Karnataka: 4 बार CM रहे येदियुरप्पा ने बचपन में नींबू बेचकर परिवार को संभाला था, जानिए उनके बारे में

बेंगलुरु, 26 जुलाई: 78 वर्षीय बीएस येदियुरप्पा को कर्नाटक का बहुत ही ताकतवर लिंगायत नेता माना जाता है। उनका सामाजिक जीवन गरीबी में ही शुरू हुआ और वे सिर्फ 15 साल के थे, जब वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ गए। उनका यही रास्ता आगे बढ़ा और उनका राजनीतिक सफर उनके जनसंघ में शामिल होने के साथ शुरू हुआ। 1970 के दशक के शुरुआती वर्षों में ही वे शिवमोगा जिले के अपने होमटाउन शिकारीपुरा तालुक के जनसंघ अध्यक्ष बन गए। चुनावी राजनीति में उनकी एंट्री शिकारीपुरा के पुरासभा अध्यक्ष बनने के साथ हुई। इमरजेंसी के दौरान वो जेल भी गए। लेकिन, उनका बचपन और उनके जवानी के दिन संघर्ष से भरे रहे हैं।

2004 के चुनाव में पहली बार दिखा उनका सियासी कद

2004 के चुनाव में पहली बार दिखा उनका सियासी कद

येदियुरप्पा पहली बार 1983 में शिकारीपुरा विधानसभा सीट से चुनाव जीते और वहां से 8 बारे विधायक चुने जा चुके हैं। वो प्रदेश भाजपा अध्यक्ष, विधानसभा में नेता विपक्ष, विधान पार्षद और लोकसभा के सांसद भी रह चुके हैं। कर्नाटक से लेकर दिल्ली तक भाजपा की राजनीति में उनकी धमक पहली बार तब महसूस हुई, जब 2004 में बीजेपी वहां सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। हालांकि, कांग्रेस और जेडीएस में गठबंधन हो जाने की वजह से वह मुख्यमंत्री बनते-बनते चूक गए। दो साल बाद 2006 में येदियुरप्पा ने जेडीएस के कुमारस्वामी के साथ हाथ मिलाया तो कांग्रेस की अगुवाई वाली धरम सिंह सरकार गिर गई। रोटेशनल सीएम पर बीजेपी और जेडीएस में करार हुआ और कुमारस्वामी सीएम बने और येदियुरप्पा उनके डिप्टी।

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    जब भ्रष्टाचार के मामले में जेल गए येदियुरप्पा

    जब भ्रष्टाचार के मामले में जेल गए येदियुरप्पा

    उसी करार के तहत 2007 के नवंबर में येदियुरप्पा पहली बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने, लेकिन सात दिन में ही उनकी सरकार गिर गई, क्योंकि अपनी बारी आते ही कुमारस्वामी रोटेशनल सीएम वाले करार से मुकर गए। खैर, उसका परिणाम ये हुआ कि 2008 के चुनाव में पहली बार दक्षिण में भगवा लहराया और वहां भाजपा की सरकार बनी, जिसमें वह फिर से मुख्यमंत्री बने। सीएम बनते ही उनपर पद का दुरुपयोग करते हुए अपने बेटों के लिए बेंगलुरु में जमीन आवंटित करने के आरोप लगे। आखिरकार 31 जुलाई, 2011 को तब उन्हें इस्तीफा देना पड़ गया जब गैरकानूनी खनन घोटाले में लोकायुक्त ने उन्हें आरोपी बनाया। इस मामले में उन्हें एक हफ्ते तक जेल की भी हवा खानी पड़ी।

    भाजपा से हुए बाहर तो फिर कैसे हुई एंट्री ?

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    इस विवाद के बाद येदियुरप्पा ने भाजपा छोड़ दिया और कर्नाटक जनता पक्ष के नाम से अपनी पार्टी बनाई। 2013 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी सिर्फ 6 सीट और 10 फीसदी वोट ला सकी, लेकिन भाजपा की उम्मीदों पर भी पानी फिर गया। येदियुरप्पा को आगे सियासी अंधेरा दिख रहा था और भाजपा को नेता की तलाश थी। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले दोनों ने फिर से हाथ मिलाया और जनवरी में कर्नाटक जनता पक्ष का बीजेपी में विलय हो गया। लोकसभा चुनाव में बीजेपी वहां 28 में से 19 सीटें जीत गई। 2016 में उन्हें बहुत बड़ी राहत मिली जब स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने उन्हें, उनके दोनों बेटों और दामाद को 40 करोड़ रुपये के माइनिंग स्कैम में बरी कर दिया, जिसने 2011 में उनकी कुर्सी ले ली थी। कर्नाटक हाई कोर्ट पहले ही लोकायुक्त पुलिस में दर्ज उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के सभी 15 एफआईआर को रद्द कर चुका था। इसके बाद उन्हें चौथी बार प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया।

    कार्यकाल से दो साल पहले छोड़ दिया है मुख्यमंत्री पद

    कार्यकाल से दो साल पहले छोड़ दिया है मुख्यमंत्री पद

    2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें फिर से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया। 225 सदस्यों वाली विधानसभा में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर जरूर उभरी, लेकिन बहुमत से कुछ कदम पीछे छूट गई। हालांकि, सबसे बड़े दल के नेता के रूप में गवर्नर ने उन्हें सीएम बनाकर बहुमत साबित करने का मौका दिया। लेकिन, चुनावों में हारी कांग्रेस ने जेडीएस के साथ हाथ मिला लिया और येदियुरप्पा ने सदन में बहुमत साबित करने से पहले ही इस्तीफा दे दिया। इसबार वो सिर्फ 3 दिन तक सीएम रहे। एक साल बाद फिर बाजी पलटी। कई कांग्रेसी विधायकों के विधानसभा से इस्तीफा देने की वजह से कांग्रेस गठबंधन सरकार अल्पमत में आ गई। येदियुरप्पा को फिर से मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला। लेकिन, अब कार्यकाल से दो साल पहले उन्होंने खुद ही पद छोड़ने का फैसला कर लिया है।

    बचपन में नींबू बेचा, हेल्पर और क्लर्क का काम किया

    बचपन में नींबू बेचा, हेल्पर और क्लर्क का काम किया

    चार-चार बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद पर रहे बीएस येदियुरप्पा आज की तारीख में प्रदेश की सबसे बड़ी राजनीतिक शख्सियतों में शामिल हैं। लेकिन, उनका जीवन हमेशा से ऐसा नहीं था। वह बहुत ही गरीब परिवार में पैदा हुए। उनके जीवन ने तब उनके साथ सबसे क्रूर मजाक किया जब बचपन में ही मां गुजर गईं। मुफलिसी के मारे येदियुरप्पा ने परिवार की मदद के लिए नींबू बेचे। बड़े हुए तो फैक्ट्री में हेल्पर का काम किया और फिर एक राइस मिल में क्लर्क की नौकरी भी की। कुछ समय तक वे सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट में भी क्लर्क रहे। राइस मिल में नौकरी के दौरान ही उनकी शादी मिल के मालिक की बेटी मैत्रादेवी के साथ हुई। कुछ समय तक उन्होंने शिवमोगा में एक हार्डवेयर की दुकान भी चलाई। येदियुरप्पा और मैत्रादेवी के दो बेटे और तीन बेटियां हैं।

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