ज़्यां द्रेज को झारखंड पुलिस ने हिरासत में लिया फिर छोड़ा
मशहूर सोशल एक्टिविस्ट ज्यां द्रेज को झारखंड के गढ़वा में पुलिस ने हिरासत में लेने के बाद छोड़ दिया.
पुलिस उन्हें विशुनपुरा थाने ले गई थी. उनके साथ दो और लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया था.
ज्यां द्रेज और उनके साथी विशुनपुरा में 'राइट टू फूड कैंपेन' के एक कार्यक्रम में भाग ले रहे थे.
पलामू के डीआईजी विपुल शुक्ल ने बीबीसी से बातचीत में ज्यां द्रेज और उनके साथियों को हिरासत में लिए जाने की पुष्टि की.
उन्होंने बताया कि ज्यां द्रेज जिस कार्यक्रम में गए थे, उसकी प्रशासनिक इजाज़त नहीं ली गई थी. इस कारण पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था.
डीआईजी विपुल शुक्ल ने कहा, "ज्यां द्रेज को चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन में हिरासत मे लिया गया था. उनके कार्यक्रम के आयोजकों ने एसडीओ से इसकी अनुमति नहीं ली थी."
उन्होंने कहा, "लोकसभा चुनाव को लेकर पूरे राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू है. बिना इजाज़त के पब्लिक मीटिंग करना आचार संहिता का उल्लंघन है. इसलिए पुलिस उन्हें थाने लेकर आई थी.''
इधर, पुलिस की हिरासत में मौजूद ज्यां द्रेज ने बताया है कि उन पर पुलिस रिपोर्ट दर्ज कर ज़मानत लेने का दबाव डाल रही थी. ज़्यां द्रेज को किसी से फ़ोन पर भी बात करने की अनुमति नहीं थी.
ज्यां द्रेज ने बीबीसी से कहा, "अगर लोगों को चुनाव के समय शांतिपूर्ण ग़ैर-राजनीतिक मीटिंग करने का भी अधिकार नहीं है तो लोकतंत्र का कोई अर्थ नहीं रह जाता है."
इस बीच राइट टू फूड कैंपेन के सिराज दत्ता ने बताया कि पुलिस की कार्रवाई बेहद निंदनीय और अलोकतांत्रिक है. चुनाव आचार संहिता का बहाना लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार करना और उन्हें डराना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है. इसका विरोध किया जाना चाहिए.












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