जानिए चीनी सीमा पर तैनात भारतीय जवान क्यों सीख रहे हैं चाइनीज
मध्य प्रदेश के सांची में स्थित बौद्ध यूनिवर्सिटी में चीन की सीमा पर तैनात इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों की चीनी भाषा सिखाई जा रही है। इस भाषा को सीखाने का मकसद चीन की सीमा के समय तैनाती में सुरक्षा कार्यों को और मजबूती प्रदान करना है।
भोपाल। मध्य प्रदेश के सांची में स्थित बौद्ध यूनिवर्सिटी में चीन की सीमा पर तैनात इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों की चीनी भाषा सिखाई जा रही है। इस भाषा को सीखाने का मकसद चीन की सीमा के समय तैनाती में सुरक्षा कार्यों को और मजबूती प्रदान करना है। पिछले साल यहां पर आइटीबीपी के दो ऑफिसर्स और दो जवानों को इसी यूनिवर्सिटी से चाइनीज भाषा की ट्रेनिंग दी गई थी। अच्छा रिस्पांस मिलने पर सरकार ने इस साल 25 जवानों को चाइनीज भाषा सीखने की अनुमति दी है।

साल 2016-17 से शुरू हुआ है कोर्स
बौद्ध यूनिवर्सिटी के पब्लिक रिलेशंस ऑफिसर विजय दुबे ने बताया कि जुलाई से 25 जवानों को चाइनीज भाषा सिखाने की कक्षाएं शुरू हो जाएंगी। यह एक साल का कोर्स होगा। सरकार की विशेष अनुमति पर जवानों को चाइनीय भाषा सिखाई जा रही है। इससे आइटीबीपी के जवानों को उत्तराखंड, हिमाचल, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर की सीमा से सटे गांव के लोगों से चाइनीज भाषा में संपर्क करने में मदद मिलेगी। सांची बौद्ध स्तूप से 12 किलोमीटर की दूरी पर बौद्ध विश्वविद्यालय 2012 में खोला गया था, लेकिन चाइनीज भाषा का कोर्स 2016-17 से शुरू कर दिया गया है। हाईस्कूल के बच्चों को प्रवेश परीक्षा के माध्यम से एडमिशन दिया जाता है। किताबें हिंदी, अंग्रेजी और चायनीज तीनों ही भाषा में होती हैं, जिससे छात्र जल्दी चाइनीज सीख जाते हैं। वैसे विवि में बौद्ध धर्म से संबंधित पाठ्यक्रम पढ़ाए जाते हैं।












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