Opposition meet के बीच कर्नाटक में कांग्रेस को बड़ा झटका, किसानों के मुद्दे पर BJP-JDS की बड़ी जीत

मंगलवार को एक तरफ बेंगलुरु में जहां देश की 26 विपक्षी पार्टियां बीजेपी और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ चुनावी रणनीति बनाने के लिए जुटी थीं तो दूसरी तरफ राज्य विधान परिषद में कांग्रेस की मौजूदा सरकार की किरकिरी हो रही थी।

कर्नाटक विधान परिषद में कांग्रेस सरकार कृषि उत्पाद बाजार समिति (विनियमन एवं विकास) सशोधन विधेयक पास करा पाने में नाकाम हो गई। बीजेपी और जेडीएस ने सिद्दारमैया सरकार के मंसूबों पर पानी फेर दिया है और आखिरकार उसे सदन की समिति में भेजने के लिए मजबूर होना पड़ गया।

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एपीएमसी संशोधन विधेयक पर कांग्रेस की हार
विपक्षी विधान पार्षदों ने विधेयक को विधानसभा की समिति में समीक्षा के लिए भेजने पर जोड़ दिया और वोटों के विभाजन के लिए दबाव बनाया। कांग्रेस के पास कर्नाटक विधान परिषद में बहुमत का अभाव है, लिहाजा उसे 21 के मुकाबले 31 वोटों से हार का सामना करना पड़ा, जिसे सत्ताधारी दल के लिए बहुत बड़ी फजीहत माना जा रहा है।

किसानों के लिए सिर्फ एपीएमसी में ही उत्पाद बेचने का प्रावधान
कर्नाटक के मंत्री शिवानंद पाटिल ने विधान परिषद में जो एपीएमसी में संशोधन विधेयक पेश किया उसमें प्रदेश के किसानों को सिर्फ कृषि उत्पाद बाजार समिति में ही अपने फसल बेचने की अनुमति है। सरकार ने विपक्ष से समर्थन की मांग करते हुए कहा कि केंद्र सरकार भी अपना कानून वापस ले चुकी है। इसपर तीन घंटे बहस चली और विपक्ष ने दावा किया कि सरकार इस गंभीर मसले पर बहुत ही जल्दबाजी दिखा रही है।

सरकार ने दिए केंद्र की ओर से कानून वापसी की दलील
विपक्ष चाहता था कि विधेयक के विश्लेषण के लिए इसे सदन की समिति में भेजा जाए, तबकि सरकार की दलील थी कि विपक्षी सदस्यों के जो भी सुझाव होंगे उन्हें वह उस बिल में शामिल करने के लिए तैयार है। पाटिल का तर्क था, 'बीजेपी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार खुद कानून वापस ले चुकी है और इसे कर्नाटक में रखने का कोई मतलब नहीं है।' लेकिन, विपक्ष संयुक्त रूप से विधेयक को समिति में भेजने के लिए अड़ गया और उसे सरकार के 21 वोट के मुकाबले 31 वोटों से जीत मिल गई।

बीजेपी ने बिल को बताया किसान-विरोधी
वोटिंग से पहले बीजेपी के विधान पार्षदों ने दावा किया, 'विधेयक पूरी तरह से सरकार के किसान-विरोधी स्टैंड के साथ-साथ इन बाजारों के बिचौलियों के नेटवर्क को उजागर करता है। किसान अपने उत्पादों को कहीं भी बेचने के अपने अधिकार को खो देंगे। ' इसके जवाब में मंत्री ने कहा, 'उत्तर प्रदेश और गुजरात को छोड़कर अन्य सभी राज्यों ने इस कानून को रद्द कर दिया है। कानून के उद्देश्यों के उलट, किसानों को न तो अच्छी कीमत मिल पा रही है और न ही उनकी आय दोगुनी हो रही है।'

सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि 'एपीएमसी बंद होने के कगार पर हैं। हमने अपने घोषणा पत्र में इसे प्राथमिकता के तौर पर रखा है और उसी के अनुसार बिल को सदन के पटल पर रखा गया।' लेकिन, विपक्ष के संख्या बल के सामने कांग्रेस की सिद्दारमैया सरकार को कम से कम अभी तो घुटने टेकने पर मजबूर हो जाना पड़ा है।

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