Karnataka Govt Formation: जानिए क्या होता है फ्लोर-टेस्ट?
नई दिल्ली। कर्नाटक में सत्ता हासिल करने के लिए चल रहा सियासी ड्रामा अब दिलचस्प मोड़ पर आ चुका है, राज्य में बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता देने के बाद उपजे विवाद पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि कर्नाटक में शनिवार यानी कल ही फ्लोर टेस्ट कराया जाएगा। यानी अब तय हो गया कि कर्नाटक में बीजेपी को बहुमत साबित करने के लिए अब 14 दिनों का समय नहीं मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट की 3 सदस्यीय बेंच ने ये फैसला लिया है।
अब सवाल ये उठता है कि आखिर फ्लोर टेस्ट होता क्या है, चलिए इसी को समझते है विस्तार से...

क्या होता है फ्लोर टेस्ट?
नई सरकार का विधानसभा या लोकसभा में बहुमत साबित करने को फ्लोर टेस्ट कहते हैं। फ्लोर टेस्ट तीन तरह से साबित होता है। पहला ध्वनिमत, दूसरा संख्याबल और तीसरा हस्ताक्षर के जरिए मतदान दिखाया जाता है।

बहुमत तीन तरह से साबित होता है
- ध्वनिमत
- हेड काउंट या संख्याबल : जब विधायक सदन में खड़े होकर अपना बहुमत दर्शाते हैं.
- लॉबी बंटवारा : इसमें विधानसभा सदस्य लॉबी में आते हैं और रजिस्टर में हस्ताक्षर करते हैं. -हां' के लिए अलग लॉबी और 'न' के लिए अलग लॉबी होती है।

बीजेपी को 104 सीट मिली है
आपको बता दें कि 12 मई को कर्नाटक विधानसभा में 222 सीटों के लिए चुनाव हुए थे यानी बहुमत के लिए 112 सीटों की जरूरत है, 15 मई को आए नतीजों में बीजेपी को 104 सीट मिली है जबकि जेडीएस को 37 और कांग्रेस ने 78 सीटों पर विजय हासिल की है।

कौन करेगा कर्नाटक पर राज?
जबकि 1 सीट बसपा और 2 निर्दलीय को मिली है, यानी बहुमत साबित करने के लिए बीजेपी को अभी भी 8 विधायकों की जरूरत पड़ेगी लेकिन जेडीएस के कुमारस्वामी दो सीटों से जीतकर विधायक बने हैं, ऐसे में उन्हें एक सीट से इस्तीफा देना पड़ेगा तो फिर 221 सीट के लिहाज से बीजेपी को 111 सीटों की जरूरत पड़ेगी बहुमत साबित करने के लिए, अब इस मैजिक नंबर को जो हासिल कर लेगा, कर्नाटक का राज उसे ही मिलेगा।












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