Karnataka Chunav result 2023: भारत जोड़ो यात्रा वाली सीटों पर कांग्रेस की बंपर जीत
Karnataka Chunav result 2023: जिन सीटों से राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा निकली थी, वहां कांग्रेस ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। इन सीटों पर पार्टी की स्ट्राइक रेट 66 फीसदी है।

Karnataka Chunav 2023 Rahul Gandhi Bharat Jodo Yatra seats result: कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आने से यह साफ हो गया है कि इसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा ने अच्छी भूमिका निभाई है। उनकी यह यात्रा जहां-जहां से गुजरी है, वहां कांग्रेस का प्रदर्शन काफी प्रभावकारी रहा है।
भारत जोड़ो यात्रा वाली सीटों पर कांग्रेस की बड़ी जीत
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कर्नाटक की जिन विधानसभा सीटों को कवर किया था। उनमें से 48 के परिणाम देखने के बाद इसे बहुत ही सफल कहा जा सकता है। कांग्रेस ने इनमें से 32 सीटें जीत ली हैं।
भारत जोड़ो यात्रा वाली सीटों पर कांग्रेस की स्ट्राइक रेट
चुनाव नतीजे देखने के बाद लगता है भारत जोड़ो वाली यात्रा में कांग्रेस की स्ट्राइक रेट 66% रही है। यानि यह प्रथम श्रेणी से भी ज्यादा अंक से पास हुई है। 2018 में यहां पार्टी सिर्फ 15 सीटें जीती थी। बाकी 17 पर भाजपा और 2 अन्य के पास गई थी।
कर्नाटक में इस बार हुआ रिकॉर्ड मतदान
कर्नाटक के चुनाव परिणाम कुछ एग्जिट पोल के नतीजों की तरह ही आए हैं। इस बार राज्य में वोटिंग का सारा रिकॉर्ड टूट गया था और 73% वोटिंग हुई था। राज्य में इतनी ज्यादा वोटिंग विधानसभा चुनावों में कभी नहीं हुई थी।
2018 में दूसरे नंबर पर रही थी कांग्रेस
2018 में कांग्रेस दूसरे नंबर की पार्टी बनकर उभरी थी। सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी बनी थी। लेकिन, कांग्रेस ने जेडीएस के साथ गठबंधन करके सरकार बनाई थी। हालांकि, यह सरकार स्थायी नहीं रही और विधायकों के पाला बदलने के चलते गिर गई।
स्थानीय मुद्दों पर कांग्रेस ने किया फोकस
बाद में कांग्रेस और जेडीएस से कुछ विधायक इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हुए। उपचुनावों में जीत के माध्यम से वह फिर से विधानसभा पहुंचे और बीजेपी की सरकार बन गई। इस बार के चुनाव में कांग्रेस ने स्थानीय मुद्दों पर फोकस किया था।
कांग्रेस ने भ्रष्टाचार को भी बनाया मुद्दा
कांग्रेस ने बीजेपी पर भ्रष्टाचार के भी गंभीर आरोप लगाए थे और राज्य सरकार को 40% वाली सरकार के नाम से बुलाती रही थी। चुनावों में उसने वोटरों से पांच गारंटी का भी वादा किया था। चुनाव परिणाम साबित करते हैं कि उसकी गारंटी वोट की गारंटी में तब्दील हुई है।
कांग्रेस ने घोषणापत्र में बजरंग दल पर बैन को भी मुद्दा बनाया था। हालांकि, बाद में पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता इससे कन्नी काटते नजर आए। भाजपा ने कांग्रेस के इस कदम को हाथों-हाथ लिया था और भगवान बजरंग बली के नाम को चुनावों में भुनाने की कोशिश की थी।












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