Opinion Poll: मध्य प्रदेश में कांग्रेस को बड़ा झटका, सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी BJP
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव से पहले देशभर में कई टीवी चैनल केंद्र में आने वाली नई सरकार को लेकर अपने अपने ओपिनियल पोल आयोजित कर रहे हैं। आने वाले चुनाव में किस पार्टी को किस राज्य से कितनी सीटें मिलने वाली है। किसी सीटों में इजाफा देखने को मिलेगा तो किसको इस चुनाव में भारी नुकसान देखना पड़ सकता है। टीवी चैनल रिपब्लिक भारत ने 'जन की बात' का नाम से एक ओपिनियन पोल के नतीजे जारी किए हैं। मध्यप्रदेश ने हाल में बड़ा सत्ता परिर्वतन हुआ है। 15 साल से ज्यादा समय से सत्ता पर काबिज बीजेपी को विधानसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा था। वहीं कांग्रेस ने जोरदार वापसी की थी।

22-25 सीटें जीत सकती है बीजेपी
रिपब्लिक टीवी की ओर से कराए गए सर्वे में मध्य प्रदेश में NDA को 22 से 25 सीटों के बीच मिलने का अनुमान लगाया गया है। वहीं UPA को 7 से 4 के बीच में सीटें मिल सकती हैं। हालांकि हाल में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 15 साल बात सत्ता में वापसी करने सफल रही थी। 'जन की बात' के सर्वे के अनुसार, UPA को लगभग 39 प्रतिशत वोट शेयर मिलने का अनुमान जताया गया है वहीं NDA को 50 प्रतिशत वोट शेयर मिल सकता है । वहीं अन्य उम्मीदवारों को 11 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं ।

पिछले चुनाव में बीजेपी 29 में से 27 सीटें जीती थी
कांग्रेस ने यहां से पार्टी के वरिष्ठ नेता कमलनाथ को कामन सौंपी गई है। वहीं एमपी में कांग्रेस के बड़े नेताओं में से एक दिग्विजय सिंह भोपाल सीट से लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। जो एक बेहद ही कठिन मुकाबला माना जा रहा है। 2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा गुना और छिंदवाड़ा निर्वाचन क्षेत्रों को छोड़कर कुल 29 सीटों में से 27 सीटें जीतने में सफल रही थी। इन दोनों सीटों पर क्रमश: कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ ने जीत दर्ज की थी।
एक क्लिक में जानें अपने लोकसभा क्षेत्र के जुड़े नेता के बारे में सबकुछ

इन सीटों पर लगातार हारती आ रही है कांग्रेस
बता दें कि, 14 लोकसभा सीटें भोपाल, इंदौर, विदिशा, मुरैना, भिंड, सागर, टीकमगढ़, दमोह, खजुराहो, सतना, जबलपुर, बालाघाट, बैतूल और रीवा कांग्रेस इस अवधि(शिवराज सिंह के कार्यकाल के दौरान) में कभी भी जीत हासिल नहीं कर सकी है। भाजपा को 1989 के बाद से भोपाल, इंदौर, विदिशा, भिंड और दमोह में एक भी हार का सामना नहीं करना पड़ा, जबकि वह 1996 से मुरैना, सागर, जबलपुर और बैतूल जीतती आ रही है।












Click it and Unblock the Notifications