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झारखंड चुनाव: 15 सीटों पर बागी बिगाड़ेंगे खेल, अपनों की बगावत से सभी दल परेशान

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नई दिल्ली। झारखंड विधानसभा चुनाव में 15 सीटें ऐसी हैं जहां बागियों की वजह से राजनीतिक दलों के अधिकृत प्रत्याशी मुश्किल में पड़ गये हैं। कमोबेश सभी राजनीति दलों में भगवात की आग भड़की हुई है। नरेन्द्र मोदी, शिबू सोरेन या सोनिया गांधी जैसे दिग्गजों का नाम भी काम नहीं आ रहा। दल-बदल की आंधी से आजसू, झाविमो और झारखंड पार्टी जैसे छोटे दलों की चांदी है।

पाकुड़ में फंसे कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम

पाकुड़ में फंसे कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम

पाकुड़ सीट पर कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम का कब्जा है। वे महागठबंधन के उम्मीदवार के रूप में यहां से चुनाव लड़ रहे हैं। उन्हें गठबंधन के सहयोगी झामुमो और राजद का समर्थन प्राप्त है। लेकिन इस बीच झामुमो नेता अकिल अख्तर ने बगावत कर दी। अब वे आजसू का उम्मीदवार बन कर पाकुड़ के चुनावी मैदान में हैं। अकिल अख्तर झामुमो के पूर्व विधायक रहे हैं। उनके चुनाव लड़ने से कांग्रेस के आलमगीर आलम परेशानी में फंस गये हैं।

पोटका- इस सीट पर भाजपा ने सीटिंग एमएलए मेनका सरदार को फिर टिकट दिया है। भाजपा की नेता और जिला परिषद सदस्य बुलू रानी सरदार यहां से चुनाव लड़ना चाहती थीं। जब उन्हें भाजपा से टिकट नहीं मिला तो आजसू का उम्मीदवार बन कर चुनावी मैदान में कूद गयीं। बुलू रानी के चुनाव लड़ने से भाजपा उम्मीदवार को नुकसान की आशंका जतायी जा रही है।

भाजपा ने काटा टिकट तो ताला मरांडी ने किया विद्रोह

भाजपा ने काटा टिकट तो ताला मरांडी ने किया विद्रोह

बोरियो- इस सीट भाजपा ने अपने सीटिंग एमएलए ताला मरांडी का टिकट काट दिया था। बोरियो से सूर्या हंसदा को भाजपा का टिकट मिला तो ताला मरांडी ने विद्रोह कर दिया। अब ताला मरांडी झामुमो के टिकट पर चुनाव लड रहे हैं। ताला मरांडी पहले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे। 2014 के विधानसभा चुनाव में वे बोरियो से जीते भी थे। लेकिन जब उन्हें भाजपा अध्यक्ष पद से हटाया गया तो वे विक्षुब्ध हो गये। 2019 को लोकसभा चुनाव में राजमहल सीट से भाजपा उम्मीदवार हेमलाल मुर्मू की हार हो गयी थी। आरोप लगा कि ताला मरांडी की भितरघात की वजह से हेमलाल मुर्मू की हार हुई । तभी से भाजपा ने ताला मरांडी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का मूड बना लिया था। विधानसभा चुनाव का समय आया तो उनका टिकट काट दिया गया। ताला मरांडी के बागी होने से भाजपा के नये चेहरे को परेशानी हो रही है।

खिजरी- महागठबंधन के बंटवारे में खिजरी सीट कांग्रेस के खाते में गयी। कांग्रेस ने यहां से राजेश कच्छप को उम्मीदवार बनाया है। 2014 के विधानसभा चुनाव में झामुमो के अंतु तिर्की दूसरे स्थान पर रहे थे। उन्होंने 2019 में चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी कर रखी थी। लेकिन जब ये सीट कांग्रेस को मिल गयी तो अंतु तिर्की ने झामुमो से नाता तोड़ कर झाविमो का दामन थाम लिया। अब वे झाविमो के टिकट पर खिजरी में चुनाव लड़ रहे हैं। अंतु के मैदान में आने से कांग्रेस को अपनों से चुनौती मिलने लगी है।

सिंदरी- सिंदरी सीट पर भाजपा ने अपने मौजूदा विधायक फूलचंद मंडल का टिकट काट दिया था। इंद्रजीत महतो यहां से भाजपा के उम्मीदवार हैं। टिकट काटे जाने से नाराज फूलचंद भाजपा छोड़ कर झामुमो में चले गये। अब वे झामुमो के उम्मीदवार के रूप में भाजपा के इंद्रजीत महतो को चुनैती दे रहे हैं। भाजपा पर अपनी सीट को बचाये रखने का दबाव है।

