राज्यसभा में पास जुवेनाइल जस्टिस बिल, जघन्य अपराध में नाबालिग की उम्र घटकर 16 साल
नयी दिल्ली (ब्यूरो)। निर्भया गैंगरेप केस के नाबालिग दोषी की रिहाई के बाद अब जो हालत बने हैं उससे साफ जाहिर हो रहा था जुवेनाइल जस्टिस बिल राज्य सभा में आज पेश हो जाएगा। और हुआ भी ऐसा ही। जुवेनाइल जस्टिस बिल लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी पास हो गया। इस बिल में जघन्य अपराधों के लिए नाबालिग की उम्र सीमा 18 से घटाकर 16 कर दिया गया है।
लोकसभा मे मई 2015 को ही पास हो गया था बजट
बता दें कि लोकसभा में यह बिल मई 2015 में पास कर दिया था। लेकिन, राज्यसभा में हंगामे की वजह से इसे पेश नहीं किया जा सका था। नए बिल में कहा गया है कि रेप, मर्डर और एसिड अटैक जैसे खतरनाक अपराधों में शामिल नाबालिगों को बालिग माना जाए। गंभीर अपराध करने वाले नाबालिगों पर केस आम अदालतों में और बालिगों के लिए कानून के मुताबिक ही चलेगा।
निर्भया के माता-पिता भी रहे मौजूद
निर्भया के माता-पिता भी इस बिल पर बहस के दौरान राज्यसभा में मौजूद रहे। इससे पहले वे संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी से भी मिले थे। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि अब यह बिल संसद से पास हो जाएगा।
निर्भया केस पर नहीं पड़ेगा फर्क
बिल पास होने का असर निर्भया केस पर नहीं पड़ेगा. लेकिन, आने वाले समय में ऐसे दूसरे अपराधी आसानी से नहीं छूट सकेंगे। मौजूदा कानून के मुताबिक अगर कोई नाबालिग संगीन अपराध में दोषी होता है तो उसे तीन साल तक बाल सुधार गृह में रखा जाता है और उसके बाद उसे रिहा कर दिया जाता है। तस्वीरें: राखी पर रोते उन भाईयों की कहानी जिनकी बहनें हुईं हैवानियत की शिकार
2014 में नाबालिगों के खिलाफ दर्ज हुए 38,565 केस
नाबालिग की उम्र बदलने की कितनी जरूरत है, यह इसी से पता चलता है कि 2014 में नाबालिगों के खिलाफ देशभर में 38,565 केस दर्ज हुए है। यह जानकारी गृह राज्यमंत्री ने लोकसभा में दी। इनमें भी 56 फीसदी मामले उन नाबालिगों के खिलाफ दर्ज किए गए जिनके परिवार की मासिक आय 25 हजार रुपये तक है।













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