अफगानिस्तान की जेल में बंद बेटी और पोती की वापसी के लिए मां ने लगाई गुहार, बताया कैसे पहुंची जेल
हैदराबाद, 19 अगस्त। अफगानिस्तान पर तालिबान कब्जा कर चुका है। जिसके बाद वहां रहने वाले लोग अपनी जान बचाकर वहां से भागना चाहते हैं। वहीं वहां कई विदेशी भी है जिसमें भारत के लोग भी शामिल हैं वो जान बचाकर अपने घर वापस लौटना चाहते हैं। केरल की एक महिला भी अपनी बेटी की घर वापसी के लिए तड़प रही है जिसकी बेटी 2017 में लापता हा गई थी।

बेटी से मिलने के लिए तरस रही महिला के अनुसार उसकी लापता बेटी ने आतंकी समूह आईएसआईएस में शामिल होने के बाद अफगान बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। अब उसकी बेटी को अफगानिस्तान की जेल में बंद कर दिया गया है। जिसकी चिंता मां को सता रही है।
बेटी निमिशा फातिमा की रिहाई की अपील की
महिला ने भारत सरकार से उसे वापस लाने और भारतीय कानून के तहत उसके अपराधों का लेखा-जोखा करने की गुजारिश की है। मां बिंदू संपन ने तालिबान द्वारा अफगान जेल में बंद कैदियों को रिहा करने की खबर सुनकर भारत सरकार से अपनी बेटी निमिशा फातिमा की रिहाई और उसकी वतन वापसी की अपील की है।
2019 में अफगान बल के सामने निमिषा फातिमा ने आत्मसर्पण किया
मां बिंदू के अनुसार 2019 में अफगान बल के सामने उसकी बेटी निमिषा फातिमा ने आत्मसर्पण किया और उसके बाद उसे जेल में बंद कर दिया है। अब जब तालिबान कैदियों को रिहा कर रहा है तो निमिषा की रिहाई के बारे में उसकी मां जानना चाहती है। बिंदू की बेटी का नाम पहले निमिषा था परिवर्तित होने के बाद फातिमा हो गया उसका पति ईशा है जिसका नाम पहले बेक्सिन था।
बिंदू संपत को पोती के लिए सता रहा है ये डर
बिंदू संपत ने कहा
मुझे अपनी पोती की चिंता है जो कल पांच साल की हो जाएगी, तालिबान के हाथों में पड़ सकती है। एनडीटीवी को दिए बयान में मा बिंदू संपत ने कहा "जब मैंने खबर सुनी कि उन्हें रिहा कर दिया गया है, तो मैं बहुत खुश थी। लेकिन शाम तक मैंने दुखद खबर सुनी कि उन्हें रिहा नहीं किया गया था, भारत सरकार द्वारा आतंकवादियों को सौंप दिया गया था।
फातिमा और उनकी बेटी जेल में है
अफगानिस्तान ने उसे और अन्य महिलाओं को केरल से निर्वासित करने की पेशकश की थी। बिंदू संपत ने कहा, मेरी पोती पांच साल की हो जाएगी मैंने उसे अभी तक देखा नही है। जब मेरी बेटी गई तब वह सात महीने की गर्भवती थी। मैंने अधिकारियों से उस व्यक्ति के बारे में शिकायत की जो उसे और 21 अन्य लोगों को ले गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उसके पति को आईएसआईएस के ठिकाने पर अमेरिकी हवाई हमले में मार गिराया गया था। मेरी बेटी और चार साल की पोती पिछले चार साल से वहां की जेल में है, वो तब से जेल में है जब 400 अन्य लोगों समेत जिसमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल थे सभी ने अफगान बलों के सामने आत्मसमर्पण किया है।












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