कौन बनेगा करोड़पति 11: 599 लड़कों के कॉलेज में अकेली लड़की थीं सुधा, इन 3 शर्तों पर मिला था दाखिला

मुंबई। सोनी टीवी पर आने वाले शो 'कौन बनेगा करोड़पति' का 11वां सीजन अब खत्म होने वाला है। इस शो को अभिनेता अमिताभ बच्चन होस्ट कर रहे हैं। शो में हमेशा नए प्रतियोगियों की कहानी जानने को मिलती है। अब शो में शामिल हुईं इन्फोसिस फाउंडेशन की चेयरपर्सन सुधा मूर्ति ने भी अपने जीवन के कुछ रोचक किस्से सुनाए हैं।

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    Infosys Chairperson Sudha Murthy says on KBC: Was only girl in 599 boys in college | वनइंडिया हिंदी
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    शो के अब कुछ ही एपिसोड प्रसारित होने रह गए हैं। इसमें आखिरी कर्मवीर प्रतियोगी सुधा मूर्ति होंगी। इस दौरान उन्होंने अपनी शिक्षा से जुड़ा किस्सा भी साझा किया है। जो हर किसी के लिए बेहद ही प्ररणादायक है। वैसे तो ये एपिसोड शुक्रवार को प्रसारित होगा लेकिन इसका टीजर सोशल मीडिया पर पहले से ही वायरल हो रहा है।

    599 लड़कों की क्लास में अकेली लड़की थीं

    599 लड़कों की क्लास में अकेली लड़की थीं

    इसका एक वीडियो सोनी टीवी के इंस्टाग्राम पेज पर भी देखा गया है। इस छोटी सी क्लिप में सुधा मूर्ति ने अपनी कहानी साझा की है। उन्होंने अपने संघर्ष के बारे में भी बात की है। वीडियो में मूर्ति कहती दिख रही हैं कि वह 599 लड़कों की क्लास में अकेली लड़की थीं। इंजीनियरिंग में दाखिला लेना उनके लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था।

    सबने मना किया

    सबने मना किया

    समाज सेविका सुधा मूर्ति ने कहा, '1969 में मैंने इंजीनियरिंग करने का फैसला किया, नानी ने मना करते हुए कहा कि कोई हमारे समुदाय में शादी नहीं करेगा। सबने राय दी लेकिन मैंने जाने का फैसला किया। मैं 599 लड़कों की क्लास में अकेली लड़की थी। प्रिंसिपल ने कहा कि नंबर अच्छे हैं इसलिए दाखिला तो देना है लेकिन तीन शर्त हैं।'

    कौन सी थीं तीन शर्त?

    कौन सी थीं तीन शर्त?

    सुधा मूर्ति ने उन शर्तों के बारे में बताते हुए कहा, 'पहली शर्त है, साड़ी पहनना, दूसरा कॉलेज कैंटीन में ना जाना और तीसरा लड़कों से बात नहीं करना। पहली शर्त तो मान ली, चलो साड़ी ही पहनेंगे। दूसरी शर्त थी कि कैंटीन नहीं जाना, चलो कैंटीन खराब थी हम वैसे भी नहीं जाते। तीसरी शर्त- एक साल लड़कों से बात नहीं की लेकिन जब मुझे पहली रैंक मिली तो वो खुद मुझसे बात करने आए।'

    क्या था सबसे मुश्किल?

    क्या था सबसे मुश्किल?

    उन्होंने आगे कहा, 'सबसे मुश्किल था, कॉलेज में टॉयेलेट नहीं था, मुझे 4 साल में टॉयलेट का महत्व पता चला। इसलिए हमने इन्फोसिस चेयरमैन रहते हुए 16 हजार टॉयलेट बनवाए।' बता दें इस एपिसोड में वह देवदासी महिलाओं के जरिए बुनी गई चादर भी अमिताभ बच्चन को तोहफे में देती नजर आएंगी।

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