ओडिशा: कालिया योजना से बदल रही किसानों की जिंदगी, देश को दिखा रही रास्ता

भुवनेश्वर, 19 जुलाई: ओडिशा में कालिया योजना की शुरुआत मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने दिसंबर 2018 में की थी।राज्य के लघु, सीमांत किसानों और भूमिहीन खेतिहर मजदूरों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए शुरू की गई इस योजना को किसानों की आय बढ़ाने और उनकी स्थिति सुधारने की तरफ एक गेम चेंजर के रूप में देखा जा रहा है। कालिया योजना कृषि के क्षेत्र में देश की पहली योजना थी, जिसने भूमिहीन बटाईदारों और कमजोर किसान परिवारों की मदद की है।

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कालिया स्कीम दूसरी कृषि नीतियों की तरह टुकड़ों में सहायता प्रदान नहीं करती है। यह कृषि समुदाय में उपेक्षित और वंचितों को सशक्त बनाती है और उन्हें जीविका के लिए सीधे सहायता प्रदान करती है। अपनी दीर्घकालिक दृष्टि के साथ, यह योजना किसान परिवारों के लिए एक समग्र कल्याणकारी समाधान देती है। इस योजना की कुल लागत 10,180 करोड़ रुपए (करीब 1.4 बिलियन डालर) है। ये राशि 2018-19 से 2021-22 तक तीन वर्षों के लिए की गई है। योजना के तहत छोटे, सीमांत और भूमिहीन किसान परिवारों को अब तक 8,249 करोड़ रुपए ट्रासंफर हो चुके हैं।

कालिया स्कीम के तगत 40 लाख से अधिक किसान परिवारों को लाभ दिया जा रहा है। यह छोटे और सीमांत किसानों को पांच फसली मौसम में 25,000 रुपए की आय सहायता प्रदान करता है। इसके अलावा, प्रत्येक भूमिहीन कृषि परिवार को 12,500 रुपए की वित्तीय सहायता मिलती है, जबकि प्रत्येक कमजोर कृषक परिवार को 10,000 रुपए योजना के तहत मिलते हैं।

पिछले दो वर्षों में कालिया योजना को काफी जबरदस्त सफलता मिल है। हजारों कमजोर किसान परिवारों के जीवन पर इसके सकारात्मक प्रभाव को स्वीकार किया गया है और इसकी सराहना की गई है। कोरोना महामारी जैसे बड़े स्वास्थ्य संकट के समय सबसे गरीब तबके को इस योजना की वजह से जो आर्थिक सुरक्षा मिली, उसकी भी काफी सराहना हुई है। हालांकि योजना की बड़ी उपलब्धि इसको तेज गति से जमीन पर उतारना रहा है।

सरकारी योजनाओं को आमतौर पर धरातल पर उतारने में एक साल या उससे अधिक समय लगता है। कालिया योजना में टेक्नॉलजी की मदद से इसे केवल 15 दिनों में कागज से रेडी-टू-डिलीवर ऑन फील्ड में बदल दिया गया। आईटी की मदद से इस स्कीम को जिस तेजी से जमीन पर उतारा गया, वो भी दूसरों के लिए एक केस स्टडी है। ओडिशा सरकार के 5T (पारदर्शिता, प्रौद्योगिकी, टीमवर्क, परिवर्तन के लिए अग्रणी समय) शासन मॉडल की आधारशिला है। कालिया इसी पर तैयार की गई है। मजबूत टेक्नॉलजी के चलते योजना को कभी भी बड़े पैमाने पर मुद्दों का सामना नहीं करना पड़ा और न ही किसी प्रणाली के टूटने का सामना करना पड़ा। शुरू में लाभार्थियों की भारी संख्या तक पहुंचने, उन्हें पंजीकृत करने, पंजीकरण की जांच करने और फिर प्रत्येक को पात्रता के हिसाब से हस्तांतरण को सुनिश्चित करने में कुछ चुनौतियां जरूर आईं।

