Kargil War: कहानी कारगिल वॉर के उस योद्धा की, जो पाकिस्तान में जा घुसा था, दी थी प्राणों की आहुति
25 Years of Kargil War: कारगिल वॉर को 25 साल हो गए हैं। भारतीय सेना ने पाकिस्तान के नापाक मंसूबों को ध्वस्त करते हुए 1999 कारगिल फतेह किया था। लेकिन इस युद्ध में हमारे एक ऐसे वीर योद्धा ने अपने प्राणों की आहुति दी थी, जिनकी शहादत की कहानी सुनकर आज भी कलेजा कांप उठेगा।
हालांकि हमारी सैनिकों के साथ बर्बरता करने के मामले में पाकिस्तान का रिकॉर्ड हमेशा से खराब रहा है। क्योंकि उसने हर जंग में मुंह की खाई है, लेकिन 27 मई 1999 को कारगिल में संघर्ष के दौरान स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा पहले जांबाज थे, जिन्होंने शहादत दी थी।

उस दिन यानी 27 मई, 1999 को स्क्वाड्रन लीडर आहूजा ने अपने कर्तव्य से परे जाकर फ़्लाइट लेफ्टिनेंट के. नचिकेता को बचाने पाकिस्तान में घुस गए थे। हालांकि वो नचिकेता के तरह सुरक्षित भारत ने लौटे थे। जानिए क्या हुआ वो खौफनाक मंजर?
दरअसल, कारगिल युद्ध के दौरान वायुसेना ने ऑपरेशन सफेद सागर लॉन्च किया था, जिसका मकसद एलओसी पर पाकिस्तानी सेना की स्थिति का पता लगाना था। वायुसेना की भटिंडा स्थित गोल्डन-एरोज स्क्वाड्रन में अजय आहूजा फ्लाइट कमांडर थे, सेना ने उन्हें पाकिस्तानी सेना की स्थिति का जानकारी पता लगाने की जिम्मेदारी सौंपी थी।
लेफ्टिनेंट नचिकेता के लिए पाकिस्तान में घुसे
वो मिग-21 में सवार होकर अपने काम को अंजाम देने निकले थे, लेकिन इस बीच उन्हें जानकारी मिली कि फ्लाइट-लेफ्टिनेंट नचिकेता को अपना विमान छोड़ना, उन्हें पता चला कि नचिकेता पाकिस्तानी सीमा में हैं और वहां उन्हें खोजने जाना जोखिम भरा हो सकता है, लेकिन फिर भी उन्होंने कुछ नहीं सोचा और उनका पता लगाने के लिए पाक सीमा में घुस गए।
पाकिस्तान ने की बर्बरता
इस बीच एक मिसाइल उनके विमान में लगी, जिसके बाद मिग-21 में आग लगने के बाद उतर गए और पाकिस्तानी सीमा में घुसे। इसके बाद पाक सैनिकों ने उनको पकड़ लिया और यातनाएं दी। स्क्वॉड्रन लीडर आहूजा को पाकिस्तानी सेना के जवानों ने जमीन पर निर्ममता से मार डाला, जिससे वे कारगिल संघर्ष (मई से जुलाई 1999) में भारतीय वायुसेना के पहले शहादत पाने वाले बने। उन्हें मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया, जो तीसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है। हालांकि, फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता को कुछ दिनों बाद भारत वापस भेज दिया गया।












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