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Kerala: केरल के मंदिरों में पुरुषों के लिए ड्रेस कोड पर विवाद, शर्ट पहनने की अनुमति पर हिंदू संगठनों में मतभेद

Kerala: केरल के मंदिरों में पुरुषों के शर्ट पहनकर प्रवेश करने के मुद्दे पर प्रमुख हिंदू संगठन विभाजित हो गए हैं। यह बहस श्री नारायण धर्म संघम ट्रस्ट के अध्यक्ष स्वामी सत्चिदानंद द्वारा इस प्रथा को पिछड़ी सोच करार देने और इसे समाप्त करने की अपील के बाद उभरी।

इस विचार का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा कि स्वामी सत्चिदानंद की बात सामाजिक सुधारक श्री नारायण गुरु के विचार, जीवन और संदेश को प्रतिध्वनित करती है।

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विभाजित संगठन और उनकी प्रतिक्रियाएं

एसएनडीपी योगम राज्य की बहुसंख्यक इझावा समुदाय का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने मंदिरों में पुरुषों को शर्ट पहनने की अनुमति देने के अपने आह्वान को दोहराने का निर्णय लिया है। वहीं नायर सर्विस सोसाइटी ने इस मामले को व्यक्तिगत मंदिर प्राधिकरणों के विवेक पर छोड़ने का सुझाव दिया है।

एसएनडीपी योगम के महासचिव वेल्लापल्ली नटेसन ने कहा कि योगम अपने सभी पदाधिकारियों को निर्देश देगा कि वे इस पुरानी प्रथा को समाप्त करें। 4 जनवरी को कोल्लम में आयोजित होने वाली बैठक में इस संबंध में निर्णय लिया जाएगा। हम अपने जमीनी स्तर के पदाधिकारियों को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर कदम उठाने के लिए कहेंगे।

दूसरी ओर एनएसएस के महासचिव जी सुकुमारन नायर ने कहा कि केरल के मंदिरों में इस तरह की प्रथाओं में कोई एकरूपता नहीं है। यह एक पारंपरिक प्रथा है और इसे मंदिर प्राधिकरणों के विवेक पर छोड़ देना बेहतर होगा।

पुजारियों और देवस्वम बोर्डों की राय

अखिल केरल तंत्री मंडलम के महासचिव एस राधाकृष्णन पोटी ने इस प्रथा को मंदिरों की स्थापना के समय देवता, पुजारी और भक्तों द्वारा ली गई प्रतिज्ञा का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रथाओं को शायद ही कभी बदला जा सकता है।

त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड के अध्यक्ष पीएस प्रसाद ने कहा कि कुछ मंदिरों जैसे सबरीमाला में पुरुष शर्ट पहन सकते हैं। लेकिन करिक्काकोम और एट्टुमानूर जैसे प्रमुख मंदिरों में यह अनुमति नहीं है। बोर्ड इस मुद्दे पर जल्द ही चर्चा करेगा।

इसी प्रकार गुरुवायुर देवस्वम बोर्ड के अध्यक्ष वीके विजयन ने बताया कि एक दशक पहले महिलाओं को चूड़ीदार पहनकर गुरुवायुर श्रीकृष्ण मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति देने का निर्णय लिया गया था। जिसका विरोध हुआ था। हालांकि बदलते समय के साथ ड्रेस कोड में संशोधन किया गया। उन्होंने कहा कि पुरुषों को अभी भी गुरुवायुर मंदिर में शर्ट उतारकर प्रवेश करना होता है और यह मुद्दा अभी तक बोर्ड के सामने नहीं आया है।

सामाजिक सुधार बनाम परंपरा

यह विवाद परंपरा और सामाजिक सुधार के बीच संतुलन स्थापित करने की कोशिश को दर्शाता है। जहां कुछ संगठन इसे प्रगतिशील दृष्टिकोण के रूप में देखते हैं। वहीं अन्य इसे धार्मिक परंपरा का अटूट हिस्सा मानते हैं। जिसे बदला नहीं जाना चाहिए।

विशेषज्ञों और नेताओं की राय

मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इसे सामाजिक न्याय और प्रगतिशील विचारधारा के प्रतीक के रूप में देखा। जबकि तंत्री मंडलम जैसे संगठन इसे धार्मिक रीति-रिवाजों के उल्लंघन के रूप में देख रहे हैं।

केरल में यह बहस यह सवाल खड़ा करती है कि क्या धार्मिक परंपराओं को बदलते सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश के अनुरूप ढालना चाहिए या इन्हें मूल रूप में बनाए रखना चाहिए। इस मुद्दे पर जल्द ही संबंधित बोर्ड और संगठन निर्णय लेंगे। जो राज्य की धार्मिक और सांस्कृतिक दिशा को प्रभावित कर सकता है।

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