जेएनयू हिंसा: दिल्ली पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद आया वीसी का बयान
नई दिल्ली। जेएनयू के वीसी एम जगदीश कुमार ने कहा है कि दिल्ली पुलिस ने हिंसा में शामिल रहे कई लोगों के फोटो जारी किए हैं। हम यह भी चाहते हैं कि जांच की रिपोर्ट आए और जो दोषियों पाए जाते हैं, उन्हें दंडित किया जाए। 5 जनवरी को कैंपस में हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कुछ छात्रों की तस्वीरें और नाम जारी करने के बाद वीसी का ये बयान आया है।

जेएनयू में लेफ्ट के संगठन फीस बढ़ने के खिलाप आंदोलन कर रहे हैं। वीसी ने फीस बढोतरी को लेकर कहा कि कोई सर्विस और यूटिलिटी चार्जेस नहीं है, छात्रों को केवल कमरे का किराया देना होगा जो कि 300 रुपए है। छात्रों से लिया गया पैसा उनको बेहतर सुविधाएं वापस देने के लिए ही उपयोग किया जाएगा।
वीसी एम जगदीश कुमार ने कहा है कि हजारों छात्र शीतकालीन सेमेस्टर परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन कर रहे हैं। जेएनयू प्रशासन बहुत लचीला है और हम छात्रों की सुविधा के लिए सब कुछ कर रहे हैं। माहौल अब एकदम ठीक है, इसलिए छात्र अपने रजिस्ट्रेशन कराएं।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय कैंपस में हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को कुछ तस्वीरें और नाम जारी किए हैं। दिल्ली पुलिस ने बताया है कि 5 जनवरी से कई दिन पहले से कैंपस में हिंसा हो रही थी। जिसमें लेफ्ट से जुड़े संगठनों के लोग शामिल थे। पुलिस के मुताबिक, हमलावर के रूप में 9 लोगों की पहचान हुई है। इनकी तस्वीरें दिल्ली पुलिस ने जारी की है। इसमें जेएनयूएसयू की अध्यक्ष आइश घोष का भी नाम हैं। हालांकि वो खुद हिंसा का शिकार हुई थीं और बुरी तरह से घायल हैं।
डीसीपी (क्राइम) जॉय तिर्की ने बताया है कि जिन लोगों की पहचान की गई है। उनमें- चुनचुन कुमार, पंकज मिश्रा, आईशी घोष (जेएनयूएसयू अध्यक्ष), वास्कर विजय, सुचेता तालुकराज, प्रिया रंजन, डोलन सावंत, योगेंद्र भारद्वाज, विकास पटेल शामिल हैं।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि यूनिटी अगेन्स्ट लेफ्ट नाम के वॉट्सऐप ग्रुप से लोगों को कैंपस में हमला करने के लिए बुलाया गया था। उससे पहले तीन जनवरी को स्टूडेंट फ्रंट ऑफ इंडिया, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स असोसिएशन और डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन के मेंबर्स ने सेंट्रलाइज रजिस्ट्रेशन सिस्टम को रोकने के लिए जबर्दस्ती सर्वर रूम में घुसे और कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया। इसके बाद सर्वर को बंद कर दिया। इसके बाद सर्वर को किसी तरह ठीक किया। 4 जनवरी को फिर उन्होंने सर्वर ठप करने की कोशिश की।












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