन निर्भया की मौत हुई) को फांसी दी जाएगी।

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    English summary
    know how whole investigation happened in nirbhaya case, by which four accused were arrested.
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