Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

बिहार चुनाव 2015: हारे या जीते..मांझी के दोनों हाथ में है लड्डू

पटना(मुकुंद सिंह)। अपने आप को बिहार के राजनीति सुरमा कहलाने वाले सभी नेताओं मे से एक चतुर नेता है बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी। जिनके दोनों हाथ मे ही लड्डू है। हारने के बाद भी लड्डू और जितने के बाद भी लड्डू।

'तो जीतन राम मांझी पर मरती थीं लड़कियां'

एनडीए अपनी तैयारियों में जुटा है तो मांझी भी अपनी गुप्त योजना पर काम कर रहे हैं। बिहार चुनाव के नतीजों के बाद अगर एनडीए 130 सीट के आसपास सिमटेगी और मांझी की पार्टी को 12 या उससे अधिक सीटें आती हैं तो वे सीएम पद पर दावा ठोंक सकते हैं।

हारे या जीते..मांझी के दोनों हाथ में है लड्डू

अगर एनडीए बिहार में बढ़त हासिल करने से मामूली पीछे रहती है तो उनको एक बार फिर से बिहार का सीएम बनाया जा सकता है क्योंकि, उसे डर है कि लालू भी मांझी को भाजपा को रोकने के लिए सीएम पद का ऑफर कर सकते हैं। ऐसे में न चाहते हुए भी नीतीश को एकबार फिर से तैयार होना ही पड़ेगा।

लालू बनवा सकते हैं मांझी को सीएम

ऐसे हालात में एनडीए बतौर सीएम उनका चेहरा सामने रख कर आसानी से बहुमत जुटा लेगी। वहीं सुत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार मांझी को भाजपा की ओर से राज्यपाल पद का ऑफर किया गया है, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया है। उसके पीछे उनका तर्क था कि मेरी पार्टी नई है और यदि मैं गवर्नर बन गया तो उसे समय नहीं दे सकूंगा।

मांझी को मिला गर्वनर बनने का प्रपोजल

दरअसल, जीतन राम मांझी चुनाव परिणामों का इंतजार कर रहे हैं। तब तक वह अपने पत्ते खोलना नहीं चाहते। उन्हें एनडीए का राष्ट्रीय संयोजक बनाने की भी तैयारी चल रही है क्योंकि, जदयू के अलगाव के बाद से वह पद खाली है। तब एनडीए के संयोजक शरद यादव हुआ करते थे। अगर वे एनडीए और केंद्र में मंत्री बन जाते हैं तो फिर मांझी को बतौर दलित-महादलित चेहरा बना कर भाजपा पश्चिम बंगाल व यूपी चुनाव में भुनाना चाहती है।

यूपी के लिए मांझी को किया जा रहा है तैयार

क्योंकि, यूपी की सत्ता हासिल करने के लिए उसे मायावती की काट तो चाहिए ही। ऐसे हालात में मांझी को विधानसभा अध्यक्ष का पद भी ऑफर किया जा सकता है, क्योंकि गठबंधनों के इस दौर में विधानसभा अध्यक्ष का पद भी मांझी को दिया जा सकता है। साथ ही मांझी के बेटे संतोष मांझी को मंत्री का पद दिया जा सकता है।

मांझी बनेंगे महादलितों के सबसे बड़े नेता

हो सकता है कि उनके सभी विधायकों को मंत्री पद या निगम-बोर्डों के अध्यक्ष का पद भी दिया जा सकता है लेकिन मांझी का असली मकसद है खुद को महादलित नेता के तौर पर खुद को बिहार व बाद में राष्ट्रीय राजनीति में स्थापित करना।

मायावती को टक्कर देंगे मांझी

क्योंकि, अब तक हिंदी पट्टी के दो बड़े राज्यों-बिहार और यूपी में दलित राजनीति में मायावती ही सबसे बड़ा नाम है। पर, बिहार में मायावती की दाल नही गल पाती है। कभी कांग्रेस अपने सबसे बड़े दलित नेता जगजीवन राम के नाम और चेहरे को भुना कर यूपी-बिहार में इस तबके का वोट हासिल करती थी। अब वही योजना मांझी ने खुद के लिए बना रखा है।

लालू के साथ आ सकते हैं मांझी

इसके लिए लालू का इस्तेमाल वह फौरी तौर पर कर सकते हैं, लेकिन बाद में एनडीए ही उनकी योजना को साकार कर सकती है। वही निजी तौर पर नीतीश कुमार और उनके कुछ खास सिपहसालारों से निपटने के लिए भी मांझी तात्कालिक तौर पर लालू का साथ ले सकते हैं। यह भी संभव है कि यदि लालू के समर्थन से मांझी बिहार का सीएम बनते हैं तो वे राजद में दलित विधायकों का एक अलग गुट भी बना लें।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+