भाजपा की उम्मीदों पर FAIL या PASS होंगे 'केशव'?
लखनऊ। लंबे समय से यूपी भाजपा अध्यक्ष के पद पर लगायी जा रहीं तमाम कयासों का आखिरकार अंत हो गया। संभावना के इतर, कयासों के विपरीत अध्यक्ष पद की घोषणा हो गई है और केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष पद की सीट मिल गई।
यूपी भाजपा अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य के दामन पर हैं खून के दाग!

क्या है वजह केशव प्रसाद मौर्या को उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष पद की कमान देने के पीछे का राज..आईये जानते हैं
पिछड़ों का वोटबैंक चाहिए
पिछड़े वर्ग के नेता को अध्यक्ष बनाकर पार्टी को लगता है कि वह अपना वोटबैंक मजबूत करेगी। उत्तर प्रदेश में लगभग 35 फीसदी आबादी ओबीसी वर्ग की है। इसके साथ ही इस बात को साफ तौर पर समझा जा सकता है कि केशव प्रसाद मौर्य की अध्यक्ष पद पर नियुक्ति भाजपा का बहुत सोचा-समझा दांव है।
भाजपा का बहुत सोचा-समझा दांव
पार्टी 2017 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पिछड़े और दलित वोट बैंक को साथ लाने के लिए अतिरिक्त प्रयास कर रही है। जैसा कि हम खुद हाल ही के दिनों में पीएम नरेंद्र मोदी को पिछड़े वर्ग के करीब आने की खातिर तरह तरह के कसीदे पढ़ते हुए देख भी चुके हैं। बहरहाल भाजपा के पास ''केशव'' के अलावा यूपी में शायद ही कोई चेहरा था, जिसे वो अध्यक्ष बनातीं।
नफा होगा या नुकसान
केशव एक कट्टर हिंदूवादी नेता हैं, साथ ही वे पिछड़ी जाति को सेंध मारने में हर दफे कामयाब रहते हैं। फलस्वरूप जीत के रिकॉर्ड उनके नाम के साथ दर्ज हैं। पर, मौका है यूपी विधानसभा चुनाव का तो देखना ये है कि इन दोनों के जरिए भाजपा को क्या फायदा मिलता है या फिर केशव की छवि के कारण पार्टी को खामियाजा भरना पड़ेगा।
केशव मौर्या के नाम पर कई संगीन इल्जाम
दरअसल गुड गवर्नेंस का दंभ भरने वाली बीजेपी ने केशव मौर्या को प्रदेश की कमान देकर अपने मुद्दे से विपरीत भी काम किया है। केशव प्रसाद मौर्या के खिलाफ इलाहाबाद व कौशांबी जिले में हत्या, बलवा, दंगा भड़काने सहित लगभग एक दर्ज़न मामले दर्ज़ है। इनका असर किस पर, कितना होगा ये आने वाला वक्त ही तय करेगा।












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