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J&K:पहले इनकार कर फिर क्यों DDC चुनाव लड़ने को तैयार हुईं 'Gupkar'पार्टियां

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नई दिल्ली- जम्मू-कश्मीर के इतिहास में 28 नवंबर से पहली बार जिला विकास परिषद के लिए चुनाव होने जा रहे हैं। यह चुनाव 19 दिसंबर तक चलेंगे। इस चुनाव में 'गुपकार घोषणा' में शामिल संघ शासित प्रदेश के 6 प्रमुख राजनीतिक दलों ने हिस्सा लेने का फैसला किया है। गौरतलब है कि 2018 में जब पूर्ववर्ती राज्य में पंचायतों और शहरी निकायों के चुनाव करवाए गए थे तो वहां की दोनों प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियों पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस ने उसका बहिष्कार कर दिया था। तब इन दलों की मांग थी कि केंद्र सरकार पहले आर्टिकल 35 ए पर अपनी स्थिति साफ करे। जबकि, आज की स्थिति तो ये है कि आर्टिकल 35-ए की क्या कहें, आर्टिकल 370 भी इतिहास बन चुका है। ऐसे में इन पार्टियों का स्थानीय निकाय के चुनावों में शामिल होने के लिए हृदय परिवर्तन क्यों हुआ है, यह जानना बेहद दिलचस्प है।

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    Jammu and Kashmir:Why did the Gupkar parties agree to contest the DDC elections after refusing first

    जम्मू-कश्मीर में हो रहा जिला विकास परिषद का चुनाव संघ शासित प्रदेश के बाहर के लोगों के लिए साधारण सी बात लगती होगी, लेकिन यहां के राजनीतिक हालात को जानने वाले लोगों को इसकी अहमियत की जानकारी है। एक तो पिछले साल जम्मू-कश्मीर को प्राप्त विशेषाधिकार हटाने के बाद वहां सबसे बड़ी चुनावी प्रक्रिया हो रही है। फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला जब से हिरासत से बाहर आए हैं, उसी स्पेशल स्टैटस को वापस लेने की रट लगाए हैं। लेकिन, अब यही पार्टियां यहां की बदली हुई सियासी हकीकत के तहत ही चुनाव प्रक्रिया में शामिल होना चाहते हैं, ताकि वह भारतीय जनता पार्टी का चुनाव मैदान में मुकाबला कर सकें। उसी बीजेपी को चुनाव में वह गुपकार गठबंधन के तहत मिलकर पस्त करना चाहते हैं, जिसे वह कथित तौर पर 'असंवैधानिक तरीके से' आर्टिकल 370 हटाने के लिए जिम्मेदारी मानते हैं। सच तो यह है कि उन्होंने साफ ऐलान किया है कि वह डीडीसी चुनाव में इसलिए शामिल हो रहे हैं, ताकि जम्मू-कश्मीर में भाजपा के बढ़ते प्रभाव को सीमित कर सकें। इस संबंध में गुपकार घोषणा के प्रवक्ता सज्जाद लोन ने कहा है, 'अचानक सबकुछ एक महीने के अंदर पूरा करने की जल्दीबाजी के बावजूद हमने सर्वसम्मति से एकजुट होकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। यह लोकतंत्र की सबसे पवित्र जगह है और हम इसकी हत्या या इसके साथ छेड़छाड़ नहीं होने देंगे।'

    बता दें कि जम्मू-कश्मीर में पहली बार जिला विकास परिषद का गठन किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने संघ शासित प्रदेश के सभी जिलों में 14 परिषद के गठन को मंजूरी दी है। इसके लिए पिछले महीने जम्मू-कश्मीर पंचायती राज कानून, 1989 में संशोधन किया गया है। यहां कम से कम 280 डीडीसी गठित किए गए हैं, जिनका कार्यकाल पांच साल का होगा और सदस्यों का चुनाव मतदाता सीधे वोट देकर करेंगे। चुनाव 28 नवंबर से लेकर 19 दिसंबर के बीच होगा। सरकार का कहना है कि इससे राज्य में जमीनी स्तर का लोकतंत्र मजबूत होगा। हालांकि, वहां कि राजनीतिक पार्टियां इसका यह कहकर विरोध भी कर रही हैं कि इससे उनकी आवाज को बांटने की कोशिश हो रही है।

    जम्मू-कश्मीर में चुनाव बहिष्कार का इतिहास पुराना है। हुर्रियत कांफ्रेंस जैसी पाकिस्तान परस्त अलगाववादी शक्तियां यहां पहले इसी की कमाई खा रही थीं। हालांकि, पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस जैसी प्रमुख पार्टियां चुनाव का हिस्सा जरूर बनती थीं। लेकिन, जब 2018 में पंचायत चुनाव करवाए जा रहे थे, तो उन्होंने विशेषाधिकार की स्थिति स्पष्ट करने की मांग करते हुए उन चुनावों का बहिष्कार कर दिया था। पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य की प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियों के चुनाव बहिष्कार के चलते उन चुनावों में बीजेपी को वॉकओवर मिल गया। कई पंचायत सदस्य तो निर्विरोध चुन लिए गए। अलबत्ता कई सीटों पर उम्मीदवार नहीं मिलने से अभी वह सीट खाली ही पड़ी हैं। अब एक स्थानीय राजनेता ने उसी बात पर जोर देते हुए कहा है कि, 'पंचायत चुनाव को नहीं भूलना चाहिए। क्षेत्रीय पार्टियों के बहिष्कार का सिर्फ बीजेपी को फायदा मिला। हमें उनकी राह आसान नहीं बनानी चाहिए।' हालांकि, कुछ लोग यह भी तर्क दे रहे हैं कि अगर इन चुनावों में शामिल हो गए तो इससे जम्मू-कश्मीर में हालात जल्दी सामान्य हो जाएंगे। लेकिन, फिर भी गुपकार गठबंधन में शामिल पार्टियों ने ना सिर्फ चुनाव लड़ने का निर्णय कर लिया है, बल्कि एकजुट होकर उसकी तैयारियों में जुट गई हैं। उनका मुख्य मकसद जम्मू-कश्मीर खास कर घाटी में भाजपा के विस्तार को रोकना है। इसलिए, पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस जैसी एक-दूसरे की विरोधी पार्टियां भी आज एक घाट का पानी पीने के लिए तैयार हो गई हैं।

    वैसे प्रत्याशियों का चुनाव और सीटों पर तालमेल इतना आसान भी नहीं रहने वाला है, क्योंकि कुछ समय पहले तक जमीनी स्तर पर उनके कार्यकर्ता एक-दूसरे के कट्टर विरोधी रहे हैं। फिलहाल गुपकार गठबंधन में ये पार्टियां शामिल हैं- एनसी,पीडीपी,सीपीआई,सीपीएम,पीसी,जेकेपीएम और एएनसी। वैसे फिलहाल कांग्रेस पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है, लेकिन साथ ही साथ भाजपा के खिलाफ साझा रणनीति पर चुनाव लड़ने का संकेत भी दे रही है। दूसरी ओर पंचायत चुनावों में बाजी मार चुकी भाजपा इस बार भी पूरा दमखम लगाने को तैयार है।

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    English summary
    Jammu and Kashmir:Why did the Gupkar parties agree to contest the DDC elections after refusing first
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