कौन हैं हाईकोर्ट से जमानत पाने वाले डॉ. कफील खान ? योगी सरकार से रहा है 36 का आंकड़ा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के निशाने पर रहने वाले डॉक्टर कफील खान एक बार फिर से चर्चा में हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डॉ. कफील खान के खिलाफ प्रदेश सरकार की रासुका कार्रवाई को अवैध मानते हुए इसे रद्द करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने अपने फैसले में मथुरा जेल में बंद डॉक्टर कफील को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है। डॉ. कफील खान को इसी साल जनवरी में गिरफ्तार किया गया था।
डॉक्टर कफील की रिहाई को लेकर उनकी मां नुजहत परवीन ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका डाली थी जिस पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस गोविंद माथुर की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ में सुनवाई हुई। बेंच में दूसरे जज जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह थे।
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भड़काऊ भाषण देने का है आरोप
डॉ कफील पर दिसंबर 2019 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ भाषण देने का आरोप है। डॉक्टर कफील को इसी साल 29 जनवरी को यूपी एसटीएफ ने मुंबई हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया था। मुंबई से अलीगढ़ लाने के बाद उन्हें पड़ोसी जिले मथुरा की जेल में शिफ्ट कर दिया गया। इस बीच 10 फरवरी को डॉक्टर कफील खान को जमानत मिल गई लेकिन रिहाई होने से पहले ही उनपर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्यवाही करते हुए उनकी हिरासत बढ़ा दी गई।
तब से दो बार उनके ऊपर रासुका की कार्यवाही बढ़ाते हुए उनकी हिरासत बढ़ाई गई। इसी 12 अगस्त को उनके ऊपर रासुका की अवधि समाप्त होनी थी जिसे शासन ने फिर से बढ़ा दिया था। आज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रासुका के तहत कार्रवाई को अवैध बताते हुए इसे रद्द करने का आदेश दिया।

योगी सरकार से माफी की मांग
डॉ. कफील की रिहाई का राजनीतिक पार्टियों ने स्वागत किया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने उनकी रिहाई में लगे तमाम लोगों और अल्पसंख्यक कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को मुबारकबाद दी है।
समाजवादी पार्टी ने भी डॉ. कफील की रिहाई का स्वागत करते हुए योगी सरकार पर हमला बोला है। सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आईपी सिंह ने वन इंडिया हिंदी से बातचीत में कहा कि 'डॉ. कफील खान काफी समय से ही योगी सरकार के निशाने पर रहे हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मामले में भी डॉ. कफील को केवल मुसलमान होने के चलते जेल भेज दिया था। हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिली थी। बाद में जांच में उन्हें क्लीनचिट मिली थी।' आईपी सिंह के मुताबिक डॉ. कफील इसके बाद भी खुलकर सरकार के गलत कामों के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। उन्होंने कहा कि 'सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान जब करीब 36 लोग गोलियों से मारे गए। इस दौरान डॉ कफील मारे गए लोगों के परिवार से मिले थे। इसकी सजा सरकार ने उन पर रासुका जैसे गंभीर कानून लगाए। आज हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिली है इसका हम स्वागत करते हैं। साथ ही मांग करते हैं कि योगी सरकार ने डॉ. कफील पर जिस तरह अत्याचार किए हैं इसे लेकर उनसे व उनके परिवार से माफी मांगे।'

BRD अस्पताल में बच्चों की मौत के बाद आए चर्चा में
डॉ. कफील खान का नाम पहली बार 2017 में चर्चा में आया था जब गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के इंसेफेलाइटिस वार्ड में एक सप्ताह के अंदर 60 बच्चों की मौत हो गई थी। इन बच्चों की मौत का जिम्मेदार अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी बताया गया था। डॉक्टर कफील इस दौरान अस्पताल के इसी वार्ड में तैनात थे।
इसी बीच एक खबर ने सबका ध्यान खींचा कि जब अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी थी उस दौरान डॉ कफील ने निजी तौर पर ऑक्सीजन सिलिण्डर की व्यवस्था अस्पताल में की थी। इस रिपोर्ट में डॉ कफील हीरो की तरह नजर आये थे लेकिन इसी के बाद कुछ ऐसी जानकारी भी सामने आई जिसने अलग कहानी पेश की।

थोड़े ही दिनों में हीरो से बने विलेन
बाद में जो जानकारी निकली उसमें डॉ. कफील को ही वार्ड में ऑक्सीजन की कमी का जिम्मेदार माना गया। आरोप लगा था कि डॉक्टर कफील ही अस्पताल में ऑक्सीजन सिलिण्डर खरीदने के लिए जिम्मेदार थे। डॉक्टर कफील को प्राइवेट प्रैक्टिस का भी आरोप लगा। यही नहीं डॉक्टर कफील पर अस्पताल के ऑक्सीजन सिलिण्डर का घर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगा।
थोड़े ही दिनों में डॉ कफील हीरो से विलेन बन चुके थे। 22 अगस्त को उन्हें भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप में अस्पताल से निलंबित कर दिया गया। दो सप्ताह भी नहीं बीते थे कि 2 सितंबर 2017 को डॉ कफील को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया जहां उन्हें नौ महीने तक रहना पड़ा। 25 अप्रैल 2018 को जब खान को कोर्ट से जमानत मिली तो वे अपने आरोपों के खिलाफ जांच को लेकर हाईकोर्ट गए। मार्च 2019 में हाईकोर्ट ने 90 दिनों के भीतर जांच पूरी करने का आदेश दिया।

विभागीय जांच में मिली थी क्लीन चिट
दो बाद 26 सितंबर 2019 को डॉ. कफील खान को विभागीय जांच समिति ने क्लीनचिट दे दी। जांच रिपोर्ट में कहा गया कि डॉक्टर कफील इंसेफ्लाइटिस वार्ड के नोडल अफसर नहीं थे इसलिए वह बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार नहीं है। साथ ही कमेटी ने ये भी कहा कि खान न तो ऑक्सीजन सप्लाई की टेंडर प्रक्रिया में शामिल थे और न ही सिलिण्डर के भुगतान या रखरखाव के लिए जिम्मेदार थे।
जांच रिपोर्ट में बरी होने के बाद डॉ कफील ने कहा था कि उन्हें उम्मीद है जिन लोगों ने अपने बच्चों को खोया है उन्हें भी अब इंसाफ मिलेगा। खान ने ये भी कहा कि उस समय के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह को बचाने के लिए उन्हें बलि का बकरा बनाया गया। इसके बाद डॉ. कफील खान सरकार के आलोचक बनकर सामने आए।
सीएए को लेकर किया था विरोध
केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नागरिकता कानून सीएए के खिलाफ वो मुखर रूप में सामने आए। जगह-जगह प्रदर्शनकारियों के बीच जाकर उन्होंने इसके विरोध में भाषण दिया। ऐसे ही एक प्रदर्शन के दौरान अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में वे शामिल हुए थे। इस दौरान उन पर भड़काई भाषण देने का आरोप लगा। यूपी पुलिस ने उन्हें मुंबई में उस वक्त गिरफ्तार किया जब वे वहां एक सीएए विरोधी प्रोटेस्ट को संबोधित करने पहुंचे थे।












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