झारखंड चुनाव तीसरा चरण: जानिए 17 अखाड़ों में किस पहलवान की है किससे टक्कर

नई दिल्ली। झारखंड विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण के तहत 17 सीटों पर 12 दिसम्बर को वोटिंग है। इन 17 में से 12 सीटों पर शाम तीन बजे चुनाव प्रचार खत्म हो गया। पांच सीटों पर शाम पांच बजे प्रचार का शोर थमा। 12 सीटों पर सुबह 7 बजे से अपराह्न 3 बजे तक और पांच सीटों पर सुबह 7 बजे से शाम पांच बजे तक मतदान होगा। चूंकि चुनाव के 48 घंटा पहले प्रचार का भोंपू बंद होता है इसलिए प्रचार समाप्त होने का समय सीटों के हिसाब से बदल गया। इन 17 में 10 सीटें भाजपा के पाले में है। सात उसने जीती थीं और बाद में झाविमो के तीन विधायक भाजपा में आ गये। तीन पर झामुमो, दो पर कांग्रेस, एक पर आजसू और एक पर माले काबिज है।

आजसू प्रमुख सुदेश महतो की प्रतिष्ठा दांव पर

आजसू प्रमुख सुदेश महतो की प्रतिष्ठा दांव पर

सिल्ली

आजसू प्रमुख सुदेश महतो के लिए यह प्रतिष्ठा की सीट है। पिछला चुनाव वे झामुमो के अमित महतो से हार गये थे। अमित महतो के अयोग्य होने के बाद उपचुनाव हुआ तो उनकी पत्नी सीमा महतो ने फिर सुदेश महतो को हरा दिया था। इस बार झामुमो ने सीमा महतो को दोबारा मौका दिया है। उनका मुकाबला सुदेश महतो से ही है। भाजपा ने सुदेश महतो के खिलाफ कोई प्रत्याशी नहीं दिया है। सुदेश महतो 2000,2005 और 2009 में इस सीट पर जीत चुके हैं। लेकिन इसके बाद दो लगातार हार ने उनकी चुनौती बढ़ा दी है। इस बार आजसू का भाजपा से गठबंधन टूट चुका है। सुदेश महतो पर दबाव है कि वे कैसे अपने अकेले लड़ने के फैसले को सही साबित करते हैं।

धनवार

धनवार सीट पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की प्रतिष्ठा से जुड़ी है। पिछले चुनाव में उनको इस सीट पर हार मिली थी। उनका मुकाबला मौजूदा विधायक और भाकपा माले के प्रत्याशी राज कुमार यादव से हैं। भाजपा के लक्ष्मण प्रसाद सिंह और झामुमो के निजामुद्दीन अंसारी ने मुकाबले को चौतरफा बना दिया है। मरांडी यहां कांटे के मुकाबले में फंसे हुए हैं।

रांची

तीसरे चरण में रांची भी एक अहम सीट है। इस सीट पर भाजपा के सीपी सिंह छठी बार विधायक बनने के लिए मैदान में हैं। सीपी सिंह को झामुमो की महुआ माजी चुनौती दी रही है। पिछले चुनाव में सीपी सिंह ने महुआ मांजी को आसानी से हरा दिया था। आजसू की वर्षा गाड़ी और निर्दलीय पवन कुमार शर्मा भी यहां से चुनाव लड़ रहे हैं। अब तक जो तस्वीर है उसके मुताबिक सीपी सिंह का पलड़ा भारी नजर आ रहा है।

हटिया

इस सीट पर भाजपा के नवीन जायसवाल और कांग्रेस के अजयनाथ शाहदेव में आमने-सामने की टक्कर है। 2014 में नवीन झाविमो से जीते थे। लेकिन अब वे भाजपा की तरफ से मैदान में है। झाविमो ने यहां शोभा यादव को मैदान में उतारा है। आजसू ने भरत काशी को यहां से मौका दिया है।

कांके

कांके भाजपा की सीट है। पिछले चुनाव में भाजपा के जीतू चरण राम जीते थे। इस बार भाजपा ने उनका टिकट काट कर समरी लाल को मैदान में उतारा है। समरी लाल का मुकाबला कांग्रेस के सुरेश बैठा से है। आजसू के रामजीत गंझू मुकाबले को तिकोना बना रहे हैं। झाविमो से छात्र नेता कमलेश राम चुनाव लड़ रहे हैं। समरी लाल इस सीट अलग-अलग दलों से दो बार चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन जीते नहीं हैं। इस बार भाजपा ने विधायक का टिकट काट कर उन्हें मैदान में उतारा है। समरी लाल के सामने चुनौती है कि कैसे वे भाजपा के लिए इस सीट को कायम रखते हैं।

रघुवर सरकार की मंत्री नीरा यादव की अग्निपरीक्षा

रघुवर सरकार की मंत्री नीरा यादव की अग्निपरीक्षा


कोडरमा

कोडरमा सीट पर भाजपा की उम्मीदवा और रघुवर सरकार की मंत्री नीरा यादव की अग्निपरीक्षा है। उनका मुकाबला आजसू की शालिनी गुप्ता से हैं। शालिनी पहले भाजपा में ही थीं। महागठबंधन के सीट बंटवारे में कोडरमा सीट राजद को मिली थी। लेकिन राजद के मूल प्रत्याशी सुभाष यादव का नामांकन तकनीकी कारणों से रद्द हो गया। अब राजद की तरफ से अमिताभ कुमार मैदान में हैं। राजद में उहापोह के कारण नीरा यादव की स्थिति बेहतर दिख रही है।

