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Vikram Batra-Dimple Cheema: 40 दिन का प्यार बन गया 7 जन्मों का साथ,अनोखी है कारगिल के 'शेरशाह' की लवस्टोरी

Vikram Batra-Dimple Cheema Love Story: 'जिस्म से तो सभी मोहब्बत करते हैं कोई रूह से इश्क करे तो कुछ बात हो, जीते जी तो सब एक दूसरे पर मरते हैं, मरने के बाद कोई किसी पर मरे तो कुछ बात हो '

ये लाइनें पढ़नें में जितनी अच्छी हैं, उससे कहीं ज्यादा आज के दौर वालों को असंभव लगेगीं और वो कहेंगे कि ऐसा सिर्फ किताबों में होता है, सच्चाई में ना तो ऐसा प्यार होता है और ना ही ऐसी मोहब्बत।

Captain Vikram Batra

लेकिन कारगिल हीरो विक्रम बत्रा और उनकी प्रेमिका डिंपल चीमा के प्यार ने इन लाइनों को हकीकत का जामा पहनाया और वो दुनिया के लिए मिसाल बन गए। इन दोनों की प्रेम कहानी मुक्कमल भी है और अधूरी भी।

बात-बात पर Whatsappp और फेसबुक पर ब्रेकअप करने वाले लोगों को शायद इनका प्यार बेमानी और पागलपन लगेगा लेकिन सच यही है कि इन दोनों को मौत भी जुदा नहीं कर पाई, दोनों के शरीर तो दूर हुए लेकिन दिल आज भी एक-दूसरे के लिए धड़कता है।

विक्रम बत्रा और डिंपल चीमा की पहली मुलाकात कॉलेज में हुई

कारगिल के शहंशाह और पाकिस्तानियों के दांत खट्टे करने वाले विक्रम बत्रा और डिंपल चीमा की पहली मुलाकात साल 1995 में कॉलेज में हुई में हुई थी, पहली नजर में ही बत्रा का दिल सीधी-सादी और सादगी पसंद डिंपल पर आ गया था, दोनों में दोस्ती हुई, जो कि जल्द ही प्यार में बदल गई, दोनों ही एक-दूसके के व्यक्त्तित्व से प्रभावित थे।

'4 साल में सिर्फ 40 दिन का प्यार बन गया 7 जन्मों का साथ'

डिंपल और विक्रम ने साथ में मात्र 40 दिन साथ बिताया और इन चालीस दिनों में उन्होंने 7 जन्म का प्रेम जी लिया था। विक्रम ने डिंपल से वादा किया था कि वो कारगिल फतेह करके तिरंगे के साथ वापस आएंगे और वो वादा उन्होंने निभाया भी लेकिन फर्क सिर्फ इतना था कि वो तिरंगे के साथ नहीं बल्कि तिरंगे में लिपटकर आए।

Captain Vikram Batra

'सच तो ये है कि मैं तो उससे कभी अलग हो ही नहीं पाई'

बत्रा के जाने के बाद डिंपल ने उनकी यादों के सहारे ही जिंदा रहने का प्रण किया और वो आज भी उस वचन के साथ जी रही हैं। अपने कई इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि 'मुझे बहुत सारे लोगों ने कई बार कहा कि मैं शादी कर लूं, अकेले जीवन नहीं कटता लेकिन सच तो ये है कि मैं तो उससे कभी अलग हो ही नहीं पाई।'

'आज भी शाम सात बजे उसके फोन का इंतजार रहता है...'

'मुझे आज भी शाम सात बजे ऐसे लगता है कि उसका कॉल आएगा और जैसे ही मैं फोन उठाऊंगी वो उधर से बोलेगा- 'हे सुंदरी, मेरा ही इंतजार था ना, मुझे ही याद कर रही थी?'

विक्रम ने ब्लेड से अपनी उंगली काटकर मेरी मांग भरी थी

डिंपल ने ये भी कहा था कि 'विक्रम के आर्मी में जाने और मेरी पढ़ाई खत्म होने के बाद घरवाले मुझ पर शादी का दवाब बना रहे थे, मैं बार-बार उन्हें टाल रही थी। जब विक्रम उन दिनों मुझसे मिलने आया था तो हम मंसा देवी गए, वहां पर मैंने उसे अपने घरवालों की बात बताई तो उसने वहीं पर ब्लेड से अपनी उंगली काटकर मेरी मांग भर दी थी और कहा था कि अब तुम मेरी हो और हमेशा मेरी रहोगी।'

'चार फेरे आज हो गए तीन वापस लौटकर लूंगा...'

इसके बाद जब मैं आंख बंदकर मंदिर में परिक्रमा कर रही थी तो उसने मेरी चु्न्नी पक़ड़कर मंदिर के चार फेरे लिए थे, मैंने जब आंख खोली तो उसने कहा कि 'चार फेरे आज हो गए तीन वापस लौटकर लूंगा।'

आज भी बत्रा की यादों के साथ जी रही हैं डिंपल चीमा

हालांकि बत्रा के परिवार वालों ने भी चीमा से कई बार कहा कि वो लाइफ में आगे बढ़ें लेकिन डिंपल नहीं मानी। आज वो हिमाचल के एक स्कूल में शिक्षिका बनकर बच्चों को पढ़ा रही हैं और एकाकी जीवन जी रही हैं।

बत्रा को 15 अगस्त 1999 को 'परमवीर चक्र' से सम्मानित किया गया था

आपको बता दें कि पाकिस्तान को कारगिल युद्ध में अपनी बहादुरी से तार-तार करने वाले पालमपुर के वीर सिपाही कैप्टन विक्रम बत्रा ने 7 जुलाई 1999 को वीरगति प्राप्त की थी। अपनी वीरता से मात्र 24 साल की उम्र में ही सबको अपना दीवाना बना देने वाले इस वीर योद्धा को 15 अगस्त 1999 को 'परमवीर चक्र' से सम्मानित किया गया था।

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