'मैं इस पर बहस नहीं करना चाहता': सनातन धर्म पर स्टालिन की टिप्पणी को लेकर पहली बार बोले खड़गे
सनातन धर्म विवाद: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सनातन धर्म को लेकर की गई विवादास्पद टिप्पणी पर पहली बार चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने छत्तीसगढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान कहा है कि धर्म और राजनीति दो अलग चीजें हैं और इसे मिलाने की जरूरत नहीं है।
कांग्रेस चीफ का यह बयान उस समय आया है, जब डीएमके नेता और तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन की सनातन धर्म को लेकर विवादित टिप्पणी की वजह से देश में सियासी बवाल मचा हुआ है।

स्टालिन की टिप्पणी पर मचा है सियासी घमासान
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि ने सनातन धर्म को कथित तौर पर विभाजनकारी और असमानता वाला बताते हुए इसे डेंगू, मलेरिया और कोरोना वायरस की तरह मिटा देने की वकालत की थी। खास बात ये है कि खुद खड़गे के बेटे और कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने भी स्टालिन के बयान का समर्थन देने की कोशिश कर चुके हैं।
मैं यहां किसी के धर्म के बारे में बोलने नहीं आया हूं- खड़गे
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक जब खड़गे से स्टालिन की टिप्पणी के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, 'मैं यहां किसी के धर्म के बारे में बोलने नहीं आया हूं। मैं यहां गरीबों के लिए एक कार्यक्रम (भरोसे का सम्मेलन) में हिस्सा लेने आया हूं। धर्म और राजनीति भिन्न चीजें हैं और इन्हें मिलाने की जरूरत नहीं है। मैं इस पर बहस नहीं करना चाहता।'
बीजेपी कांग्रेस के बड़े नेताओं से मांग रही है स्पष्टीकरण
खड़गे छत्तीसगढ़ सरकार के कार्यक्रम 'भरोसे का सम्मेलन' में शामिल होने के बाद राजनांदगांव जिले के ठेकवा में संवाददातों से बातचीत करते हुए ये बातें कही हैं। इससे पहले बीजेपी के वरिष्ठ नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री राजेश मूणत ने कहा था कि खड़गे को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या कांग्रेस पार्टी सनातन धर्म पर उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणी का समर्थन करती है।
दअसल, तमिलनाडु की सत्ताधारी डीएमके और कांग्रेस पार्टी विपक्षी दलों की इंडिया गठबंधन में सहयोगी पार्टियां हैं। डीएमके का कांग्रेस के साथ पुराना गठबंधन भी रहा है। लेकिन, इस मसले पर कांग्रेस सियासी तौर पर बुरी तरह से फंसी हुई है। उसके प्रियांक खड़गे और कार्ति चितंबरम जैसे नेता जहां इस मसले पर स्टालिन के साथ खड़े दिख रहे हैं तो कुछ नेताओं ने उनके बयान पर आपत्ति भी जताई है। लेकिन, मोटी बात ये है कि कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर अभी तक स्टालिन के बयान से खुद को पूरी तरह से अलग नहीं किया है और न ही पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस मामले पर कुछ भी बोल रहा है।
इधर स्टालिन के बयान पर विवाद चल ही रहा है, उधर डीएमके के एक और नेता ए राजा ने सनातन धर्म को लेकर और भी आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी है और इसे एचआईवी बता दिया है। इस वजह से इंडिया गठबंधन के कुछ सहयोगी दल काफी दुविधा में नजर आ रहे हैं; और शिवसेना (उद्धव) की ओर से इसको लेकर चिंता भी जताई गई है।












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