खिजरी

खिजरी सीट भी भाजपा की है। यहां भाजपा के मौजूदा विधायक राम कुमार पाहन का मुकाबला कांग्रेस के राजेश कच्छप से है। झाविमो से अंतु तिर्की और आजसू से रामधन बेदिया भी यहां से चानव लड़ रहे हैं। 2014 में राम कुमार पाहन यहां जीते थे लेकिन आजसू के चुनाव लड़ने से उनकी चुनौती बढ़ गयी है।

बरकट्ठा

इस सीट पर भाजपा के जानकी प्रसाद यादव की टक्कर राजद के मो. खलील से है। जानकी यादव 2014 में झाविमो से जीते थे। लेकिन इस बार पाला बदल कर वे भाजपा से लड़ रहे हैं। झाविमो ने यहां से बटेश्वर प्रसाद मेहता को मैदान में उतारा है। आजसू से प्रदीप कुमार मेहता खड़े हैं। दलबदलू को टिकट देने से भाजपा के वोटरों में थोड़ी नाराजगी है। लेकिन मोदी के नाम पर जानकी जीत की उम्मीद लगाये बैठे हैं।

झामुमो ने लगाया जोर

झामुमो ने लगाया जोर


बरही

बरही सीट पर भाजपा के मनोज यादव का मुकाबला कांग्रेस के उमाशंकर अकेला से है। 2014 में मनोज यादव कांग्रेस के टिकट पर जीते थे। लेकिन 2019 में वे भाजपा में शामिल हो गये। उनके दल बदलने से भाजपा में कुछ नाराजगी है। लेकिन मनोज यादव अनुभवी नेता हैं। दूसरी तरफ उमाशंकर अकेला भाजपा छोड़ कर कांग्रेस से चुनाव लड़ रहे हैं। यानी यहां दो दलबदलुओं में लड़ाई है।

बड़कागांव

ये सीट कांग्रेस की है। 2014 में यहां कांग्रेस की निर्मला देवी जीती थीं। वे झारखंड के विवादास्पद पूर्व मंत्री योगेन्द्र साव की पत्नी हैं। लेकिन इस बार कांग्रेस ने निर्मला देवी की बजाय उनकी बेटी अंबा प्रसाद को यहां से टिकट दिया है। अंबा का मुकाबला भाजपा के लोकनाथ महतो से है। आजसू के रौशनलाल चौधरी मुकाबले को त्रिकोणात्मक बना रहे हैं।

रामगढ़

ये सीट आजसू की है। 2014 में आजसू के चंद्रप्रकाश चौधरी यहां से जीते थे। 2019 में वे गिरिडीह से सांसद चुन लिये गये। अब आजसू की तरफ से उनकी पत्नी सुनीता देवी यहां से चुनाव लड़ रही हैं। उनका मुकाबला कांग्रेस की ममता देवी और भाजपा के रंजय प्रसाद से है।

मांडू

मांडू में भाजपा के जयप्रकाश भाई पटेल का मुकाबला झामुमो के रामप्रकाश भाई पटेल से है। दोनों सगे भाई है। इके चचेरे भाई चंद्रनाथ पटेल झाविमो से चुनाव मैदान में हैं। तीन भाइयों के बीच चुनाव होने से इस बार इस सीट की चर्चा कुछ अधिक है। आजसू से तिवारी महतो यहां किस्मत आजमा रहे हैं।

हजारीबाग

ये सीट भाजपा की है। भाजपा के मौजूदा विधायक मनीष जायसवाल का मुकाबला कांग्रेस के आरसी मेहता से हैं। झाविमो ने मुन्ना सिंह को मैदान में उतारा है।

सिमरिया

2014 में झाविमो के गणेश गंझू यहां जीते थे। बाद में वे भाजपा में चले गये। लेकिन भाजपा ने सीटिंग विधायक गणेश गंझू का टिकट काट कर किशुन दास को उम्मीदवार बनाया है। किशुन दास का मुकाबला कांग्रेस के योगेन्द्र बैठा से है। झाविमो ने यहां से रामदेव गंझू को खड़ा किया है। यहां तिकोने मुकाबले की संभावना है।

तीसरा चरण अहम

तीसरा चरण अहम

गोमिया

ये सीट झामुमो की है। 2014 में झामुमो के योगेन्द्र महतो यहां से जीते थे। बाद में योगेन्द्र के सजायाफ्ता होने के बाद यहां उपचुनाव हुआ तो योगेन्द्र की पत्नी बबिता ने ये सीट बरकरार रखी। इस बार झामुमो की बबिता महतो का मुकाबला भाजपा के लक्ष्मण नायक, आजसू के लंबोदर महतो से है। पुराने दिग्गज माधव लाल सिंह निर्दलीय मैदान में हैं।

बेरमो

ये सीट भाजपा की है। इस बार भाजपा के मौजूदा विधायक योगेश्वर महतो का मुकाबला कांग्रेस के हेवीवेट राजेन्द्र सिंह से है। राजेन्द्र सिंह इस सीट से पांच बार विधायक रहे चुके हैं। इस बार उन्होंने मजबूत चुनौती पेश की है। आजसू ने काशीनाथ साहू को मैदान में उतारा है। आजूस के चुनाव लड़ने से भाजपा की मुश्किलें बढ़ गयी हैं।

ईचागढ़

ये भाजपा की सीट है। भाजपा ने अपने मौजूदा विधायक साधुचरण महतो पर फिर भरोसा किया है। साधुचरण का मुकाबला झामुमो की सविता महतो से है। आजसू के हरेलाल महतो भी यहां से चुनाव लड़ रहे हैं। निर्दलीय अरविंद सिंह ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।

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