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मैंने रेप नहीं किया बल्‍कि लड़की कमरे में आई और रजामंदी से हुआ सबकुछ, जैन मुनि ने कबूला

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      Jain Muni Shanti Sagar ने कबूला गुनाह कहा रेप नहीं रजामंदी से हुआ सबकुछ । वनइंडिया हिंदी

      नई दिल्‍ली। बलात्‍कार जैसे घिनौने केस में फंसे कथित दिगम्बर जैन मुनि आचार्य शांति सागर ने कबूल कर लिया है कि उन्‍होंने लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाए थे। मेडिकल चेकअप के दौरान शांति सागर ने डॉक्‍टर से कहा कि लड़की की सहमती से ही उन्‍होंने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाया था। उन्‍होंने दावा किया है कि जान बूझकर उन्हें इस मामले में फंसाया गया है। उन्‍होंने डॉक्‍टर से बताया कि वह लड़की को 5-6 महीने से जानते हैं। वह पहली बार मिलने के लिए सपरिवार सूरत आई थी। टीमलियावाड नानपुरा धर्मशाला में लड़की की रजामंदी से उनके बीच शारीरिक संबंध बने थे। जीवन में पहली बार उन्हें किसी लड़की से संसर्ग किया था।

      साधू होकर ऐसा किया पूछने पर सिर झुका लिया

      साधू होकर ऐसा किया पूछने पर सिर झुका लिया

      डॉक्‍टरों ने जब जैन मुनि से पूछा कि एक साधू होकर भी उन्‍होंने ऐसा क्‍यों किया? इसपर मुनि ने सिर झुका लिया। आपको बता दें कि जैन मुनि को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। शनिवार को उन्‍हें मेडिकल चेकअप के लिए लाया गया था। इस दौरान जरूरी सैम्पल नहीं लिया जा सका। डॉक्टरों ने कहा कि मुनि टेंशन में हैं। पुलिस उन्हें जांच के लिए दोबारा लेकर आए। सूत्रों के मुताबिक, मामला सेंसिटिव होने के चलते पुलिस फोरेंसिक जांच करवाने की भी तैयारी कर रही है। शांति सागर को पुलिस ने शनिवार रात ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया, लेकिन रिमांड नहीं मांगी गई। पुलिस ने कोई सामान बरामद नहीं करने की बात कही है।

      क्‍या है पूरा मामला

      क्‍या है पूरा मामला

      आरोप है कि भगवान महावीर के नानपुरा स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में आशीर्वाद लेने गई 19 साल की छात्रा के साथ शांतिसागर महाराज ने रेप किया है। छात्रा की शिकायत पर 45 वर्षीय शांतिसागर महाराज के खिलाफ अठवा थाने में रेप का मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप लगाने वाली लड़की वडोदरा में कॉलेज स्टूडेंट है। लड़की ने पुलिस कमिश्नर को लेटर लिखकर कहा था कि जैन मुनि ने 01 अक्टूबर को शहर के नानपुरा टीमलियावाड जैन धर्मशाला में उससे रेप किया। अपने फैमिली मेंबर्स के साथ वह धार्मिक प्रोग्राम के सिलसिले में वहां गई थी। जैन मुनि इस दौरान सूरत में चातुर्मास के लिए रह रहे थे।

      कौन हैं जैन मुनि आचार्य शांति सागर

      कौन हैं जैन मुनि आचार्य शांति सागर

      शांतिसागर बचपन से लेकर जवानी तक एमपी के गुना डिस्ट्रिक्ट में ताऊजी के साथ रहे। उनके एक दोस्त ने बताया कि पहले उनका नाम गिरराज शर्मा था। उनका परिवार कोटा में रहता था। पिता सज्जनलाल शर्मा वहीं पर हलवाई थे। दोस्त ने बताया कि गिरराज मौज-मस्ती में जीने वाला था। खूब क्रिकेट खेलता था। पढ़ाई में एवरेज था। उनके दोस्तों का ग्रुप शहर में उन दिनों के सबसे फैशनेबल युवाओं का था।

      कपड़े हों या हेयर कट, नए ट्रेंड को सबसे पहले यही ग्रुप अपनाता था। गिरराज 22 साल की उम्र में मंदसौर में जैन संतों के कॉन्टैक्ट में आए। पढ़ाई अधूरी छोड़कर वहीं दीक्षा लेकर गिरराज से शांतिसागर महाराज बन गए। संन्यासी बनने के तीन दिन पहले वह गुना आए थे। दो दिन बिताने के बाद कभी गुना नहीं लौटे।

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      English summary
      Jain Muni Shanti Sagar Maharaj claims, Make physical relation with girl's consent.

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