Karnataka: कांग्रेस में सियासी सुलह? सज गई की टेबल, DK शिवकुमार के घर पहुंचे CM सिद्धारमैया, खत्म होगी कलह
Karnataka Congress: बेंगलुरु में कांग्रेस सरकार के भीतर कई महीनों से सीएम कुर्सी को लेकर चल रही खींचतान के बीच एक बार फिर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की मुलाकात हुई। समाचार एजेंसी PTI के अनुसार, CM सिद्धारमैया 2 दिसंबर को DK शिवकुमार के निवास पर ब्रेकफास्ट के लिए गए जहां दोनों नेताओं ने एक ही टेबल पर बैठ कर नाश्ता किया।
इसे पार्टी के भीतर जारी तनाव कम करने की कोशिश और दोनों नेताओं के बीच सत्ता संतुलन बनाए रखने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले 29 नवंबर को डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास पहुंचे थे, जहां दोनों नेताओं ने नाश्ता किया था। यह बैठक कांग्रेस हाईकमान के निर्देश पर आयोजित की गई थी।

एक और मुलाकात...
इससे पहले समय दोनों नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि "कोई भ्रम नहीं है, हम एकजुट हैं।" लेकिन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बयान ने इस मुलाकात पर फिर सवाल खड़े कर दिए। हालांकि, जब उनसे पूछा गया था कि वह डीके शिवकुमार के घर जाएंगे या नहीं, उन्होंने कहा-उन्होंने कहा था कि मंगलवार (2 नंवबर) को आना, और चले गए। लेकिन अभी तक मुझे कोई कॉल नहीं आया है। शायद वे कॉल करें। अगर बुलाया गया तो मैं चला जाऊंगा। उनका यह बयान फिर से कर्नाटक की राजनीति में हलचल बढ़ाने वाला साबित हुआ है।
हाईकमान की सख्त निगरानी
दोनों नेता बार-बार यह कह चुके हैं कि वे पार्टी हाईकमान के फैसले का पालन करेंगे। कांग्रेस केंद्र नेतृत्व ने हाल ही में दोनों के बीच चल रही तनातनी को शांत करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाई है। सूत्रों का कहना है कि यह मुलाकात 8 दिसंबर से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र से पहले एक सकारात्मक संदेश देने की रणनीति का हिस्सा है। हाईकमान यह दिखाना चाहती है कि सरकार स्थिर है और नेतृत्व में कोई तात्कालिक बदलाव नहीं होने जा रहा।
बता दें कि, कर्नाटक में सिद्धारमैया सरकार ने 20 नवंबर को अपने 5 साल के कार्यकाल का आधा सफर पूरा किया। इसके बाद से ही राज्य में "पावर-शेयरिंग फॉर्मूला" की अटकलें तेज हो गई थीं। कहा जा रहा था कि 2023 विधानसभा चुनाव से पहले सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच सत्ता के बंटवारे पर एक 'अनौपचारिक सहमति' बनी थी। इसी वजह से बीते कुछ हफ्तों में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा जोर पकड़ गई थी, जिससे कांग्रेस हाईकमान को सक्रिय होना पड़ा।
क्या सियासी तनाव कम होगा?
आने वाले दिनों में एक और ब्रेकफास्ट मीटिंग दोनों नेताओं की एकजुटता का संदेश दे सकती है। हालांकि सिद्धारमैया के सोमवार के बयान ने संकेत दिया है कि अभी भी सब कुछ पूरी तरह सहज नहीं है। फिर भी, हाईकमान की रणनीति साफ है फिलहाल नेतृत्व में कोई बड़ा बदलाव नहीं,सरकार स्थिर दिखाई दे।












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