भारत के अगले CJI जस्टिस यूयू ललित बोले- 'फैसलों की आलोचना हो, लेकिन....'
नई दिल्ली, 15 अगस्त: देश के अगले चीफ जस्टिस उदय उमेश ललित ने कहा है कि लोकतंत्र में न्यायपालिका, जजों और उसके फैसलों की आलोचना स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है, लेकिन इसकी भी सीमा होनी चाहिए। जस्टिस ललित ने न्यायपालिका से संबंधित कई बातों पर अपने विचार रखे हैं। वह 27 अगस्त को सीजेआई जस्टिस एनवी रमना की जगह भारत के मुख्य न्यायाधीशन बनने जा रहे हैं। उनका कार्यकाल सिर्फ 74 दिनों को रहेगा। उन्होंने जजों की नियुक्ति प्रक्रिया में कॉलेजियम सिस्टम की जमकर सराहना की है, लेकिन नियुक्ति में ज्यादा पारदर्शिता के खिलाफ हैं।
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'परस्पर-विरोधी विचारों ने न्यायपालिका का पूरा पहिया अस्त-व्यस्त कर दिया है'
भारत के अगले सीजेआई जस्टिस यूयू ललित ने कहा है कि न्याय की प्रक्रिया तेज, जल्द और फौरन होनी चाहिए। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि किसी भी न्यायिक प्रणाली की पहचान उसमें स्पष्टता और निरंतरता होती है। वो बोले- 'परस्पर-विरोधी विचारों ने न्यायपालिका का पूरा पहिया अस्त-व्यस्त कर दिया है।' देश के अगले चीफ जस्टिस का कहना है कि 'सभी लंबित मुद्दों को तेजी से और प्रभावी तरीके से निपटाने की आवश्यकता है। यह सुप्रीम कोर्ट का काम है कि संविधान की व्याख्या करे और कानून की रक्षा करे। लंबित मुद्दों पर हम जितनी तेजी से काम करेंगे, यह उतना ही अच्छा होगा।'
आलोचनाओं की सीमा की वकालत
जस्टिस ललित ने साफ कहा है कि संवैधानिक मुद्दों को तय करने के लिए संवैधानिक बेंच की स्थापना जल्द से जल्द होनी चाहिए। इस दौरान उन्होंने फैसलों, जजों और यहां तक अदालतों की आलोचनाओं पर भी बात कही है। उनका कहना है, 'आखिरकार हम जनता के सेवक हैं। हम जो भी फैसला लेते हैं, वह जनता के भले के लिए होता है। जनता को यह अधिकार है कि वह हमारे फैसले को देखे कि वह समाज की उम्मीदों के मुताबिक है या नहीं....' लेकिन, इसके साथ ही जस्टिस उदय उमेश ललित ने कहा कि अदालतों, फैसलों की आलोचना स्वस्थ लोकतंत्र का संकेत है, लेकिन इसकी सीमा होनी चाहिए।
कॉलेजियम सिस्टम का समर्थन
जहां तक जनहित जनहित याचिका (पीआईएल) की बात है तो उनका कहना है कि 'पीआईएल तो अपने आप में बहुत ही बेहतरीन आइडिया है।' जस्टिस ललित ने कॉलेजियम सिस्टम की भी सराहना की है और कहा है कि इसकी वजह नियुक्तियों में नियंत्रण और संतुलन में रहा है। उन्होंने बताया, 'कॉलेजियम की सिफारिशों पर कार्यपालिका के साथ हमारा अनुभव कुछ सिफारिशों को छोड़कर, बहुत सकारात्मक और उत्साहजनक रहा है। इस पूरी नियुक्ति प्रक्रिया में सभी एजेंसियां अपना काम कर रही हैं। इसमें कोई संघर्ष नहीं है। यहां नियंत्रण और संतुलन बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने फैसला किया है कि कॉलेजियम सिस्टम बरकरार रहेगा। हमें उस दिशा में काम करना है। कॉलेजियम के सभी अगले सदस्यों को इसी तरह से कार्य करना चाहिए।'
'पारदर्शिता की भी एक सीमा होती है'
जस्टिस ललित का मानना है कि 'पारदर्शिता की भी एक सीमा होती है। नियुक्तियों से संबंधित सारी चीजें सार्वजनिक नहीं की जा सकती।' जस्टिस ललित 27 अगस्त को सीजेआई एनवी रमना की जगह लेंगे। वह देश के 49वें चीफ जस्टिस होंगे। उनका कार्यकाल सिर्फ 74 दिनों का होगा और वे 8 नवंबर को रिटायर हो जाएंगे। जस्टिस ललित देश के ऐसे दूसरे सीजेआई बनने जा रहे हैं, जो सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट के जज बने हैं।












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