60 से ज्यादा लड़कियां रात के अंधेरे में होस्टल से निकल कर 17 km पैदल क्यों चलीं? जानिए
झारखंड के आवासीय होस्टल में रहने वाली 60 से ज्यादा छात्राओं ने वार्डन के खिलाफ शिकायत करने के लिए जो कदम उठाया, वैसा सुनने को नहीं मिलता है। वह रात के अंधेरे में 17 किलोमीटर तक सुनसान सडकों पर चलती रहीं।

झारखंड में एक स्कूल की होस्टल में रहने वाली 60 से ज्यादा लड़कियां अचानक रात के अंधेरे में स्कूल कैंपस से निकल जाती हैं और सुनसान सड़कों पर बदहवास होकर चलना शुरू कर देती हैं। उन्हें जरा भी इल्म नहीं है कि वह जो कदम उठा रही हैं, उसमें कितना जोखिम है। लेकिन, वह करें भी क्या ? क्योंकि होस्टल की वार्डन उन्हें ठीक से रहने भी तो नहीं दे रही है। आरोपों के मुताबिक उन्हें इस कदर प्रताड़ित किया गया है कि वह सबकुछ भुलाकर सिर्फ जिला कलेक्टर से जाकर अपनी परेशानियां बता देना चाहती हैं। शायद दिन के उजाले में वह जो साहस नहीं जुटा पाती थीं, वह हौसला रात के अंधेरे में उन्हें मिल जाता है। रात के एक बजे से चलते-चलते सुबह 7 बजे स्कूल से 17 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय स्थित कलेक्टर के दफ्तर तक पहुंचकर ही वो दम लेती हैं।
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रात के अंधेरे में 17 किलोमीटर चलीं 60 से ज्यादा लड़कियां
झारखंड के चाईबासा में 60 से ज्यादा लड़कियों को अपनी आपबीती बयां करने के लिए रात के अंधेरे में 17 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। वो रात में ही अपने स्कूल होस्टल से निकलीं और पूरी रात सुनसान सड़कों पर चलती रहीं। सुबह 7 बजे जाकर वो पश्चिमी सिंहभूम के जिला मुख्यालय पहुंचीं और डिप्टी कमीश्नर के पास होस्टल की वार्डन की ओर से उनपर ढाए जाने वाले 'जुल्मों' की फेहरिस्त शिकायत के रूप में दर्ज कराई। ये सभी छात्राएं 11वीं में खूंटपानी स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल में पढ़ती हैं और वहीं के होस्टल में रहती हैं।

डीसी के निर्देश पर डीएसई ने सुनीं लड़कियों की शिकायतें
इन छात्राओं के इस तरह के विरोध प्रदर्शन के बाद जिले के शिक्षा विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। क्योंकि, लड़कियों ने सीधे डिप्टी कमिश्नर अनन्या मित्तल तक शिकायत पहुंचा दी है। डीसी के निर्देश पर जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) अभय कुमार शील को मौके पर पहुंचकर छात्राओं की शिकायतें सुननी पड़ीं और तब जाकर लड़कियों को वाहनों में वापस स्कूल होस्टल भेजने का इंतजाम करना पड़ा।

वार्डन के खिलाफ छात्राओं का हल्ला बोल
DSE ने छात्राओं को भरोसा दिलाया है कि वह मामले की जांच करवाएंगे और वार्डेन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। छात्राओं ने उन्हें बताया कि उन सबको जबरन बासी खाना खाने, टॉयलेट साफ करने और ठंड के बावजूद नीचे की कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्राओं कोजमीन पर ही सिर्फ चटाई पर सोने को मजबूर किया जाता है। यही नहीं, अगर वो वार्डन के खिलाफ आवाज उठाती हैं तो उनकी पिटाई भी की जाती है। छात्राओं ने यह भी बताया कि जब वरिष्ठ अधिकारी निरीक्षण के लिए स्कूल पहुंचते हैं, तो वार्डन उन्हें झूठ बोलने के लिए भी मजबूर करती हैं।

शिकायतों की जांच के लिए टीम बनाने के भरोसा दिया
जब पूरी रात पैदल चलकर छात्राएं जिला मुख्यालय चाईबासा पहुंचीं तो सबसे पहले स्थानीय कांग्रेस सांसद गीता कोड़ा को फोन मिलाया। तब उन्होंने लड़कियो की ओर से उठाए गए कदम की सूचना डीसी को दी। इसके बाद ही डीसी ने डीएसई को इस मामले को देखने के लिए कहा। शील ने कहा है कि इन आरोपों की जांच के लिए एक टीम बनाई जाएगी।

60 छात्राओं को जान जोखिम में डालने का जिम्मेदार कौन ?
छात्राओं की शिकायतों में बात-बात पर जुर्माना वसूलने, पढ़ाई के इंतजाम में दिक्कत होने से भी संबंधित आरोप लगाए गए हैं। जिला प्रशासन इस बात पर हैरान है कि आखिर छात्राओं को कितना प्रताड़ित किया गया है कि वह देर रात 17 किलोमीटर जान जोखिम में डालकर होस्टल से निकलने को मजबूर हुईं। सवाल स्कूल और होस्टल प्रबंधन पर यह भी उठ रहा है कि एक साथ 60 से अधिक छात्राएं स्कूल से निकलकर जिला मुख्यालय पहुंच गईं और उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी। गौर करने वाली बात यह है कि यह समस्या सिर्फ एक वार्डन की मनमानी का नहीं है। बल्कि, रात के अंधेरे में लड़कियों को जो कदम उठाना पड़ा और उस दौरान किसी तरह की अनहोनी होती तो उसका जिम्मेदार कौन होता ? (अंतिम दोनों तस्वीरें-प्रतीकात्मक,बाकी तस्वीरें ट्विटर वीडियो के सौजन्य से)












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