घाटशिला- महागठबंधन की तरफ से घाटशिला सीट पर झामुमो के रामदास सोरेन चुनाव लड़ रहे हैं। लेकिन कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष प्रदीप बलमुचू की बगावत के कारण झामुमो का समीकरण बिखरता दिख रहा है। प्रदीप बलमुचू आजसू के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट भाजपा के लखन मार्डी का कब्जा है। महागठबंधन के मतों में बिखराव से भाजपा को फायदा मिल सकता है।

बरकट्ठा- खलिद खलील झाविमो छोड़ कर राजद में आये थे। राजद ने उन्हें बरकट्ठा से उम्मीदवार बनाया है। 2014 में जानकी यादव झाविमो के टिकट पर जीते थे। उन्होंने भाजपा के अमित यादव को हराया था। 2019 में भाजपा ने जानकी यादव को यहां से टिकट दिया तो अमित यादव ने बगावत कर दी। अब अमित यहां से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।

भाजपा से टिकट कटा, राधाकृष्ण किशोर आजसू से ठोक रहे ताल

भाजपा से टिकट कटा, राधाकृष्ण किशोर आजसू से ठोक रहे ताल

छतरपुर- 2014 में भाजपा के राधाकृष्ण किशोर यहां से चुनाव जीते थे। 2019 में उनका टिकट काट दिया गया तो वे अब आजसू के टिकट पर यहां ताल ठोक रहे हैं। भाजपा ने यहां पुष्पा देवी को चुनाव मैदान में उतारा है।

मझगांव- भाजपा ने जब अपने पूर्व मंत्री बड़कुंवर गगराई का टिकट काट दिया तो उन्होंने भाजपा से इस्तीफा दे दिया। अब वे भारतीय आजाद सेना के बैनर तले चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा ने यहां से भूषण पिंगुआ को चुनावी अखाड़े में उतारा है। 2014 में इस सीट पर झमुमो को जीत मिली थी।

भवनाथपुर- भवनाथपुर में भाजपा ने नौजवान संघर्ष मोर्चा के विधायक भानु प्रताप शाही को उम्मीदावार बनाया तो भाजपा में विद्रोह हो गया। पिछले चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी रहे अनंत प्रताप देव अब यहां से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।

बरही- 2014 में इस सीट पर कांग्रेस के मनोज यादव जीते थे। 2019 के चुनाव में वे भाजपा की टिकट पर मैदान में हैं। मनोज यादव को टिकट मिलने से भाजपा के पूर्व विधायक उमाशंकर अकेला ने बगावत कर दी। अब उमाशंकर अकेला कांग्रेस के टिकट पर यहां से चुनाव लड़ रहे रहे हैं।

शिक्षा मंत्री नीरा यादव को बागी शालिनी से चुनौती

शिक्षा मंत्री नीरा यादव को बागी शालिनी से चुनौती

तोरपा- उस सीट पर झामुमो ने अपने सीटिंग विधायक पौलुस सुरीन का टिकट काट कर सुदीप गुडिया को उम्मीदवार बनाया है। पौलुस अब झारखंड पार्टी होरो गुट के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। झामुमो को भितरघात की आशंका सताने लगी है। पौलुस पूर्व नक्सली भी रहे हैं।

तमाड़- 2014 में तमाड़ सीट पर आजसू के विकास सिंह मुंडा जीते थे। अब वे झामुमो के उम्मीदवार हैं। आजसू ने यहां से राम दुर्लभ सिंह मुंडा को खड़ा किया है। आजसू में बगवात से उसकी जीती हुई सीट खतरे में पड़ गयी है।

चक्रधरपुर- झामुमो ने चक्रधरपुर सीट पर अपने सीटिंग विधायक शशिभूषण सामड का टिकट काट कर सुखराम उरांव को मुकाबले में उतारा है। शशिभूषण सामड अब झाविमो से चुनाव लड़ रहे हैं। शशिभूषण के चुनाव लड़ने से सुखराम की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं।

कोडरमा-कोडरमा सीट पर भाजपा की नीरा यादव को भाजपा की बागी शालिनी गुप्ता चुनौती दे रही हैं। शालिनी आजसू के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। नीरा यादव रघुवर सरकार में शिक्षा मंत्री हैं।

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English summary
jharkhand assembly elections 2019 rebel candidates 15 seats
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