हाईकोर्ट ने CBI से पूछा- पता करिए चिंकी जातिसूचक शब्द है या नहीं?
नई दिल्ली। केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) से दिल्ली की हाई कोर्ट ने यह पता करने को कहा है कि चिंकी जातिसूचक शब्द की श्रेणी में आता है या नहीं? क्या चिंकी शब्द को निम्न जाति वर्ग कानून की श्रेणी में रखा गया है? न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा ने सीबीआइ से कहा कि यह भी पता करें कि क्या इस संबंध में कोई अधिसूचना जारी की गई है?आपको बता दें कि आमतौर पर पूर्वोत्तर के लोगों द्वारा ऐसे शब्दों का प्रयोग किया जाता है। उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। इसमें से एक याचिका सीबीआइ द्वारा दाखिल की गई थी जबकि दूसरी याचिका पूर्वोत्तर के छात्र नीडो तानिया के पिता की है।

नीडो तानिया के पिता ने हाई कोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि निचली अदालत ने मामले में जातिसूचक टिप्पणी से जुड़ी धाराएं हटा ली हैं। वहीं, पीठ ने सीबीआइ से चिंकी शब्द के बारे में ये जानकारियां तब मांगीं जब पीठ को बताया गया कि सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई सूचना में बताया गया था कि चिंकी शब्द जातिसूचक टिप्पणी के दायरे में नहीं आता है। इस दौरान सीबीआइ के वकील राजदीपा बेहुरा ने कहा कि गवाहों के बयान के आधार पर पता चला कि आरोपित पीड़ित को बुलाने के लिए जातिसूचक शब्द चिंकी का इस्तेमाल करते थे।
दिल्ली में पीट-पीटकर की गई थी नीडो तानिया की हत्या
तानिया के बालों की शैली को लेकर दिल्ली के लाजपत नगर इलाके में कुछ दुकानदारों ने उस पर छींटाकशी की थी जिसे लेकर झगड़ा हुआ था। इसके बाद दुकानदारों ने उसे पीटा भी था। अगले दिन उसे एम्स लाया गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। मामला साल 2014 का है।












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