जेएनयू की वजह से सुलगती घाटी, शनिवार को रहा बंद
श्रीनगर। 20 दिन पहले जेएनयू में जो कुछ हुआ उसकी तपन कश्मीर घाटी में अभी तक बरकरार है। शनिवार को जेएनयू की वजह से कश्मीर घाटी में अलगाववादियों ने बंद की अपील की है। इस बंद की वजह से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ।

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटीमें अफजल गुरु प्रकरण के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर एस ए आर गिलानी और जेएनयू छात्रों को देशद्रोह के आरोपों में गिरफ्तार किए जाने के खिलाफ इस बंद की अपील की गई थी।
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बंद की वजह से शहर के अहम हिस्से लाल चौक और कई अन्य इलाकों में अधिकतर दुकानें, पेट्रोल पंप और ऑफिस बंद रहे। वहीं सरकारी कार्यालयों में हाजिरी काफी कम रही।
अधिकारियों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट सड़कों पर नजर नहीं आए। हालांकि निजी कारें, टैक्सियां और आटो रिक्शा कई जगहों पर चले।
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उन्होंने बताया कि हुर्रियत कांफ्रेंस और जेकेएलएफ सहित अलगाववादी संगठनों ने गिलानी और जेएनयू छात्रों की गिरफ्तारी के खिलाफ अपील की थी।
इस बीच एक पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि मैसूमा और अन्य पुराने संवेदनशील इलाकों में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और सीआरपीएफ को बड़ी संख्या में तैनात किया गया था।
कट्टरपंथी हुर्रियत कांफ्रेंस अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर के खिलाफ देशद्रोह के आरोप दर्ज किए जाने को 'दिल्ली पुलिस का अनुचित दमन करार' दिया।
आपको बता दें कि इससे पहले भी जेएनयू के मुद्दे पर घाटी में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो चुके हैं।
यहां पर कुछ दिनों पहले कश्मीर की आजादी के नारे लगाए थे। साथ ही साथ पाकिस्तान के झंडों के साथ आईएसआईएस के झंडों के साथ लोगों ने प्रदर्शन किया था।












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