जया का फैसला- अभियोजन पक्ष बोला कोर्ट ने हमे अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया
बेंगलुरू। तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता को आय से अधिक संपत्ति मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट ने बरी कर दिया है। कोर्ट ने जयललिता सहित तीन अन्य लोगों को भी इस मामले में राहत दी है। इस फैसले के साथ ही जयललिता के एक बार फिर से मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है।

वहीं जयललिता को बरी किये जाने से अभियोजन पक्ष के वकील बीवी आचार्य ने इस फैसले से नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि मेरे अनुसार इस फैसले में किसी भी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं थी। वनइंडिया को दिये साक्षात्कार में आचार्य ने कहा कि हमने कोर्ट में सभी साक्ष्य प्रस्तुत किये थे। उन्होंने कहा कि फैसले की प्रति मिलने के बाद इस बारे में विस्तार से कुछ कहने में सक्षम होंगे।
इस फैसले के बारे में आपका क्या कहना है?
मेरे अनुसार इस फैसले में किसी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं थी। हमने सेशन कोर्ट में जयललिता सहित सभी के खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश किये थे। सेशन कोर्ट ने इस मामले में विस्तार से चर्चा की थी जिसके बाद ही अपना फैसला सुनाते हुए जयललिता को दोषी करार दिया था।
आपको क्या लगता है हाई कोर्ट ने सेशन कोर्ट का फैसला क्यों बदला?
हाई कोर्ट ने किस आधार पर यह फैसला दिया है यह अभी कहना सही नहीं होगा। एक बार फैसले की विस्तृत कॉपी मिलती है उसके बाद ही मैं इस बारे में कुछ कह सकुंगा। फैसले को पूरा पढ़ने के बाद मैं इस बारे में कुछ कह सकने में समर्थ हुंगा।
क्या आपको लगता है कि फैसले में किसी भी तरह की भेदभाव हुआ है?
मुझे अभी भी यह समझ नहीं आ रहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने हमें अपना लिखित तर्क रखने के लिए सिर्फ एक दिन का वक्त दिया था। मुझे लगता है कि हमें तर्कों को रखने के लिए और समय दिया जाना चाहिए था। यही नहीं हमें अपनी बातों को कहने का भी मौका दिया जाना चाहिए था।
आपने अपील दायर की है कि अपील में कर्नाटक का पक्ष नहीं सुना गया?
हां, हमने यह अपील दायर की है। प्रिंसिपल ऑफ नेचुरल जस्टिस कहता है कि कर्नाटक के पक्ष को सुनने का मौका दिया जाना चाहिए था। सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अभियोजन वकील की नियुक्ति को रद्द कर दिया था ऐसे में हमें हमारा पक्ष रखने का समय दिया जाना चाहिए।












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