विवाहित महिला-पुरुष को कोई कानून संबंध बनाने से नहीं रोक सकता, HC ने दिया वीर्य को प्रिजर्व करने का आदेश
Kerala High Court: एक 61 साल के शख्स की पिता बनने की धुंधली हो चुकी ख्वाहिश को हाईकोर्ट के एक आदेश से पंख मिल गए हैं। एक विशेष मामले की सुनवाई के दौरान दिए निर्देश में केरल हाईकोर्ट ने दंपती की बच्चे की उम्मीद की किरण दिखाते हुए निजी अस्पताल में पति के वीर्य को निकालने की अनुमति दी है। पति की तबीयत बिगड़ने के बाद स्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने ये आदेश दिया है।

क्या है मामला
कोर्ट का यह आदेश सिर्फ इसी दंपति के लिए नहीं बल्कि लगभग उन 20 जोड़ों के लिए खुशखबरी की तरह है जिन्हें एसिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नालॉजी रेगुलेशन (एआरटी) के नियमों के चलते अपनी उम्मीदों को पूरा करने से रोक दिया गया था। इसके खिलाफ ये दंपती कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
मामला 61 वर्षीय पति से जुड़ा है जो पिता बनने के लिए फर्टिलिटी क्लीनिक से इलाज कराना चाहते हैं लेकिन एआरटी कानून उनकी इस कोशिश में बाधा बना हुआ है। उनकी उम्र के चलते कोई भी लाइसेंस प्राप्त क्लीनिक उनका इलाज करने के लिए तैयार नहीं है।

क्या है वो कानून जो बन रहा बाधा
बहुत सारे दंपती ऐसे होते हैं जिन्हें बच्चे पैदा करने में मुश्किल आती है। ऐसी स्थिति में वे फर्टिलिटी क्लीनिक का रुख करते हैं जहां पर लाइसेंस प्राप्त डॉक्टर संतान उत्पत्ति में उनकी मदद करते हैं। लेकिन ये क्लीनिक मनमर्जी न करें इसके लिए इन्हें एक कानून के तहत नियंत्रित किया गया है। इस कानून को एसिस्टेड रिप्रोडक्टिव रेगुलेशन के नाम से जाना जाता है। इसी एआरटी कानून के तहत एक उपबंध है जिसके तहत क्लीनिक या अस्पताल 50 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिला रोगी और 55 वर्ष से अधिक आयु के पुरुष रोगियों को फर्टिलिटी सेवा नहीं दे सकते। सीधी बात 50 साल से अधिक की महिला और 55 साल से अधिक के पुरुष चाह कर भी बच्चे पैदा करने के लिए इलाज नहीं करा सकते।

इस केस में क्या हुआ था
कोर्ट ने जिस पति की याचिका पर आदेश दिया है उनकी उम्र 61 साल है और वह पेशे से किसान है। पति ने साल 1989 में कम्प्यूटर साइंस में ऑनर्स के साथ मास्टर डिग्री ली थी। वहीं महिला गृहिणी है, जिसकी उम्र 39 साल है। साल 2019 में जब शादी के काफी समय बीतने के बाद पत्नी ने गर्भ धारण नहीं किया जिसके बाद दंपती ने बांझपन का इलाज कराने का फैसला किया। इसी साल जून में दंपती ने मुवत्तुपुझा के एक निजी अस्पताल में रजिस्ट्रेशन कराया। इस बीच कोरोना महामारी शुरू हो गई और इलाज जारी नहीं रह सका।
कोरोना से राहत के बाद जब दंपती ने फिर से इलाज जारी करने का फैसला किया तो पता चला कि 2021 में एआरटी अधिनियम लागू हो गया। एक्ट की धारा 21 (जी) के तहत पति अपना इलाज नहीं करा सकता था क्योंकि वह पुरुषों के लिए निर्धारित 55 वर्ष की आयु से अधिक था।

दंपती ने कोर्ट से की ये मांग
अधिनियम की इसी उपखंड 21 (जी) के खिलाफ दंपती ने कोर्ट का रुख किया। याचिका में दंपति ने क्लीनिकों में पुरुषों और महिलाओं के इलाज के लिए आयु निर्धारित करने वाले उपबंध को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की। यही नहीं याचिका में अस्पताल को इलाज शुरू करने और पति के वीर्य को इकठ्ठा करने और उसे प्रिजर्व करने की अनुमति देने का निर्देश देने की भी मांग की।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि पति एक दुर्लभ हृदय रोग से पीड़ित है। हाल ही में उनकी तबीयत बिगड़ गई जिसके बाद अब दिल अब 40 प्रतिशत तक क्षमता तक की काम कर रहा है। पति का इलाज चल रहा है और दंपति को डर है कि अगर उनकी स्थिति बिगड़ती है तो आईवीएफ के उद्येश्य से वीर्य एकत्र करना संभव नहीं होगा।

कोई भी कानून संबंध बनाने से नहीं रोकता
इसके साथ ही याचिकार्ताओं ने तर्क दिया कि ऐसा कोई कानून है जो उम्र के अंतर के कारण एक पुरुष और महिला को वैवाहिक संबंध में प्रवेश करने से रोकता है। यह भी कहा कि अगर स्वाभाविक रूप से कोई दंपती गर्भ धारण करने में सक्षम होता है तो कोई भी कानून उन्हें बच्चा पैदा करने से नहीं रोकेगा। ऐसे में एआरटी सेवा की मांग करने वाले पुरुषों और महिलाओं के लिए आयु की सीमा तय करना भेदभावपूर्ण है।

कोर्ट ने आदेश में क्या कहा
केरल हाईकोर्ट ने आदेश में कहा याचिकाकर्ताओं द्वारा व्यक्ति गई आशंका में दम है कि किसी भी अप्रिय घटना या याचिकाकर्ताओं की स्थिति में और गिरावट आने पर रिट याचिका में मांगी गई राहत बेकार हो जाएगी।" अदालत ने यह स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा बताई गई विशेष परिस्थितियों को देखते हुए वीर्य संरक्षित करने का निर्देश जारी किया गया है। अदालत ने निर्देश में कहा एआरटी के तहत इलाज जारी करने याचिकाकर्ताओं का अधिकार याचिका के परिणाम पर निर्भर करेगा।












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