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पाकिस्तान की बोलती बंद करने वाले सैयद अकबरुद्दीन को जानिए, पदमा से की है शादी

न्‍यूयॉर्क। शुक्रवार को संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद यानी यूएनएससी में जम्‍मू कश्‍मीर पर बंद कमरे में मीटिंग हुई और पाकिस्‍तान को मुंह की खानी पड़ी है। मीटिंग के बाद यूएन में भारत के राजदूत सैयद अकबरुद्दीन ने जिस अंदाज में मीडिया के सामने देश का रुख स्‍पष्‍ट किया, उसके बाद उन्‍हें जमकर तालियां मिल रही हैं। अकबरुद्दीन इस प्रेस कॉन्‍फ्रेंस के बाद देश में ट्विटर से लेकर फेसबुक तक चर्चा का विषय बन गए हैं। शुक्रवार को भी अकबरुद्दीन ने पाकिस्‍तान को दो टूक कहा, 'स्‍टॉप टेरर एंड स्‍टार्ट टॉक्स।' आइए आपको बताते हैं भारत के इस ऐसे राजनयिक के बारे में जो पिछले कुछ वर्षों से यूएन में पाकिस्‍तान को करार जवाब देते आ रहे हैं।

साल 2016 में यूएन में बने राजदूत

साल 2016 में यूएन में बने राजदूत

सैयद अकबरुद्दीन जनवरी 2016 में यूएन में भारत के स्‍थायी राजदूत नियुक्‍त हुए थे। वह इंडियन फॉरेन सर्विस (आईएफएस) के साल 1985 के बैच के ऑफिसर हैं। यूएन में पोस्टिंग से पहले वह विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता के तौर पर अपनी जिम्‍मेदारी निभा रहे थे। प्रवक्‍ता से पहले अकबरुद्दीन साल 2004 से 2005 तक विदेश सचिव के ऑफिस में बतौर डायरेक्‍टर मंत्रालय में तैनात थे। उन्‍होंने समय-समय पर यूएन में पाकिस्‍तान के प्रपोगेंडा पर जवा‍ब दिया है।

पीएम मोदी के प्रवक्‍ता थे अकबरुद्दीन

पीएम मोदी के प्रवक्‍ता थे अकबरुद्दीन

उन्‍होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों पर प्रवक्‍ता की जिम्‍मेदारी भी निभाई है। जनवरी 2012 से अप्रैल 2015 तक उन्‍होंने विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता की जिम्‍मेदारी निभाई। साल 2015 में उन्‍होंने इंडिया-अफ्रीका समिट को आयोजित करने में अहम भूमिका अदा की थी। वह इस आयोजन के साथ बतौर को-ऑर्डिनेटर जुड़े थे। इसके अलावा जैश-ए-मोहम्‍मद के सरगना मसूद अजहर को यूएन में आतंकी घोषित करवाने में उन्‍होंने बड़ा रोल प्‍ले किया।

पहली बार 1995 में पहुंचे UN

पहली बार 1995 में पहुंचे UN

साल 2006 से 2011 तक अकबरुद्दीन ने इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (आईएईए) में चार वर्षों का कार्यकल पूरा किया। उन्‍हें यहां पर डेप्‍यूटेशन पर भेजा गया था और इस दौरान वह विएना में थे। यूएन में अकबरुद्दीन पहले भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उन्‍होंने साल 1995 से 1998 तक भारतीय मिशन में प्रथम सचिव का जिम्‍मेदारी निभाई थी। अपने इस कार्यकाल के दौरान उन्‍होंने यूएनएससी में सुधारों और पीस कीपिंग मिशन पर ध्‍यान दिया था।

अरबी भाषा के जानकार

अरबी भाषा के जानकार

अरबी भाषा के जानकार अकबरुद्दीन, पाकिस्‍तान के इस्‍लामाबाद में बतौर काउंसलर भी तैनात रहे हैं। अकबरुद्दीन को इस वजह से ही पाकिस्‍तान से जुड़े मसलों का विशेषज्ञ माना जाता है। वह कतर में भी भारत के राजदूत रहे हैं। अकबरुद्दीन ने बेगमपेट के हैदराबाद पब्लिक स्‍कूल से पढाई की है। उनके पिता उस्‍मानिया यूनिवर्सिटी के जर्नलिज्‍म और कम्‍यूनिकेशन डिपार्टमेंट के हेड थे। अकबरुद्दीन की शादी पदमा से हुई है और दोनों दो बेटों के माता-पिता हैं।

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