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Delhi Polls: दिल्ली में अकेले दम पर सरकार बनाने में असफल हो सकते हैं केजरीवाल!

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बेंगलुरू। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 में बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच आमने-सामने की लड़ाई होती दिख रही है। बीजेपी के आक्रामक कैंपेन से एकतरफा होने जा रही दिल्ली के चुनाव में न केवल सरगर्मी बढ़ गई है बल्कि खुद को जीता हुआ घोषित कर चुकी आम आदर्मी पार्टी चीफ अरविंद केजरीवाल की पैशानी पर बल पड़ गया है।

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यही कारण है कि दिल्ली सीएम ने कुर्सी पर बढ़ता हुआ खतरा देखतक केजरीवाल ने बीजेपी के आक्रामक कैंपेन की काट ढ़ूंढ़ते हुए इमोशनल कार्ड खेलना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में केजरीवाल ने मंगलवार को अपनी पत्नी सुनीता केजरीवाल और बेटी को मीडिया के सामने ले आए और इमोश्नल स्पीच जरिए दिल्ली की जनता के दिलों में जगह बनाने की कोशिश की है। हैरानी नहीं होनी चाहिए अगर केजरीवाल कल को मीडिया के सामने अपने माता और पिता को भी ले आएं।

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गौरतलब है केजरीवाल एंड पार्टी के रणनीति शाहीन बाग में पिछले 49 दिनों से जारी धरने और धऱने के दौरान हुई गोलीबारी से फेल हुई है। शाहीन बाग धरने को प्रायोजित और उसकी फंडिंग के लिए आम आदमी पार्टी को जिम्मेदारा ठहराते हुए बीजेपी ने चुनावी कैंपेन शुरू किया और जनता को समझाने में कामयाब रही कि सीएए के विरोध की आड़ में देशविरोधी गतिविधियों को प्रश्रय दिया जा रहा है। दिल्ली में बीजेपी के एग्रेसिब कैंपेन की शुरूआत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुरू की और घर-घर जाकर शाहीन बाग के सच को लोगों को बतलाया।

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बीजेपी ने दिल्ली के अपने चुनावी कैंपेन में मोदी सरकार द्वारा लिए गए साहसिक फैसले में शामिल अनुच्छेद 370, ट्रिपल तलाक और नागारिकता संशोधन कानून का जोर-शोर से प्रचार कर रही है। वहीं, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को पीओके पर भारतीय सेना द्वारा किए गए सर्जिकल और एयर स्ट्राइक पर सबूत मांगने को मुद्दा बनाया है, जिसकी काट ढूंढ पाना आम आदमी पार्टी के लिए मुश्किल हो रहा है।

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अन्ना आंदोलन से निकले आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल इस बार पिछले पांच वर्ष में किए अपने काम-काज के आधार पर दिल्ली की जनता से वोट मांग रही है, लेकिन लोक लुभावन कामकाज से केजरीवाल जनता को लुभाने में असफल साबित हुए हैं।

माना जा रहा है कि दिल्ली विधानसभा में केजरीवाल एंड पार्टी को मिली शुरूआत बढ़त का ग्राफ बीजेपी के आक्रामक कैंपेन से नीचे चला गया है। यही वजह है कि केजरीवाल ने मंगलवार को जारी पार्टी के मेनिफेस्टो में राष्ट्रवाद को जोड़ दिया है। बीजेपी राष्ट्रवाद और देशभक्ति को दिल्ली चुनाव में प्रमुख मुद्दा बनाया है।

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बीजेपी दिल्ली में सीएम कैंडीडेट के बजाय प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे पर चुनाव वैतरणी पार करने की योजना बनाई है। चूंकि केजरीवाल जानते हैं कि मोदी बनाम केजरीवाल होने से आम आदमी पार्टी के वोट फीसदी में गिरावट आ सकती है, इसलिए खुद केजरीवाल भी चुनाव को केजरीवाल बनान मोदी बनने से बचाना चाह रहे हैं।

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केजरीवाल अपने चुनावी कैंपेन में लगातार विपक्ष यानी कांग्रेस और बीजेपी को अपना सीएम कैंडीडेट घोषित करने की अपील कर रहे हैं, लेकिन बीजेपी और कांग्रेस दोनों दल बिना सीएम कैंडीडेट के मैदान में उतरे हैं। बीजेपी जहां प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर दिल्ली की जनता से वोट मांग रही है।

