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लेस्बियन रिश्‍ते को केरल हाईकोर्ट ने ठहराया जायज, साथ जिंदगी जीने की दी इजाजत

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कोच्चि। समलैंगिकता को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से अपराध की श्रेणी से बाहर किए जाने के कुछ ही दिन बाद केरल हाईकोर्ट ने इस संबंध में एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दो महिलाओं को साथ रहने की इजाजत दी है। आपको बता दें कि यहां की रहने वाली 40 वर्षीय एस श्रीजा और 24 वर्षीय अरुणा एक साथ रहना चाहती थीं, लेकिन अरुणा के परिजन इसके लिए राजी नहीं थे। इसी को लेकर दोनों ने कोर्ट में याचिका डाली थी। हालांकि उस वक्‍त मजिस्‍ट्रेट ने इसे खारिज कर दिया था और कहा था कि अरुणा को जबरन उसके परिजनों से दूर किया गया है।

लेस्बियन रिश्‍ते को केरल हाईकोर्ट ने ठहराया जायज, साथ जिंदगी जीने की दी इजाजत

लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हाई कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के अगस्त में दिए फैसले को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट में दायर की गई श्रीजा की याचिका के मुताबिक अरुणा को उसके परिजनों ने गैरकानूनी तरीके से अपने कब्जे में रखा हुआ है। श्रीजा ने बताया, 'अगस्त में दोनों ने साथ रहना शुरू किया था लेकिन इसके बाद अरुणा के परिजनों ने उसकी गुमशुदगी का मामला दर्ज करा दिया। इसके बाद तिरुअनंतपुरम की एक मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने अरुणा को अलग कर दिया और उसके परिजन उसे जबर्दस्ती अपने साथ ले गए।

इसके बाद अरुणा को मेंटल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां दोनों की फिर से मुलाकात हुई। लेकिन अस्पताल प्रशासन अरुणा को श्रीजा के साथ जाने देने को तैयार नहीं हुआ। श्रीजा ने बाद में केरल हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगाई। इसके बाद पुलिस को आदेश मिला कि अरुणा को कोर्ट के समक्ष पेश किया जाए। मंगलवार को अरुणा को कोर्ट में पेश किया गया जहां उसने श्रीजा के साथ रहने की इच्छा जताई। इस दौरान श्रीजा ने समलैंगिक संबंधों पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का भी जिक्र किया। अंत में इस पर जस्टिस सीके अब्दुल रहीम और जस्टिस नारायण पिशार्डी की खंड पीठ ने दोनों को साथ रहने की अनुमति दे दी।

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English summary
Weeks after the Supreme Court read down Section 377 of the Indian Penal Code and legitimised same-sex relationships, a Division Bench of the Kerala High Court Tuesday allowed a 40-year-old woman to live with her 24-year-old woman partner.
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