SC/ST Act पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दायर करने वाला पहला राज्य बना केरल

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तिरवनंतपुरम। केरल , सर्वोच्च न्यायालय के 20 मार्च के फैसले को चुनौती देने वाली एक अलग समीक्षा याचिका दायर करने वाला पहला राज्य बन गया, जिसमें एससी / एसटी अधिनियम के तहत किसी व्यक्ति की तत्काल गिरफ्तारी पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। केरल सरकार ने अपने फैसले को पुनः समीक्षा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि यह एससी / एसटी समुदाय में असुरक्षा का स्रोत बन गया है। 19 पृष्ठ की समीक्षा याचिका केंद्र द्वारा दायर एक की तर्ज पर है, जिसने कहा था कि इस फैसले से क्षति हो रही है। इसके अलावा समीक्षा में कहा गया कि कोर्ट के पिछले फैसले का यह विरोधाभासी फैसला है। अस्पृश्यता की प्रथा और सामाजिक दृष्टिकोण से संबंधित ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को देखते हुए,संभावना है कि इस कानून का दुरुपयोग किया जाए।

SC/ST Act पर SC के फैसले के खिलाफ केरल ने दायर की याचिका

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम-1989 के दुरुपयोग को रोकने को लेकर गाइडलाइन जारी की थीं। यह सुनवाई महाराष्ट्र के एक मामले में हुई थी। ये गाइडलाइंस फौरन लागू हो गई थीं। जिसमें सरकारी कर्मी की तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी।

सरकारी कर्मचारियों की गिरफ्तारी सिर्फ सक्षम अथॉरिटी की इजाजत से होगी। आम लोगों के लिए एक्ट के तहत आरोपी सरकारी कर्मचारी नहीं हैं, तो उनकी गिरफ्तारी एसएसपी की इजाजत से होगी। अदालतों के लिए अग्रिम जमानत पर मजिस्ट्रेट विचार करेंगे और अपने विवेक से जमानत मंजूर या नामंजूर करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ भारत बंद का आह्वान किया था, जिसमें 12 से ज्यादा लोग मारे गए थे।

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English summary
Kerala becomes first state to challenge Supreme Court SC/ST verdict pinarayi vijayan

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