वहीं, कांग्रेस पूर्व दिल्ली सीएम स्वर्गीय शीला दीक्षित के कामकाज के आधार पर दिल्ली की गद्दी पर अपना दावा ठोक रही है। ऐसा माना जा रहा है कि बीजेपी को राष्ट्रवाद के नाम पर चुनाव में ऐज मिल सकती है और अगर ऐसा हुआ तो दिल्ली में बीजेपी और आम आदमी पार्टी में कांटे की टक्कर हो सकती है और आशंका है कि दिल्ली में एक बार फिर हंग असेम्बली जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

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हालांकि कुछ मीडिया संस्थानों के चुनावी सर्वे में आम आदमी पार्टी को 55-60 सीटें मिलने का अनुमान किया गया है जबकि बीजेपी ने अंदरूनी सर्वे का हवाला देते हुए खुद को 31-35 सीटों पर जीता हुआ बता रही है। फिलहाल दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 के लिए मतदान 8 फरवरी को होना है और 11 फरवरी को मतगणना होगी।

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उल्लेखनीय है दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार-प्रसार थमने में अभी दो दिन का वक्त शेष बचा है और देखना होगा कि बीजेपी और आम आदमी पार्टी इन दो दिनों में क्या रणनीति अपनाती है, क्योंकि कांग्रेस भी छुपे रूस्तम हो सकती है, क्योंकि शाहीन बाग प्रकरण के बाद मुस्लिम वोटर कांग्रेस को अपना मसीहा एक बार चुन सकती है। लोकसभा चुनाव 2019 में मुस्लिम समुदाय ने एकमुश्त कांग्रेस को वोट दिया था और उक्त चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बाद आम आदमी पार्टी तीसरे नबंर पर आई थी।

चुनावी वादे पूरे नहीं हुए तो केजरीवाल नहीं होंगे जिम्मेदार, नियम व शर्तों के साथ आया AAP का क्रांतिकारी मेनिफेस्टो!

अजीबोगरीब टर्म एंड कंडीशन वाले मेनिफेस्टो लेकर आए हैं केजरीवाल

अजीबोगरीब टर्म एंड कंडीशन वाले मेनिफेस्टो लेकर आए हैं केजरीवाल

केजरीवाल एंड पार्टी ने 2020 विधानसभा चुनाव का मेनिफेस्टो जारी करते हुए दुहाई दिया कि पिछले पांच वर्षों में उनकी पार्टी इसलिए दिल्ली को पूर्ण राज्य नहीं बना सकी, क्योंकि दिल्ली की जनता ने दिल्ली के सातों लोकसभा सीटों पर आम आदमी पार्टी को नहीं, बल्कि बीजेपी को जितवा दिया। टर्म एंड कंडीशन वाले नए मेनिफेस्टो में केजरीवाल ने कहा है कि तब दिल्ली वाले मेनिफेस्टो में किए गए उन तमाम वादों को तकादा नहीं कर पाएगा जब तक दिल्ली की लोकसभा की कुल सातों सीटों पर दिल्ली की जनता आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों को जितवा कर संसद नहीं भेजेगी।

केजरीवाल पर पिछले पांच वर्षों पर वादाखिलाफी का आरोप लगता रहा है

केजरीवाल पर पिछले पांच वर्षों पर वादाखिलाफी का आरोप लगता रहा है

केजरीवाल पर पिछले पांच वर्षों पर वादाखिलाफी का आरोप लगता रहा है, क्योंकि पिछले दिल्ली विधानसभा चुनाव में केजरीवाल एंड पार्टी द्वारा किए गए 70 वादों की सच्चाई किसी से छिपी नही है। आम आदमी पार्टी पर आरोप लगता रहता है कि दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने के बाद आम आदमी पार्टी विश्वविजय की ओर उन्मुख हो गई और दिल्ली पर ध्यान देना छोड़ दिया। खुद मुख्यमंत्री पर आरोप है कि वो दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने के बाद पूरे भारत में आम आदमी पार्टी के विस्तार में लग गए और साढ़े चार साल बाद दिल्ली तब लौटे जब लोकसभा चुनाव 2019 में पार्टी की लुटिया पूरी तरह से डूब गई।

मेनिफिस्टो के टर्म एंड कंडीशन न डाउन कर दे केजरीवाल का मीटर

मेनिफिस्टो के टर्म एंड कंडीशन न डाउन कर दे केजरीवाल का मीटर

केजरीवाल का नियमों व शर्तों वाला दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 का मेनिफेस्टो को दिल्ली की जनता कैसे लेती है, यह तो 8 फरवरी को होने वाले मतदान और 11 फरवरी को आने वाले नतीजों में पता चल जाएगा, लेकिन भारतीय लोकतंत्र में आम आदमी पार्टी शायद पहली ऐसी पार्टी बन गई है, जो जनता को वादों को पूरा करने के लिए टर्म एंड कंडीशन लेकर आई है।

