कालिखो पुल की पत्नी ने सीबीआई जांच की मांग के लिए सीजेआई को लिखी चिट्ठी वापस ली
पुल की पत्नी ने कहा था कि सुसाइड नोट में लगाये गये आरोपों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज किया जाना जरूरी है और मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए।
नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कालिखो पुल की पत्नी ने उनके सुसाइड नोट पर सीबीआई जांच की मांग को लेकर चीफ जस्टिस को लिखी चिट्ठी वापस ले ली है। कालिखो की पत्नी दंगविमसाई ने सीजीआई को चिट्टी लिखकर पति की आत्महत्या से पहले छोड़े गए सुसाइड नोट को लेकर जांच की मांग की थी।


दंगविसमाई ने की थी एफआईआर की मांग
मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है लेकिन दंगविसमाई ने अब अपनी मांग ही वापस ले ली है। पुल ने पिछले साल आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने 60 पेज का एक सुसाइड नोट अपने पीछे छोड़ा था। भारत के प्रधान न्यायाधीश को लिखे पत्र में पुल की पत्नी ने कहा था कि सुसाइड नोट में लगाये गये आरोपों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज किया जाना जरूरी है और मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए क्योंकि सर्वोच्च स्तर पर न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार के प्राथमिक आरोप हैं।

बीते सप्ताह सार्वजनिक की थी सुसाइड नोट की कॉपी
पुल की पत्नी ने पिछले सप्ताह यहां एक संवाददाता सम्मेलन में सुसाइड नोट की प्रति सार्वजनिक की थी। कालिखो की पत्नी ने कहा था कि हम मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच चाहते हैं और दोषियों पर कानूनसम्मत कार्रवाई की मांग करते हैं। उन्होंने परिवार को धमकियां मिलने की भी बात कही थी। अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कालिखो पुल ने पिछले साल 9 अगस्त को आत्महत्या कर ली थी।

कालिखो ने छोड़ा था 60 पेज का सुसाइड नोट
कालिखो ने अपनी मौत से पहले 60 पन्नों का एक सुसाइड लेटर लिखा था जिसमें कई सीनियर जजों पर गंभीर आरोप लगाए थे। इनमें से दो जज रिटायर हो चुके हैं, जबकि दो अभी सेवा में हैं। इस सुसाइड नोट में पुल ने बीजेपी और कांग्रेस के नेताओं पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। ऐसे में उनके सुसाइड नोट को लेकर जांच की मांग उनकी पत्नी ने की थी।

दो जजों की पीठ के पास है मामला
न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति यू यू ललित की पीठ ने दांगविमसाई पुल के पत्रा को याचिका के तौर पर स्वीकार किया। पीठ पूर्व मुख्यमंत्री पुल के कथित सुसाइड नोट में लगाये गये आरोपों और उनकी मौत के मामले में जांच की याचिका पर सुनवाई आज करेगी। आज ही दो न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए ये मामला आना था।












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