कोरोना वायरस: क्या है होम क्वारंटाइन? जिसे लेकर सरकार ने जारी किए दिशा-निर्देश
नई दिल्ली। कोरोना वायरस (Covid-19) से बचाव के लिए उन लोगों से खुद को 'होम क्वारंटाइन' करने को कहा जाता है, जिनमें वायरस होने का खतरा होता है। इसे होम क्वारंटाइन कहते हैं, यानी खुद को घर में सबसे अलग करके रखना। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे लेकर कुछ दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। मंत्रालय का कहना है कि घर पर अलग रहने का उद्देश्य संबंधित शख्स और अन्य लोगों की रक्षा करना है।

खुद को एक कमरे में अलग कर लेना
अगर आपको और या आपके परिवार को इस खतरनाक वायरस से संक्रमित होने का संदेह है, तो इन दिशा-निर्देशों का पालन कर आप खुद को आइसोलेट यानी क्वारंटाइन (अलग) कर सकते हैं। खुद को अलग करने से तात्पर्य है कि अगर आपको कोरोना से संक्रमित होने का संदेह है, या फिर सर्दी-जुकाम है तो खुद को एक कमरे में अलग कर लें। इससे आपके परिवार में किसी को वायरस नहीं फैलेगा।

किन्हें खुद को अलग कर लेना चाहिए?
- हर उस शख्स को जो मरीज के संपर्क में आया है।
- जिसमें कोरोना के लक्षण दिख रहे हैं और लग रहा है कि वह इससे संक्रमित हो सकता है।
- विदेश से यात्रा करके लौटे हैं, खासतौर पर उन देशों से जो कोरोना से प्रभावित हैं।
- अपने देश में भी उस इलाके से लौटना जहां से वायरस के संक्रमित मामले सामने आए हैं।

कॉन्टैक्ट पर्सन का मतलब क्या है?
कॉन्टैक्ट पर्सन को एक स्वास्थ्य व्यक्ति ही माना जाएगा। लेकिन ऐसे शख्स को भी खुद को तब क्वारंटाइन करने की सलाह दी जाती है- जब वह मरीज के संपर्क में आया हो और कोरोना से प्रभावित इलाके में गया हो। क्योंकि ऐसे इंसान में भी कोरोना वायरस होने का संदेह बना रहता है।
कोरोना वायरस के संबंध में कॉन्टैक्ट पर्सन-
- वो शख्स जो उसी घर में रहता हो, जहां किसी को कोरोना वायरस हुआ है।
- कोरोना वायरस के मरीज के संपर्क में आना, वो भी बिना किसी पीपीई (व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण) के।
- कोरोना वायरस के मरीज से हवा में एक मीटर से भी कम का अंतर रहा हो, या फिर आमने-सामने आए हों।
अभी तक ये बात देखी गई है कि वायरस के लक्षण सामने आने में 14 दिनों का समय लग जाता है, ऐसे में एक शख्स की लापरवाही सैकड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है।

होम क्वारंटाइन व्यक्ति के परिजनों के लिए दिशा-निर्देश-
- घर का कोई एक सदस्य ही ऐसे व्यक्ति की देखभाल करे।
- घर में किसी बाहरी व्यक्ति को ना आने दें।
- टॉयलेट की रोज अच्छे से ब्लीच से सफाई करें।
- होम क्वारंटाइन व्यक्ति के कमरे के फर्श और अन्य सामान को एक फीसदी सोडियम हाइपोक्लोराइट सोल्यूशन से साफ करें।
- घर की साफ-सफाई के लिए दस्ताने पहनें और उन्हें उतारने के बाद हाथों को अच्छे से साफ करें।
- अगर होम क्वारंटाइन व्यक्ति में किसी तरह के लक्षण दिखें तो सभी नजदीकी संपर्क बंद कर दें। ऐसा तब तक करें जब तक रिपोर्ट नेगेटिव ना आ जाए।
- होम क्वारंटाइन शख्स की त्वचा को ना छूएं।

खुद को होम क्वारंटाइन करने वाला शख्स इन बातों का ध्यान रखे-
- खुद को साफ-सुथरे अलग कमरे में रखें, जिसमें बाथरूम भी हो। अगर कोई अन्य शख्स भी उस कमरे में रहता है तो एक मीटर की दूरी बनाए रखें।
- घर में बुजुर्ग, गर्भवती महिला, बच्चों और बीमार व्यक्ति से दूर रहें।
- घर में इधर-उधर ना घूमें।
- किसी भी सामाजिक/धार्मिक कार्यक्रम में शिरकत ना करें।

इन स्वास्थ्य उपायों का पालन भी जरूर करें-
- साबुन और पानी या फिर एल्कोहल आधारित सैनटाइजर से अपने हाथ साफ करें।
- घर के सामान को किसी से शेयर ना करें, जैसे- बर्तन, पानी पीने का गिलास, कप, तौलिया, पलंग आदि।
- हर समय सर्जिकल मास्क लगाकर रखें, मास्क को हर 6-8 घंटे में बदलें।
- किसी अन्य शख्स द्वारा इस्तेमाल किए गए मास्क को ना पहनें।
- अगर किसी एक मास्क को फेंकना है तो उसे जला दें या फिर मिट्टी में दबा दें।
- घर में मरीज, उसकी देखभाल करने वाले और उसके संपर्क में आने वाले लोगों को मास्क पहनना है। मास्क पूरी तरह साफ होना चाहिए। इसे सामान्य ब्लीच सल्यूशन (5 फीसदी) और सोडियम हाइपोक्लोराइट सल्यूशन (1 फीसदी) से साफ करें।
- इस्तेमाल किया हुआ मास्क भी संक्रमित माना जाता है।
- अगर लक्षण दिखें जैसे- खांसी, बुखार और सांस लेने में तकलीफ तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। इसके अलावा 011-23978046 नंबर पर फोन करें।
होम क्वारंटाइन कितने दिनों का होता है?
होम क्वारंटाइन की समयसीमा 14 दिनों की होती है।












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