कांग्रेस ने 300 यूनिट मुफ्त पानी और 20000 ली. मुफ्त पानी की घोषणा की

कांग्रेस ने 300 यूनिट मुफ्त पानी और 20000 ली. मुफ्त पानी की घोषणा की

दिल्ली विधानसभा चुनाव का माहौल फ्रीमय होने से केजरीवाल को अधिक नुकसान हो सकता है। अगर दिल्ली की जनता ने 200 यूनिट मुफ्त बिजली और 20000 लीटर मुफ्त पानी के लिए केजरीवाल को चुना था, तो दिल्लीवाले 300 यूनिट मुफ्त पानी और 20000 लीटर मुफ्त पानी के साथ घर बैठे बीए पास और एमए पास छात्र-छात्राओं के लिए बेराजगारी भत्ता हासिल करने के लिए कांग्रेस की ओर जाने से क्यों गुरेज करेंगी। मुफ्त राजनीति में अगर कांग्रेस 5-10 फीसदी भी वोट खींचने में कामयाब रही तो दो मुफ्त की राजनीति करने वाली पार्टियों के झगड़े में बीजेपी का फायदा बढ़ जाएगा।

AAP का वोट छिटका तो वोटों के बंटवारे का लाभ बीजेपी को मिलेगा

AAP का वोट छिटका तो वोटों के बंटवारे का लाभ बीजेपी को मिलेगा

बीजेपी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव 2013 और 2015 में क्रमशः 32 और 31 फीसदी वोट हासिल किए थे और अगर कांग्रेस केजरीवाल एंड पार्टी को वोट फीसदी में 10 फीसदी खींचने में कामयाब रही तो दिल्ली में बीजेपी को विजेता बनने से कोई नहीं रोक पाएगा। आम आदमी पार्टी के वोट छिटके तो वोटों के बंटवारा का लाभ सीधे-सीधे बीजेपी को मिलेगा और कम अंतर से ही सही, लेकिन बीजेपी सीटों पर विजेता मामले में अधिक नंबर लाने में सफल हो सकती है। यह समीकरण ठीक वैसा ही होगा जैसा वर्ष 2015 दिल्ली विधानसभा चुनाव में हुआ था जब अधिकांश सीटों पर बीजेपी और AAP पार्टी के उम्मीदवारों की जीत का अंतर बेहद कम रहा था।

बीजेपी को दिल्ली चुनाव में 35 से 40 सीटें मिल सकती हैं: सर्वे

बीजेपी को दिल्ली चुनाव में 35 से 40 सीटें मिल सकती हैं: सर्वे

अभी हाल में बीजेपी ने एक अंदरूनी सर्व का हवाला देते हुए खुद को दिल्ली में विजेता भी घोषित कर दिया है। दिल्ली बीजेपी के अंदरूनी सर्वे के मुताबिक बीजेपी को दिल्ली चुनाव में 35 से 40 सीटें मिल सकती हैं। बीजेपी का यह अंदरूनी सर्वे कांग्रेस के घोषणा पत्र से पहले कंडक्ट किया गया था, लेकिन केजरीवाल एंड पार्टी के टारगेट करके जारी किए कांग्रेस के घोषणा पत्र के बाद अब माना जा रहा है कि अब केजरीवाल एंड पार्टी को और अधिक झटका लग सकता है, क्योंकि अगर मुफ्त की राजनीति को आधार माना जाए तो केजरीवाल की तुलना में कांग्रेस के मुफ्त की घोषणाओं का वजन ज्यादा है।

बीजेपी को उम्मीद मुफ्त की राजनीति को दिल्ली की जनता देगी झटका

बीजेपी को उम्मीद मुफ्त की राजनीति को दिल्ली की जनता देगी झटका

झटका कांग्रेस के घोषणा पत्र की उक्त घोषणाएं दिल्ली में केजरीवाल एंड पार्टी के वोट काटने में ज्यादा सफल होगी, क्योंकि बीजेपी मोदी और राष्ट्रवाद को अपना मुद्दा बनाया है और बीजेपी को लग रहा है कि दिल्ली की जनता मुफ्त की राजनीति को इस बार झटका देते हुए राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनेगी। अगर बीजेपी को दावों में थोड़ा भी दम है, तो केजरीवाल सरकार को मंसूबों पर पलीता लगना तय है। हालांकि एबीपी और सी वोटर द्वारा किए एक सर्वे रिपोर्ट में केजरीवाल को एक बार फिर दिल्ली में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने की भविष्यवाणी की गई थी, लेकिन शाहीन बाग, शरजीह इमाम और कांग्रेस के घोषणा पत्र से अब आम आदमी पार्टी की चूले हिल गई हैं।

राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा के बल पर दिल्ली जीतेगी बीजेपी?

राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा के बल पर दिल्ली जीतेगी बीजेपी?

बीजेपी पूर्व अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अनुच्छेद 370, पीओके पर एयर स्ट्राइक और सर्जिकल स्ट्राइक जैसे राष्ट्रवादी मुद्दों के साथ सीएए को लेकर एग्रीशिब कैंपेन कर रही है। शाह ने दिल्ली के चुनावी कैंपेन में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों को एक साथ टारगेट किया है। बीजेपी नेता के मुताबिक पीओके पर सर्जिकल और एयर स्ट्राइक के दौरान सूबत मांगने वालों में दोनों दल शामिल थे। वहीं, जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का भी दोनों दल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने विरोध किया था। तीनों मुद्दों को बीजेपी ने राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रवाद से जोड़कर बीजेपी दिल्ली की जनता की समझाने में हद तक सफल होती भी दिख रही है।

सीएए विरोध के चलते चुनाव में बीजेपी को हो सकता है फायदा

सीएए विरोध के चलते चुनाव में बीजेपी को हो सकता है फायदा

सीएए, एनआरसी और एनपीआर के विरोध के चलते भी बीजेपी को दिल्ली विधानसभा में फायदा मिलता दिख रहा है, क्योंकि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी अभी भी जनता को यह समझाने में असफल रहे हैं कि लागू खासकर नागरिकता संशोधन कानून भारतीय नागरिकों के हितों के खिलाफ कैसे है? चूंकि दिल्ली का बहुसंख्यक वोटर शहरी है और उसको सीएए के विरूद्ध फैलाए जा रहे भ्रांतियों और गलतफहमियों से दूर है। सीएए के विरोध में दिल्ली के शाहीन बाग में जारी धरना उदाहरण हैं, जहां मुस्लिम मौजूद हैं जबकि दिल्ली एक दूसरा चुपचाप है, जिसकी शांति केजरीवाल एंड पार्टी को कौतुहल का विषय बना हुआ और उन्हीं शांति में ही केजरीवाल को हार की पदचाप सुनाई पड़ने लगी है।

केजरीवाल पर लगता रहा है CAA के खिलाफ धरने की फंडिंग का आरोप

केजरीवाल पर लगता रहा है CAA के खिलाफ धरने की फंडिंग का आरोप

दिल्ली के शाहीन बाग में जारी धरना-प्रदर्शन की फंडिंग करने का आरोप केजरीवाल पर लगता रहा है। वहीं, कांग्रेस के नेता को कैमरे के सामने शाहीन बाग धरने को फंडिंग करने की बात स्वीकार कर ली है। इस मामले में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस एक ही नाव पर सवार हैं कांग्रेस ने मेनिफेस्टों में सीएए और एनआरसी ही नहीं, एनपीआर का विरोध करने का ऐलान किया है जबकि 2011 जनगणना में एनपीआर को लागू करने वाली कांग्रेस ने एनपीआर को कांग्रेस का बेबी तक बतलाया था।

दिल्ली एक बार फिर हंग असेम्बली की ओर बढ़ रही है

दिल्ली एक बार फिर हंग असेम्बली की ओर बढ़ रही है

माना जा रहा है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे दोपहर 11 बजे तक क्लियर हो जाएंगे कि कौन सी पार्टी दिल्ली में विजेता बनकर उभरी है। हालांकि एक ऐसी भी संभावना है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे 2013 दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे को भी दोहरा सकते हैं जब दिल्ली में हंग असेम्बली हो गई थी और 28 सीट जीतने वाली AAP ने कांग्रेस के समर्थन से दिल्ली में सरकार बना ली थी। यह अलग बात है कि उक्त सरकार महज 49 दिन में गिर गई थी।

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English summary
The BJP has been vigorously promoting Article 370, the Triple Divorce and Citizenship Amendment Act, which is part of the bold decisions taken by the Modi government in its election campaign in Delhi. At the same time, the Congress and the Aam Aadmi Party have made a point to ask for evidence on the surgical and air strikes carried out by the Indian Army on PoK, which is becoming difficult for the Aam Aadmi Party to find the cut.
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