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J&K: आर्टिकल-370 हटने के बाद श्रीनगर के मुगल गार्डन की ऐसे चमकने वाली है किस्मत

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नई दिल्ली- जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने श्रीनगर के मशहूर मुगल गार्डन को विश्व धरोहर बनाने की दिशा में गंभीर प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसके लिए राज्य सरकार प्रोफेशनल कंसल्टेंट को नियुक्त कर रही है, जो श्रीनगर के मुगल गार्डन को यूनेस्को की ओर से संरक्षित की जाने वाली विश्व धरोहरों की लिस्ट में शामिल कराने के लिए पुख्ता दस्तावेज तैयार करेगा। 16वीं-17वीं शताब्दी में बना यह गार्डन ऐतिहासिक महत्त्व का है और माना जा रहा है कि विश्व धरोहर बनने के बाद इसे देखने आने वाले विदेशी पर्यटकों की तादाद में भारी इजाफा हो सकता है। यह गार्डन श्रीनगर के प्राकृतिक नजारों के बीच जितना खूबसूरत दिखता है, इसके निर्माण में तत्कालीन इंजीनियरिंग की बेहतरीन नमूने की भी झलक मिलती है। अब सरकार ने जिस तरह से इसकी ओर प्रयास शुरू किया है, उससे लगता है कि जल्द ही इसकी किस्मत चमकने वाली है।

ऐतिहासिक महत्त्व वाला है श्रीनगर का मुगल गार्डन

ऐतिहासिक महत्त्व वाला है श्रीनगर का मुगल गार्डन

कश्मीर के मुगल गार्डन के 6 हिस्स हैं और ये सबसे मिलकर बना है। इसमें मशहूर निशात बाग, शालीमार बाग, चश्मे शाही, परी महल, वेरिनाग और अचबल शामिल हैं। यह गार्डन 16वीं और 17वीं शताब्दी में मुगल बादशाहों जैसे जहांगीर और शाहजहां के शासनकाल में बनकर तैयार हुआ था। ईटी के मुताबिक इस मुगल गार्डन को वर्ल्ड हेरिटेज साइट बनाने के लिए राज्य सरकार ने जो दस्तावेज जुटाए हैं, उसके अनुसार मुगल बादशाह जहांगीर के जमाने में यह कश्मीर की शान माना जाता था और इसमें उसके कश्मीर और अपने बेटे शाहजहां के प्रति बेइंतहा प्रेम भी झलक भी मिलती है। दस्तावेज इस बात की भी गवाही देता है कि जहांगीर ने ही इस बाग को बनाने के लिए इस स्थान को चुना था, जिसे यहां परंपरागत रूप से मौजूद बागों के ढर्रे पर बनवाया गया था। यूनेस्को के लिए तैयार किए जा रहे प्रस्ताव में इस बात का भी जिक्र किया जा रहा है कि इसे किस तरह से पहाड़ के निचले हिस्से में तैयार किया गया था, ताकि इसके लिए पानी की जरूरतों को आसानी से पूरा किया जा सके।

यूनेस्को की लिस्ट में शामिल होने से क्या होगा?

यूनेस्को की लिस्ट में शामिल होने से क्या होगा?

जाहिर है कि मुगल गार्डन के यूनेस्को के विश्व धरोहर की लिस्ट में शामिल होने के साथ ही इसके प्रति अंतरराष्ट्रीय आकर्षण में इजाफा होगा और दुनियाभर के लोग यहां आकर इसकी खूबसूरती को अपनी आंखों में कैद कर सकेंगे। इसके अलावा यूनेस्को धरोहर बनने के बाद इसके संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं और मानदंडों का उपयोग शुरू हो सकेगा, जिससे इसका रखरखाव और बेहतर होने की उम्मीद है।

दस्तावेज क्या कहता है ?

दस्तावेज क्या कहता है ?

प्रस्तावित दस्तावेज के मुताबिक शानदार, प्राकृतिक रूप से पहाड़ों से घिरे भू-भाग में जिस तरह से ये बाग मौजूद है, वह शायद भारत में स्थित किसी भी मुगल गार्डन में देखने को नहीं मिलता। पर्वतीय क्षेत्र में बनाए गए इस बाग में मुगल इंजीनियरिंग के हुनर की बेहतरीन झलक दिखती है, जो यहां उपलब्ध पानी का अधिकतम उपयोग करके यहां के प्राकृतिक नजारे को बहुत ही सुंदर बनाता है और किसी भी चीज की पूर्णता का बेहतरीन नमूना प्रस्तुत करता है।

कंसल्टेंट की क्या होगी जिम्मेदारी ?

कंसल्टेंट की क्या होगी जिम्मेदारी ?

श्रीनगर के मुगल गार्डन को विश्व धरोहर में शामिल कराने के लिए नियुक्त कंसल्टेंट कि ये जिम्मेदारी होगी कि वह इस तरह से मसौदा तैयार करे, जिससे इसके लिए यूनेस्को के निर्धारित मापदंडों के मुताबिक आउटस्टैंडिंग यूनिवर्सल वैल्यू (ओयूवी) का दावा पेश किया जा सके। यूनेस्को के विश्व धरोहर के लिए नामांकन दर्ज कराने के लिए कंसल्टेंट आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सेक्रेटेरिएट और संस्कृति विभाग के बीच संपर्क और तालमेल बिठाएगा। इस संबंध में एक तात्कालिक प्रस्ताव करीब एक दशक पहले ही बढ़ाया गया था, लेकिन उसके बाद उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

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J&K: आर्टिकल-370 हटने के बाद श्रीनगर के मुगल गार्डन की ऐसे चमकने वाली है किस्मत
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