जो फूलपुर और गोरखपुर में मायावती ने किया था वो कैराना में क्यों नहीं?

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    Kairana Bypoll: Mayawati ने अभी तक नहीं चला पुराना दांव । वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। गोरखपुर और फूलपुर उप चुनाव की तरह बसपा प्रमुख मायावती ने अपनी दलित वोटरों को अभी तक कोई संदेश जारी नहीं किया है कि वह 28 मई को कैरान सीट पर होने वाले उपचुनाव में किसे वोट डालेंगे। हालांकि, कर्नाटक में एचडी कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में वरिष्ठ कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष अजीत सिंह के साथ मंच साझा करते हुए देखी गई थी। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह भविष्य में किसके साथ रहने वाली हैं।

    कार्यकर्ताओं को पार्टी सुप्रीमो मायावती के ऑर्डर का इंतजार

    कार्यकर्ताओं को पार्टी सुप्रीमो मायावती के ऑर्डर का इंतजार

    इसके अलावा, हाल ही में सहारनपुर में दलितों और ठाकुरों के बीच जाति हिंसा, उस हिंसा के संबंध में भीम सेना प्रमुख चंद्रशेखर की गिरफ्तारी, अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश और दलित युवाओं की गिरफ्तारी के संबंध में 2 अप्रैल को हिंसक आंदोलन वोटों का धुव्रीकरण करेगा। स्थानीय लोगों के मुताबिक दलित कैराना में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस समर्थित आरएलडी उम्मीदवार के पक्ष में मतदान कर सकते हैं। हालांकि अभी तक बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के कार्यकर्ताओं को पार्टी सुप्रीमो मायावती के ऑर्डर का इंतजार है।

     कैराना लोकसभा सीट पर 2.5 लाख दलित वोटर

    कैराना लोकसभा सीट पर 2.5 लाख दलित वोटर

    गोरखपुर और फूलपुर उपचुनावों में बीएसपी ने सपा उम्मीदवार को लेकर खुला समर्थन कर दिया था। यहीं बसपा नेताओं ने सपा के पक्ष में वोट करने की भी अपील की थी। लेकिन कैरान उप चुनाव में बसपा की ओर से अभी तक कोई भी अपील जारी नहीं की गई है। इससे पहले मायावती अपने पार्टी वर्कर्स से कह चुकी हैं कि वे 2019 के लोकसभा चुनावों की तैयारी करें। कैराना लोकसभा सीट पर 2.5 लाख दलित वोटर हैं। इनमें अधिकतर जाटव हैं। जो मायावती का पारंपरिक वोट बैंक है।

    सीएम योगी ने फिर जगाया जिन्ना का जिन

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    वहीं कैराना लोकसभा में 5.5 लाख वोटर हैं, जो बीएसपी से एमपी रह चुकीं तबस्सुम बेगम को सपोर्ट करता है अगर दलित और मुस्लिम वोट एक साथ आ जाते हैं तो यह एक बेहद खतरनाक संयोजन है। तबस्सुम फिलहाल रोदल के चुनाव चिंह पर लड़ रही हैं। उन्हें कांग्रेस और सपा का समर्थन प्राप्त है। कैराना का सियासी संग्राम बहुत ही कठिन दौर में है। बीजेपी जाट और दलित नेताओं को मानने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। इसके लिए पार्टी ने योगी आदित्यनाथ को कमान सौंपी हुई है। हाल ही योगी आदित्यनाथ ने दलित और जाटों को अपने पक्ष में करने के लिए मुजफ्फरनगर दंगों और मोहम्मद अली जिन्ना का मुद्दा उठाया था।

    अभी भी 2 मई की हिंसा का असर है कैराना में

    अभी भी 2 मई की हिंसा का असर है कैराना में

    2 अप्रैल को भारत बंद के दौरान हिंसा के मामलों में निर्दोष युवाओं को पकड़ा गया था। वे अभी भी जेल में हैं। कैराना में नाकुर विधानसभा क्षेत्र के ढक्कदेई गांव के सुनील कुमार ने कहा कि सहारनपुर जिले के नाकुर और गंगोह विधानसभा क्षेत्रों कैराना लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में आते हैं। यहां पर दलितों की सबसे ज्यादा आबादी है।

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