किताबें दिखाती हैं आदर्श भविष्य का रास्ता
बैंगलोर। 'मैं खजानों की खोज के लिए बहुत दूर नहीं जाता, मैं उन्हें खोजने के लिए हर वक्त पुस्तकालय में जाता हूं।' माइकल एंब्री
उपरोक्त विचार 'जना दर्शन' शीर्षक से प्रकाशित एक बैनर पर प्रकाशित था। इसके तहक क्रिस्तु जयंती कॉलेज बैंगलोर द्वारा पुस्तक प्रदर्शनी लगाई थी। लेख की शुरूआत माइकल एंब्री के विचार से होना खुद में यह साबित करता है कि इस सम्मानित कॉलेज के मूल्य क्या हैं।

यह इस बात पर भी प्रकाश डालता है कि किस तरह से प्रबंधन, संकाय और छात्र अपने प्रतिदिन के जीवन में पढ़ने की गंभीरता को कितना बेहतर ढ़ंग से समझते हैं। टिचिंग स्टाफ के एक सदस्य कके अनुसार कॉलेज इस तरह की पुस्तक प्रदर्शनियों का आयोजन करता है ताकि छात्र अवसर का पूरा लाभ उठा सकें।
किताबें होती हैं मददगार
कॉलेज के प्रिंसिपल रेव फादर जोसकुट्टी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि किताबें ईमानदार और आदर्श भविष्य के लिए छात्रों को रास्ता दिखाती हैं। इस दौरान उन्होंने उन प्रकाशकों का शुक्रिया भी अदा किया जो बेहतरीन किताबों के साथ प्रदर्शनी में आए थे। उन्होंने यह भी कहा कि प्रकाशक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से हर उम्र के पाठकों तक ज्ञान के प्रसार का माध्यम बनने का महान काम करते हैं। हालांकि वो किताबें बेचते हैं, यह अंतर के साथ अलग व्यवसाय है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वन इंडिया कन्नड़ के मुख्य संपादक एस.के.शमा सुंदर थे। उनका भाषण छात्रों के लिए महत्वपूर्ण सलाह का माध्यम बना। उन्होंने बेहतर ढ़ंग से सीखने की महत्ता को छात्रों तक पहुंचाया।
शमा ने कहा कि शुद्ध डिजिटल संपादक होना एक सुखद विरोधाभास है। मैं एक पुस्तक प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के लिए बुलाया गया हूं, एक समय था जब मैं किताबी कीड़ा था लेकिन अब मैंने किताबें पढ़ना बंद कर दिया है। मैं वेब के लिए लिखता हूं और मुझ पर हर समय खबरें ब्राउज करने का जूनून सवार रहता है। अगर मुझे कोई किताब लिखनी हो तो मैं आत्मकथा फेसबुक पर लिख सकता हूं या फिर 140 शब्दों में ट्वीटर पर।'

हर तरह की किताब थी मौजूद
पुस्तक प्रदर्शनी में दर्जनों प्रकाशक किताबों के बीच गर्व के साथ मौजूद थे। यहां प्रबंधन से तकनीक, इंजनीयरिंग और ऑर्गेनिक केमेस्ट्री तक की किताबें मौजूद थीं। सक्रिय युवा मन के क्रिस्तु जयंती के चेहरे पर भी किताबें लाने का सुकून दिख रहा था। जब छात्रों को उनके विषय और रुचि से संबंधित किताबें मिली तो उन्होंने भी अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराई।
लाइब्रेरी के संबंध में बात करते हुए प्रमुख लाइब्रेरियन हरीश ने बताया कि 4,000 छात्रों की शैक्षणिक आवश्यकता के लिए 46,000 किताबों का संग्रह है। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि थोड़े ज्ञान के साथ आने वाला छात्र भी लाइब्रेरी में आने के बाद जानकार हो जाएगा।

प्रदर्शनी के दौरान छात्रों ने किताबों के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रदर्शनियों, इलेक्ट्रानिक माध्यमों पर पढ़ने को तो आज के युग की मांग बताया ही साथ ही किताबों के महत्व को नकारा नहीं जा सकता। छात्रों ने साहित्य पर डिजिटल दुनिया के प्रभाव को नकारा नहीं लेकिन कहा कि किताबों को पढ़ने का आनंद और कही नहीं है।
1999 में हुई कॉलेज की स्थापना
बता दें कि क्रिस्तु जयंती कॉलेज की स्थापना 1999 में हुई थी। यह बोधि निकेतन ट्रस्ट द्वारा संचालित किया जाता है। यह ट्रस्ट सेंट जोसेफ प्रोविंस ऑफ द कार्मलाइट इमैक्यलिट के सदस्यों द्वारा बनाया गया है। कॉलेज बैंगलोर विश्वविद्यालय से संबद्ध है और नैक (NAAC) से 'A' ग्रेड प्राप्त कॉलेज है। 2013 में कॉलेज को यूजीसी, कर्नाटक सरकार और बैंगलोर विश्वविद्यालय से स्वायत्त स्थिति प्रदान की।
2015 में कराए गए इंडिया टुडे नीलसन सर्वे में पूरे देश के अच्छे कॉलेजों की श्रेणी में कॉलेज का वाणिज्य विभाग 16 वें पायदान पर था। साथ ही साइंस में 22 वें और आर्ट में 24 वें स्थान पर था। इसी प्रकार बैंगलोर के टॉप 10 कॉलेजों में, कॉलेज के तीनों विभाग कॉमर्स, साइंस और आर्ट में क्रमशः तीसरे,चौथे और 5वें स्थान पर था।
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