केदारनाथ त्रासदी को भी नहीं छोड़ा, अफसरों ने किया करोड़ों का घोटाला
देहरादून।
केदारनाथ घाटी में 16 जून 2013 को हुई भीषण त्रासदी के पांच साल बीत गए। हजारों लोगों की मौत और तबाही के उस दर्दनाक मंजर के बाद कुछ ऐसी घटनाएं हुईं जो इंसानियत को शर्मसार कर गईं। आपदा के बाद लोगों की मजबूरी का फायदा कई लोगों ने उठाया था। लोगों को 100 रुपए में पराठा और 50 रुपए में चाय खरीदने पड़े थे। उत्तराखंड प्रदेश के अधिकारी भी आपदा से पैसा बनाने से नहीं चूके और तहस-नहस हो चुके केदारनाथ शहर के पुनर्निर्माण कार्यों में करोड़ों का घोटाला कर दिया। id="toptextpromo"> id='are-slot-1' class='oiad oi-axt oiadv'>
हाईकोर्ट ने दिए एफआईआर दर्ज करने के आदेश
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने घोटाले के आरोपी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि एक महीने के भीतर आरोपी अफसरों के खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई करे।

30 करोड़ के ठेके में अफसरों ने की धांधली
इस बारे में वकील सुशील वशिष्ठ ने एक याचिका दायर की थी। याचिका में यह कहा था कि 2013 की आपदा के बाद उरेडा (उत्तराखंड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी) को बाढ़ की वजह से बिजली-पानी की टूटी लाइनों को ठीक करने के लिए 30 करोड़ सरकार ने दिए थे जिसमें अफसरों ने बंदरबांट किया।

फर्जी बिल लगाकर सरकार से लिया पैसा
याचिकाकर्ता ने कहा कि अफसरों ने फर्जी बिल जमा कर सरकार से पैसा लिया इसलिए इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने भी केस दर्ज करने के आदेश दे दिए। डीएम की जांच में यह घोटाला सामने आया था जब यह पाया गया था कि अधिकारियों ने पुरानी पाइपों को ही लाइन में जोड़ दिया और फर्जी बिल बनाकर पैसा अपनी जेब में भर लिया।












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