सुषमा स्वराज और कौशल स्वराज का लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में क्यों दर्ज है नाम?
Limca Book of Records Swaraj couple: पूर्व विदेश मंत्री स्वर्गीय सुषमा स्वराज के पिता स्वराज कौशल का 4 दिसंबर 2025 को निधन हो गया है। 73 वर्षीय स्वराज कौशल के निधन की खबर दिल्ली भाजपा द्वारा दी गई। वर्तमान दिल्ली सांसद बांसुरी स्वराज के पिता कौशल स्वराज सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने अधिवक्ता थे और मिजोरम के राज्यपाल और राज्यसभा सांसद की भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
बेटी बांसुरी स्वराज के सिर से उठा मां-बाप का साया
याद रहे 6 अगस्त की 2019 में भाजपा की दिग्गज नेता सुषमा स्वराज का 67 वर्ष की आयु में दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में दिल का दौरा पड़ने के कारण निधन हो गया था। वो लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। कौशल किशोर के निधन के बाद बेटी बांसुरी स्वराज के सिर से मां-बाप दोनों का साया उठ गया है।

आपको ये जानकर गर्व होगा कि स्वर्गीय सुषमा स्वराज और स्वराज कौशल दोनों की अनूठी उपलब्धियों को देखते हुए, विश्वभर में रिकॉर्ड संजोने के लिए मशहूर लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने उन्हें एक 'विशिष्ट दंपती' के रूप में दर्ज किया है। यह युगल राजनीति और सार्वजनिक सेवा में अपनी असाधारण यात्रा के लिए जाना जाएगा। जानिए एक 'विशिष्ट दंपती' के तौर पर इनका नाम क्यों लिम्का बुक में दर्ज है?
स्वराज कौशल सबसे कम उम्र में बने थे राज्यपाल
सुषमा स्वराज के पति स्वराज कौशल भी अपने आप में एक असाधारण व्यक्तित्व थे। समाजवादी विचारधारा से जुड़े रहे कौशल सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील थे। उनकी सबसे उपलब्धियों में से एक महज 38 साल की उम्र में भारत के सबसे युवा राज्यपाल बनना था। उन्होंने फरवरी 1990 से 1996 तक मिजोरम के राज्यपाल पद संभाला।
मिजोरम में निभाई थी ये अहम भूमिका
स्वराज कौशल को भारत में पूर्वोत्तर मामलों का विशेषज्ञ माना जाता था। 1979 में, उन्होंने अंडरग्राउंड मिजो नेता लालडेंगा की रिहाई सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बाद में, उन्हें अंडरग्राउंड मिजो नेशनल फ्रंट का संवैधानिक सलाहकार नियुक्त किया गया, ताकि सरकार के साथ शांति वार्ताएं संचालित की जा सकें।
स्वराज कौशल ने 20 साल पुराना विद्रोह खत्म करवाया
कई दौर की बातचीत के परिणामस्वरूप, ऐतिहासिक मिजोरम शांति समझौता हुआ, जिसने क्षेत्र में 20 साल से चले आ रहे विद्रोह को समाप्त कर दिया। इसी महत्वपूर्ण योगदान और मध्यस्थता के लिए उन्हें प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया था।
सुषमा स्वराज सबसे युवा कैबिनेट मंत्री
सुषमा स्वराज का लंबा और प्रभावशाली राजनीतिक जीवन कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों से भरा रहा। उन्होंने महज 25 साल की उम्र में हरियाणा सरकार में सबसे युवा कैबिनेट मंत्री बनकर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। इस विशिष्ट उपलब्धि ने उनके भविष्य की संकेत दे दिया था। देश-दुनिया के कई प्रमुख नेताओं, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं, ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री
स्वर्गीय सुषमा स्वराज ने 'पहली महिला' के तौर पर कई रिकॉर्ड अपने नाम किए। वह दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं और देश की पहली पूर्णकालिक महिला विदेश मंत्री का गौरव भी उन्होंने ही प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त, उन्हें पहली महिला सर्वश्रेष्ठ सांसद और किसी राष्ट्रीय राजनीतिक दल की पहली महिला प्रवक्ता होने का श्रेय भी प्राप्त है।












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