योजना की घोषणा के दो सप्ताह के भीतर 9.5 मिलियन आवेदन आए। जिसके बाद राज्य प्रशासन ने तब महसूस किया कि उसे एक अलग पैमाने की चुनौती को पार करना होगा। इस प्रक्रिया को 'स्मार्ट किसान पंजीकरण' मॉड्यूल के साथ शुरू किया गया था, जिसमें किसानों की प्रामाणिकता की जांच करने और डेटाबेस को छांटने के लिए 20 से अधिक डेटा सेट शामिल थे। भूमि रिकॉर्ड डेटाबेस के साथ किसानों की पहचान करने के लिए टेक्नॉलजी का व्यापक रूप से उपयोग किया गया। राज्य ने जनवरी 2019 में सत्यापन के पहले चरण के दौरान केवल दो सप्ताह में 6.5 मिलियन आवेदनों के डेटाबेस को संकलित और प्रमाणित किया।

इसमें सबसे पहले, राज्य के डेटाबेस को कालिया योजना का विकल्प चुनने के इच्छुक किसानों से आमंत्रित किए गए आवेदनों को साथ एकीकृत किया गया। इसके बाद सत्यापन हुआ। ये कृषि जनगणना, सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए), राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्ट्री (एनपीआर), राज्य सरकार के कर्मचारियों के एचआरएमएस डेटाबेस, बैंक डेटाबेस के माध्यम से बैंक खाता सत्यापन और डी-डुप्लीकेशन जैसे कई डेटाबेस के माध्यम से किया गया था। डेटा एकीकरण के लिए एल्गोरिदम तैयार किए गए थे। इसमें बड़ा काम अपात्र लाभार्थियों को बाहर करना था और सही लोगों को चुनना था।

प्रारंभिक चुनौती जमीनी या ग्राम पंचायत स्तर से डेटा प्राप्त करना था। राज्य डाटा सेंटर (एसडीसी) को 6,700 ग्राम पंचायतों से डेटा लोड को संभालने के लिए मजबूत किया गया। स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (स्वान) का उपयोग किया गया ताकि कालिया पोर्टल सर्वर के साथ-साथ ब्लॉक और ग्राम पंचायतों के साथ समर्पित कनेक्टिविटी स्थापित की जा सके। डेटा लोड को संभालने के अलावा, मुख्य चिंता कालिया लाभार्थियों के डेटा को सुरक्षित करना था। एसडीसी और ओडिशा कंप्यूटर एप्लीकेशन सेंटर (ओसीएसी) से लिए गए अधिकारियों की एक टीम ने आईटी बुनियादी ढांचे और दिन-प्रतिदिन के कार्यों का निरीक्षण किया। कालिया की सफलता आईटी की ताकत को प्रमाणित करती है कि कैसे जब सही उपयोग किया जाता है, तो यह डिजाइन और वितरण के बीच के अंतर को कम करने में बड़ी मददगार साबित हो सकती है।

यह योजना हाल के दिनों में तब सुर्खियों में आई जब एक साथ 4.2 मिलियन कमजोर किसान परिवारों, 3.7 मिलियन छोटे और सीमांत किसानों और 5 लाख मिलियन भूमिहीन कृषि परिवारों के बैंक खातों में 920 करोड़ रुपए हस्तांतरित किए गए। कालिया इस ताकत को दिखाती है कि कैसे टेक्नॉलजी की मदद से बड़े परिवर्तन किए जा सकते हैं। अगर सरकारें नागरिकों को डिजिटल ताकत की मदद से सहायता पहुंचाने के लिए आगे आती हैं तो ओडिशा मदद के लिए तैयार है।

(लेखक ओडिशा के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी और साइंस एंड टेक्नॉलजी विभाग के सचिव और मुख्यमंत्री के ओएसडी हैं)

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