खाप की चाल, भेजेंगी सरकारी दफ्तरों में अावारा जानवर
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। खाप पंचायतें और किसान यूनियन मोदी सरकार से दो-दा हाथ करने के लिए तैयार हो रही हैं। इनकी मांग है कि स्वामीनाथ कमीशन की रिपोर्ट को लागू किया जाए। इसे लागू नहीं किया गया तो ये आँदोलन के रास्ते पर चलेंगी। इन्होंने साफ कर दिया कि मांग नहीं मांगी गई तो जिला मुख्यालयों पर लघु सचिवालयों में आवारा पशु घुसाए जाएंगे। बता दें कि यूपीए सरकार ने स्वामीनाथन आयोग का गठन किया था। इसके पीछे इरादा यह था ताकि किसानों को उनकी फसलों के लाभकारी समर्थन मूल्य दिए जा सकें।

2007 में दी रिपोर्ट
यह रिपोर्ट साल 2007 में केंद्र सरकार को सौंप दी गई थी। इस रिपोर्ट में यह सिफारिश की गई है कि किसान की फसल की लागत में उसका 50 पर्सेंट लाभ जोड़कर समर्थन मूल्य तय किया जाए। साथ ही इससे किसानों के लिए घाटे का सौदा बनी खेती से मुनाफा मिल सके।
बदले सुर भाजपा के
जानकारों का कहना है कि भाजपा सरकार केन्द्र में सत्ता में आने से पहले स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने की मांग करती रही है। भिवानी के गांव धनाना में खापों की महापंचायत में खाप प्रतिनिधियों एवं किसान संगठनों ने ऐलान किया कि सरकार स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को अविलंब लागू करे, नहीं तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। जानकारी के अनुसार, इस महापंचायत में जाटूखाप ने सरकार को चेतावनी दी कि सरकार स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को जल्द से जल्द लागू करने की दिशा में पहल करे।
आगे की रणनीति
साथ ही 4 मार्च तक का वक्त मुकर्रर किया गया कि सरकार अगर तब तक आयोग की रिपोर्ट को लागू नहीं करती है, तो 5 मार्च को पिपली में किसान महारैली का आयोजन किया जाएगा।
साथ ही आवारा पशुओं से किसानों की फसलें बर्बाद किए जाने की बात पर फैसला किया गया कि 10 दिन के अंदर ऐसे पशुओं को सरकार एवं प्रशासन गोशालाओं अथवा बाड़ों में छोड़े, नहीं तो 15 मार्च को प्रदेश के तमाम जिला मुख्यालयों पर लघु सचिवालयों में किसान आवारा पशु घुसाए जाएंगे।












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